हरियाणा सरकार का किसानों को नवरात्रि पर तोहफा, गेहूं बीज सब्सिडी में बढ़ोतरी

Edited By Deepak Kumar, Updated: 22 Sep, 2025 11:27 AM

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हरियाणा सरकार ने नवरात्रि के शुभ अवसर पर किसानों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार ने प्रमाणित गेहूं बीज पर दी जाने वाली सब्सिडी को बढ़ाकर 1075 रुपये प्रति क्विंटल करने का निर्णय लिया है, जो पिछले वर्ष 1000 रुपये...

डेस्कः हरियाणा सरकार ने नवरात्रि के शुभ अवसर पर किसानों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार ने प्रमाणित गेहूं बीज पर दी जाने वाली सब्सिडी को बढ़ाकर 1075 रुपये प्रति क्विंटल करने का निर्णय लिया है, जो पिछले वर्ष 1000 रुपये प्रति क्विंटल थी।

प्रमाणित बीजों की बिक्री और कीमत

  • प्रमाणित गेहूं बीजों की बिक्री एचएसडीसी, एनएससी, हैफेड, एचएलआरडीएल, इफको, कृभको, एनएफएल जैसी सरकारी एजेंसियों के बिक्री काउंटरों के माध्यम से की जाएगी।
  • इस वर्ष प्रमाणित गेहूं बीज का बिक्री मूल्य 3000 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष 2875 रुपये प्रति क्विंटल था।
  • बढ़ी हुई कीमत का कारण गेहूं के एमएसपी में 150 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि और बीज उत्पादक किसानों को 50 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाना है।

किसानों को होने वाले लाभ

कम लागत: सब्सिडी के बाद किसानों को बीज की कीमत लगभग 1925 रुपये प्रति क्विंटल पड़ेगी, जिससे प्रति एकड़ लागत करीब 1200 रुपये होगी।

समय पर बुआई: सब्सिडी के चलते किसान समय पर और सस्ते दामों पर उच्च गुणवत्ता वाला बीज खरीद सकेंगे।

बेहतर उपज: प्रमाणित और उन्नत किस्मों के बीजों से रोग-प्रतिरोधी और अधिक उपज देने वाली फसलें मिलेंगी।

आर्थिक लाभ: किसानों की आय बढ़ेगी और उत्पादन लागत में कमी आएगी।

गेहूं उत्पादन की स्थिति

हरियाणा में हर वर्ष लगभग 60-62 लाख एकड़ क्षेत्र में गेहूं की बुवाई होती है। राज्य में 12-14 लाख क्विंटल प्रमाणित गेहूं बीज की बिक्री होती है, जिसमें से 5.5 लाख क्विंटल बीज सरकारी एजेंसियों के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराया जाता है। शेष बीज निजी कंपनियों द्वारा बेचे जाते हैं।

हरियाणा सरकार का यह निर्णय किसानों के लिए एक सकारात्मक पहल है। इससे न केवल बीज की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार होगा, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी। यह कदम खाद्य सुरक्षा और कृषि आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

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