हिसार: स्वाइन फ्लू ने ली 8 लोगों की जान, प्रशासन सो रहा कुंभकर्णी नींद

Edited By Deepak Paul, Updated: 28 Dec, 2018 05:50 PM

hissar swine flu killed 8 people

हिसार जिले में घातक बिमारी स्वाइन फ्लू ने पैर पसारने शुरु कर दिए हैं। जिसके चलते आठ दिनों में 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। बड़े- बड़े दावे करने वाला स्वास्थ्य विभाग फ्लू को रोकने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है। इस बिमारी से पीड़ित मरीजों...

हिसार(विनोद सैनी): हिसार जिले में घातक बिमारी स्वाइन फ्लू ने पैर पसारने शुरु कर दिए हैं। जिसके चलते आठ दिनों में 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। बड़े- बड़े दावे करने वाला स्वास्थ्य विभाग फ्लू को रोकने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है। इस बिमारी से पीड़ित मरीजों में संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बावजूद इसके प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंगी। बताया जा रहा है कि ये बिमारी सुअरों से व्यक्ति के शरीर में आती है, बावजूद इसके अस्पताल के बाहर सुअर खुलेआम घूम रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन न जाने कितनी मौतों के बाद कुंभकर्णी नींद से सो कर उठता है।   
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सुत्रों में मिली जानकारी के अनुसार अब तक हिसार में स्वाइन फ्लू की चपेट में आने से 8 लोगों की मौत हो चुकी है। 20 अक्तूबर को मिर्जापुर निवासी 55 वर्षीय बजरंग लाल की मौत हुई थी। खरड़ निवासी 30 वर्षीय पवन कुमार की 22 दिसंबर को हांसी के हनुमान कॉलोनी निवासी महिला बंटी की मौत हुई। 19 दिसंबर गांव बास निवासी 50 वर्षीय महिला कृष्णा देवी की 22 दिसंबर, सैनियान मोहल्ला बरवाला निवासी 50 वर्षीय विमला की 25 दिसंबर को, हांसी निवासी 42 वर्षीय ललिता की 24 दिसंबर को और गांव मदनहेड़ी निवासी 29 वर्षीय रितु रानी की 26 दिसंबर को स्वाइन फ्लू के कारण मौत हो चुकी है। 
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जिला उपायुक्त अशोक कुमार मीणा ने बातचीत के दौरान बताया कि अभी तक 6 मौतें हुई है, जिसमें से 3 मौतें लापरवाही के चलते हुई हैं। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू को रोकने के लिए दिशा निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल के चिकित्सक रामबिलास गोयत ने बताया कि स्वाइन फ्लू ऐसा वायरल है जो आदमी से आदमी को होता है। उन्होंने कहा कि इस मौसम में ये अधिक फैल रहा है। आदमी को सकुबह घर से निकलने से पहले नाशता जरूर करना चाहिए। 

तीन कैटागिरी के होते हैं स्वाइन फ्लू
1. पहली कैटागिरी के मरीज को उपचार के दौरान घर में आराम से रखा जा सकता है। 
2. दूसरी कैटागिरी के मरीज को घर वालों से दूर रखने की सलाह दी जाती है। 
3. तीसरी कैटागिरी के मरीज को उपचार के दौरान केवल अस्पताल में रखा जा सकता है। 
 

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