कंबोडियाई ठगों को 2100 ई-सिम भेजने का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, NIA अधिकारी बनकर किया डिजिटल अरेस्ट

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 14 Feb, 2026 02:53 PM

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साइबर क्राइम वेस्ट थाना पुलिस ने फर्जी एनआईए अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी कंबोडिया और चीन में बैठे साइबर ठगों को भारतीय ई-सिम और फर्जी लोन ऐप का बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराता था।

गुड़गांव, (ब्यूरो): साइबर क्राइम वेस्ट थाना पुलिस ने फर्जी एनआईए अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी कंबोडिया और चीन में बैठे साइबर ठगों को भारतीय ई-सिम और फर्जी लोन ऐप का बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराता था। पुलिस ने आरोपी से 87 जियो सिम कार्ड,  42 हाई-एंड मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया है। आरोपी को तीन दिन के रिमांड के बाद अदालत में पेश किया गया। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस मामले में अब तक उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिम बंगाल से कुल 8 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

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दरअसल, साइबर क्राइम वेस्ट थाना पुलिस में दी शिकायत में एक व्यक्ति ने बताया कि उसके पास  व्हाट्सऐप के माध्यम से वीडियो कॉल आई। जिसमें कॉलर ने खुद को एनआईए अधिकारी बताया और शिकायतकर्ता से कहा कि उसका बैंक अकाउंट में अवैध गतिविधि के 70 लाख रुपए कमिशन के आए हैं। उसने डिजिटल अरेस्ट करके शिकायतकर्ता से रुपए ट्रांसफर करवा लिए। पुलिस ने केस दर्ज कर छानबीन शुरु कर दी। मामले में एसीपी साइबर क्राइम प्रियांशु दीवान की अगुवाई में साइबर क्राइम वेस्ट थाना प्रभारी इंस्पेक्टर  संदीप कुमार की टीम ने एक आरोपी को पश्चिम-बंगाल से काबू कर लिया। जिसकी पहचान रजत (28) निवासी अलीपुरद्वार (पश्चिम-बंगाल) के रूप में हुई। पुलिस ने आरोपी से 87 जियो सिम कार्ड, 42 हाई-एंड मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया है।


अजमेर से मंगाकर कंबोडिया भेजता सिम:
रिमांड के दौरान आरोपी रजत ने बताया कि वह राजस्थान के अजमेर से फर्जी तरीके से खरीदे गए भौतिक सिम कार्ड मंगवाता था। वह इनको एप्पल आईफोन के जरिए ई-सिम में बदलता और टेलीग्राम से कंबोडिया में बैठे ठगों को क्यूआर कोड भेज देता था। प्रत्येक ई-सिम के बदले उसे 22 एसडीटी (क्रिप्टो करेंसी) मिलती थी। पुलिस के मुताबिक, वह अब तक 2100 से अधिक ई-सिम विदेश भेज चुका है। आरोपी कंबोडियाई ठगों के लिए एप्पल ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर पर फर्जी लोन ऐप का रजिस्ट्रेशन  भी करवाता था। प्रति ऐप रजिस्ट्रेशन के लिए उसे 3000 रुपये मिलते थे। इन ऐप्स का उपयोग बाद में भोले-भाले लोगों को लोन के जाल में फंसाकर उनसे अवैध वसूली और डेटा चोरी के लिए किया जाता था।


अब तक आठ आरोपी गिरफ्तार:
पुलिस इस केस में रजत के अलावा यूपी के बिजनौर निवासी शुरेब अहमद, आफताब खान, हरियाणा के फतेहाबाद निवासी प्रदीप कुमार, राजस्थान के अजमेर निवासी अरुण सिंह, जसबिंदर सिंह, शफीकुल उर्फ सफीक, बाडमेर निवासी रेखा राम सहित आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

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