हरियाणा के गांव-गांव में शुरू होगा डोर-टू-डोर कूडा कलेक्शन, डिप्टी सीएम ने दी जानकारी

Edited By Vivek Rai, Updated: 27 Jun, 2022 08:23 PM

door to door garbage collection will start in haryana s villages too

उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने अधिकारियों को डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने के लिए एक विशेष योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह कार्य किसी कंपनी या एनजीओ के माध्यम से करवाया जाएगा।

चंडीगढ़(धरणी): हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी गांव गंदगी मुक्त हों, ताकि वे चकाचक दिखाई दें। उन्होंने अधिकारियों को डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने के लिए एक विशेष योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह कार्य किसी कंपनी या एनजीओ के माध्यम से करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कूड़ा-करकट की सूखा-गीला के आधार पर छंटनी करके सॉलिड ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाएगा ताकि अच्छे ढंग से इसका निस्तारण किया जा सके।

कूडे के निपटान के लिए बनाई जाएगी खास योजना

उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला सोमवार को विकास एवं पंचायत विभाग के अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस अवसर पर विकास एवं पंचायत मंत्री  देवेंद्र सिंह बबली भी उपस्थित थे। डिप्टी सीएम ने कहा कि राज्य के गांवों में लोग अपने घरों से कूड़ा-करकट  उठाकर बाहर फिरनी या पंचायती जमीन पर डाल देते हैं जिसके कारण गंदगी का आलम बन जाता है। उन्होंने कहा कि बारिश के दिनों में तो बीमारियां फैलने की आशंका बन जाती है। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि लोगों को इसी गंदगी से निजात दिलाने के लिए राज्य सरकार ने डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने की योजना बनाने का निर्णय लिया है और यह कार्य किसी कंपनी या एनजीओ के माध्यम से करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कूड़ा-करकट की सूखा-गीला के आधार पर छंटनी करके सॉलिड ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाएगा ताकि अच्छे ढंग से इसका निस्तारण किया जा सके।

पंचायतों को सौंपी जाएगी कूडे की गाड़ी की जिम्मेदारी

उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसी योजना बनाएं जिसमें डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाली कंपनी अथवा एनजीओ ही गांव के स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी, पंचायत घर आदि सार्वजनिक स्थानों पर निर्धारित कुछ चिन्हित प्वाइंटस से भी वहां का कूड़ा-करकट उठाएं ताकि गांव की गलियों या सड़कों पर पड़ा गोबर व अन्य गंदगी को साफ किया जा सके। उन्होंने कहा कि कूड़ा उठाने वाली कंपनी की गाड़ी का गांव में आने का समय पंचायत या अन्य सामाजिक संस्थाओं से बातचीत करके तय किया जाना चाहिए ताकि लोगों को कोई परेशानी न हो।

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