हरियाणा से कर्नाटक तक सुर्खियों में हैं कांग्रेस के ‘चाणक्य’ रणदीप सुर्जेवाला! विरोधी भी करने लगे हैं तारीफ

Edited By Krishan Rana, Updated: 08 Jun, 2026 09:28 PM

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुर्जेवाला भी ऐसे ही नेताओं में शुमार हैं, जिन्हें कांग्रेस की सियासत का

चंडीगढ़ (संजय अरोड़ा): भारतीय राजनीति में कुछ नेता ऐसे होते हैं जो केवल चुनाव लडऩे या बयान देने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि संगठन को मजबूत बनाने, संकट की घड़ी में समाधान निकालने और राजनीतिक समीकरणों को साधने की अपनी क्षमता के कारण अलग पहचान बनाते हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुर्जेवाला भी ऐसे ही नेताओं में शुमार हैं, जिन्हें कांग्रेस की सियासत का चाणक्य कहा जाता है। हरियाणा की राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक का उनका सफर संगठनात्मक कौशल, राजनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता का उदाहरण माना जाता है। यही वजह है कि आज वे हरियाणा से लेकर कर्नाटक तक राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में बने हुए हैं।

हरियाणा के नरवाना से राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले रणदीप सिंह सुर्जेवाला ने युवा कांग्रेस से लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक अपनी अलग पहचान बनाई। वे विधायक रहे, मंत्री रहे, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने और वर्तमान में राज्यसभा सांसद तथा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

सुर्जेवाला को गांधी परिवार का भी करीबी माना जाता है। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें कर्नाटक जैसे राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण राज्य का प्रभारी बनाया है, जहां उनकी भूमिका केवल संगठन तक सीमित नहीं, बल्कि सरकार और संगठन के बीच एक मजबूत सेतु की भी है। पिछले कुछ महीनों में कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर चली चर्चाओं और सत्ता हस्तांतरण की संभावनाओं ने राजनीतिक हलकों में खूब सुर्खियां बटोरीं। विपक्ष को उम्मीद थी कि इस मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर टकराव की स्थिति पैदा होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

खास बात यह है कि जब कर्नाटक में मुख्यमंत्री का बदलाव हुआ तो उस समय विरोधियों के तमाम कयासों के विपरीत सौहार्दपूर्ण माहौल में सत्ता हस्तांतरण तो गया, मगर दो मंत्रियों का विभागों को लेकर अंसतोष जाहिर करना कांग्रेस के लिए चुनौती बन गया था, मगर इस चुनौती का भी अपनी कुशल रणनीति से सामना करते हुए पार्टी प्रभारी रणदीप सुर्जेवाला कुछ ही घंटों में हल निकालते हुए दोनों मंत्रियों को संतुष्ट करने में कामयाब हुए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर संवाद बनाए रखने और विभिन्न नेताओं के बीच संतुलन स्थापित करने में रणदीप सुर्जेवाला की भूमिका महत्वपूर्ण रही। उन्होंने लगातार संगठनात्मक अनुशासन और एकजुटता का संदेश दिया, जिसके चलते कांग्रेस किसी बड़े विवाद से बची रही।

कर्नाटक में उनकी सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे नियमित रूप से राज्य का दौरा करते हैं, कार्यकत्र्ताओं और नेताओं से संवाद करते हैं तथा सरकार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर नजर बनाए रखते हैं। दूसरी ओर हरियाणा में भी सुर्जेवाला लगातार भाजपा सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरते रहे हैं। शिक्षा, किसानों की समस्याएं, कानून व्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी, मतदाता सूची में कथित गड़बडिय़ां और जनहित से जुड़े विषयों पर उन्होंने लगातार अपनी आवाज बुलंद की है। उनकी आक्रामक शैली और तथ्यों के साथ सरकार को घेरने की रणनीति उन्हें विपक्ष के प्रभावी चेहरों में शामिल करती है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि रणदीप सुर्जेवाला की सबसे बड़ी ताकत संवाद और समन्वय की क्षमता है। वे संगठन के भीतर विभिन्न विचारधाराओं और नेताओं के बीच संतुलन बनाने में सक्षम माने जाते हैं। यही कारण है कि कांग्रेस नेतृत्व लगातार उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपता रहा है। हरियाणा की राजनीति से निकला यह नेता आज राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की रणनीति तय करने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। 

विरोधी भी करने लगे हैं रणदीप की तारीफ

कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य प्रभारी रणदीप सिंह सुर्जेवाला की कार्यशैली चर्चा का विषय बनी हुई है। खास बात यह है कि उनकी प्रशंसा अब केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि विपक्षी दलों के कई नेता भी उनके राजनीतिक प्रबंधन और संगठनात्मक कौशल की सराहना करते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में यहां तक चर्चा होने लगी है कि भाजपा को भी अपने संगठन में सुर्जेवाला जैसी सक्रियता और समन्वय क्षमता वाला प्रभारी चाहिए। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में सत्ता हस्तांतरण का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना हुआ था।

