Haryana News: यूनिवर्सल बिल्डवेल के पूर्व प्रमोटरों की 153 करोड़ की संपत्ति कुर्क, गुरुग्राम में ED की बड़ी कार्रवाई

Edited By Deepak Kumar, Updated: 29 Sep, 2025 09:26 AM

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प्रवर्तन निदेशालय ने हरियाणा के गुरुग्राम में यूनिवर्सल बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व प्रमोटरों की 153.16 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क कर बड़ी कार्रवाई की है। गु

डेस्कः प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हरियाणा के गुरुग्राम में यूनिवर्सल बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व प्रमोटरों की 153.16 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क कर बड़ी कार्रवाई की है। गुरुग्राम स्थित ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय ने कंपनी और उसकी समूह संस्थाओं के पूर्व प्रमोटरों एवं उनके सहयोगियों की कुल 153.16 करोड़ रुपए की अचल और चल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर ली हैं।

ईडी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में राजस्थान के कोटपुतली-बहरोड़ इलाके की 29.45 एकड़ जमीन, गुरुग्राम सेक्टर-49 स्थित यूनिवर्सल ट्रेड टॉवर की कई इकाइयां तथा 3.16 करोड़ रुपए की सावधि जमा (एफडी) शामिल हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 17 सितंबर 2025 को जारी अंतरिम कुर्की आदेश के आधार पर की गई है।

इसके साथ ही, ईडी ने 19 सितंबर 2025 को गुरुग्राम की विशेष पीएमएलए अदालत में पूर्व प्रमोटरों और उनके सहयोगियों को आरोपी बनाते हुए अभियोजन शिकायत भी दर्ज की है। यह जांच दिल्ली-एनसीआर में यूनिवर्सल बिल्डवेल और उसके प्रमोटरों रमन पुरी, विक्रम पुरी और वरुण पुरी के खिलाफ दर्ज 30 से अधिक आपराधिक एफआईआर के आधार पर की जा रही है। आरोप है कि कंपनी ने रियल एस्टेट परियोजनाओं को समय पर पूरा नहीं किया और घर खरीदारों एवं निवेशकों को धोखा देकर करोड़ों रुपए का वित्तीय नुकसान पहुंचाया।

ईडी ने 22 जुलाई 2025 को तीनों प्रमोटरों और पूर्व निदेशकों को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया था, जो वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। कंपनी को बाद में कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में ले जाया गया, जिसमें राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने घर खरीदारों और वित्तीय लेनदारों के हित में एक समाधान योजना को मंजूरी दी। इसके बावजूद, घर खरीदारों को अपनी संपत्ति हासिल करने के लिए अतिरिक्त धनराशि देना पड़ रही है।

समाधान पेशेवरों के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी और उसके प्रमोटरों ने गुरुग्राम और फरीदाबाद की आठ परियोजनाओं में पिछले 12 वर्षों में 1000 करोड़ रुपए से अधिक घर खरीदारों से जुटाए, लेकिन इसका केवल आंशिक हिस्सा ही निर्माण में खर्च किया गया। बाकी राशि का गबन कर आरोपी प्रमोटरों ने निजी लाभ के लिए जमीन और अन्य संपत्तियां हासिल कीं। उन पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक गबन के गंभीर आरोप हैं।

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