Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 14 Oct, 2025 08:54 PM

साइबर क्राइम वेस्ट थाना पुलिस ने बैंक अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करने के फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मौके से दो युवती सहित पांच आरोपियों को काबू किया है। पुलिस ने आरोपियों से 8 मोबाइल, 4 सिम कार्ड और 2 डायरी बरामद कर केस दर्ज कर...
गुड़गांव, (ब्यूरो): साइबर क्राइम वेस्ट थाना पुलिस ने बैंक अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करने के फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मौके से दो युवती सहित पांच आरोपियों को काबू किया है। पुलिस ने आरोपियों से 8 मोबाइल, 4 सिम कार्ड और 2 डायरी बरामद कर केस दर्ज कर लिया और कार्रवाई शुरु कर दी।
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दरअसल, साइबर क्राइम वेस्ट थाना पुलिस में एक व्यक्ति ने शिकायत दी कि किसी ने उसके साथ फर्जी बैंक कर्मचारी बनकर क्रेडिट कार्ड में मासिक चार्ज रिडीम करने की बात कहकर ठगी कर ली। जिस पर पुलिस ने केस दर्ज कर कार्रवाई शुरु कर दी। मामले में एसीपी क्राइम प्रियांशु दीवान की अगुवाई में साइबर क्राइम वेस्ट थाना प्रभारी इंस्पेक्टर संदीप कुमार की टीम ने दिल्ली अक्षरधाम में बने फर्जी कॉल सेंटर पर रेड की। पुलिस ने मौके से दो युवती सहित पांच आरोपियों को काबू कर लिया। आरोपियों की पहचान दिल्ली के उत्तम नगर निवासी ज्ञानेंद्र (36 वर्ष), अमर उर्फ बंटा (26 वर्ष), अमिता (26 वर्ष), यासना (26 वर्ष) व मोहन गार्डन निवासी अमन (24 वर्ष) के रूप में हुई। महिला आरोपी अमिता व यासना को जांच में शामिल किया गया। जबकि आरोपी ज्ञानेंद्र, अमर व अमन को गिरफ्तार कर लिया गया। जिनको अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया गया है।
आरोपी अमर उर्फ बंटा शर्मा ने पुलिस को बताया कि उसका गारमेंट्स का बिजनेस था। जिसमें काफी नुकसान हो गया था। उसी दौरान इसकी मुलाकात एक व्यक्ति से हुई, जो क्रेडिट कार्ड रिचार्ज और अन्य फ्रॉड किया करता था। बंटी उस व्यक्ति के साथ कॉलिंग का काम करने लगा और जून 2025 में इसने यह काम खुद करने की योजना बनाई। उसने अपने जानकार ज्ञानेंद्र को भी पार्टनर बनाया और इन्होंने कॉल करने के लिए यासना व अमिता को भर्ती किया। ये दोनों लोगों के पास कॉल करती व उनको क्रेडिट कार्ड रिचार्ज व रिडीम करने की जानकारी देती। इसके बाद वॉट्सऐप पर लिंक भेजती व उसके फोन का एक्सेस लेकर ओटीपी लेकर क्रेडिट कार्ड से रुपए ट्रांसफर कर लेती थी। यासना व अमिता को कॉलिंग के लिए 25 हजार रुपए वेतन मिलता था।
आरोपी अमर शर्मा ने बताया कि उन्हें डाटा व लिंक इनका एक अन्य साथी उपलब्ध कराता था। ठगी की राशि को एक साथी निकालकर आरोपी अमर को देता था। गुरुग्राम के एक व्यक्ति से इन्होंने 1 लाख 50 हजार रुपए लिए थे। इसमें से याशना व अमिता को 10- 10 हजार रुपए और आरोपी ज्ञानेंद्र को 30 हजार रुपए मिले। बाकी 1 लाख रुपए आरोपी अमर शर्मा के हिस्से में आए।