मुख्यमंत्री पद को लेकर विभिन्न तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। विपक्ष को उम्मीद थी कि नेतृत्व परिवर्तन के दौरान कांग्रेस के भीतर बड़ा विवाद पैदा होगा और इसका राजनीतिक लाभ भाजपा को मिलेगा, लेकिन घटनाक्रम पूरी तरह अलग दिशा में गया। सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हुई और कांग्रेस में किसी बड़े सार्वजनिक टकराव की स्थिति पैदा नहीं हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे रणदीप सिंह सुर्जेवाला की रणनीतिक भूमिका और लगातार संवाद बनाए रखने की क्षमता महत्वपूर्ण रही। सुर्जेवाला पिछले करीब पांच वर्षों से कर्नाटक की राजनीति में बेहद सक्रिय रहे हैं। वे केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि संगठन के प्रत्येक स्तर पर कार्यकत्र्ताओं और नेताओं के संपर्क में बने रहे।

मंत्रियों के विभागों को लेकर उत्पन्न विवादों से लेकर संगठनात्मक असंतोष तक, उन्होंने समय रहते हस्तक्षेप कर समाधान निकालने का प्रयास किया। यही कारण है कि कांग्रेस के भीतर भी उन्हें एक प्रभावी संकटमोचक के रूप में देखा जाने लगा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि किसी भी राज्य में जहां पार्टी की सरकार हो वहां प्रभारी की भूमिका केवल केंद्रीय नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसे संगठन और सरकार के बीच संतुलन स्थापित करना होता है। कर्नाटक में सुर्जेवाला ने इस भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाया है।

वे नियमित रूप से राज्य का दौरा करते हैं, स्थानीय नेताओं से फीडबैक लेते हैं और उत्पन्न होने वाले विवादों को सार्वजनिक होने से पहले ही सुलझाने का प्रयास करते हैं। दूसरी ओर भाजपा की राज्य इकाई लंबे समय से संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है। राज्य अध्यक्ष के चयन से लेकर विभिन्न गुटों के बीच समन्वय तक कई मुद्दे चर्चा का विषय बने हुए हैं।

ऐसे में कुछ भाजपा नेताओं द्वारा भी यह स्वीकार किया जा रहा है कि कांग्रेस ने संगठनात्मक प्रबंधन के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्ष 2028 के विधानसभा चुनावों और उससे पहले होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए कर्नाटक की राजनीति में संगठनात्मक मजबूती निर्णायक भूमिका निभाएगी। कांग्रेस इस दिशा में लगातार तैयारी कर रही है और रणदीप सिंह सुरजेवाला की सक्रियता को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। 

संगठन के कुशल रणनीतिकार हैं रणदीप सुर्जेवाला

रणदीप सुर्जेवाला का नाम आज कांग्रेस के उन नेताओं में शुमार है, जिन्होंने संगठन और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने की अपनी क्षमता से अलग पहचान बनाई है। हरियाणा के कैथल जिले से संबंध रखने वाले सुरजेवाला छात्र राजनीति से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक का लंबा अनुभव रखते हैं। वे युवा कांग्रेस और एन.एस.यू.आई. से सक्रिय राजनीति में आए और बाद में कांग्रेस के प्रमुख राष्ट्रीय चेहरों में शामिल हो गए।

रणदीप सिंह सुर्जेवाला चार बार हरियाणा विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं। वर्ष 1996 में वे पहली बार नरवाना विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए थे। दूसरी बार वे 2005 में नरवाना से जबकि 2009 और 2014 में कैथल विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने। कांग्रेस की भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार में उन्होंने उद्योग, संसदीय कार्य, लोक निर्माण, बिजली, सिंचाई तथा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। एक मंत्री के रूप में उनकी पहचान प्रशासनिक दक्षता और प्रभावी संवाद शैली के लिए रही। राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण रही है।

वे लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी भी रहे और पार्टी का पक्ष मजबूती के साथ मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर रखते रहे। अपनी तार्किक शैली और राजनीतिक मुद्दों की गहरी समझ के कारण वे कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली प्रवक्ताओं में गिने जाते रहे हैं। इसके अलावा वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के रूप में भी कार्य कर रहे हैं।

वर्तमान में रणदीप सिंह सुर्जेवाला राज्यसभा सदस्य हैं और कांग्रेस संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि संगठन को सक्रिय रखने, कार्यकत्र्ताओं से सीधा संवाद बनाए रखने और संकट की घड़ी में नेतृत्व क्षमता दिखाने की कला ने रणदीप सिंह सुर्जेवाला को कांग्रेस के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में शामिल कर दिया है। आगामी वर्षों में भी कांग्रेस संगठन में उनकी भूमिका और प्रभाव और अधिक बढऩे की संभावना जताई जा रही है।

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