Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 25 Sep, 2026 02:27 PM

देशभर में डिजिटल लेन-देन के बढ़ते दायरे के बीच साइबर अपराधियों का जाल तेज़ी से फैल रहा है। शेयर बाज़ार में निवेश, आईपीओ में भारी मुनाफे, पार्ट-टाइम कमाई और फर्जी एप्लीकेशनों का झांसा देकर निर्दोष लोगों से करोड़ों रुपये ठगने वाले गिरोहों पर गुरुग्राम...
गुड़गांव, (ब्यूरो): देशभर में डिजिटल लेन-देन के बढ़ते दायरे के बीच साइबर अपराधियों का जाल तेज़ी से फैल रहा है। शेयर बाज़ार में निवेश, आईपीओ में भारी मुनाफे, पार्ट-टाइम कमाई और फर्जी एप्लीकेशनों का झांसा देकर निर्दोष लोगों से करोड़ों रुपये ठगने वाले गिरोहों पर गुरुग्राम की विशेष अदालतों ने कड़ा कानूनी रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध समाज और देश की वित्तीय प्रणाली के लिए किसी साइलेंट वायरस की तरह हैं, जो न केवल लोगों की गाढ़ी कमाई लूटते हैं बल्कि डिजिटल भारत के जन-विश्वास की नींव को भी गहरा आघात पहुंचाते हैं। जिनके साथ कोई भी न्यायिक रियायत नहीं बरती जा सकती। कोर्ट द्वारा चार अलग-अलग साइबर ठगी के मामलों में आरोपियों की जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया गया।
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ठगी मामले में आदित्य सोनकर की जमानत याचिका खारिज
अतिरिक्त जिला सत्र एवं न्यायाधीश वर्षा जैन की अदालत ने 42 लाख रुपये की ठगी मामले में गिरफ्तार आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। पीड़िता अदिति दिव्या राय से ऑनलाइन निवेश के नाम पर लगभग 42 लाख रुपये की ठगी की गई थी। पीड़िता को एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़कर शेयर और आईपीओ में निवेश पर भारी रिटर्न का लालच दिया गया था। जालसाजों ने 42 लाख रुपये की ठगी कर डाली। पुलिस ने जांच करते हुए आरोपी आदित्य सोनकर निवासी पश्चिम बंगाल को गिरफ्तार किया गया। सुनवाई के दौरान आरोपी ने अदालत में दलील दी कि उसने अपना बैंक खाता अपने दोस्त सुमित साहू को इस्तेमाल के लिए दिया था और उससे कोई बरामदगी नहीं हुई है। हालांकि सरकारी वकील ने विरोध करते हुए बताया कि आरोपी के बैंक खाते के खिलाफ 42 अन्य शिकायतें दर्ज हैं और वह इसी तरह के तीन अन्य साइबर अपराधों में भी आरोपी है।कोर्ट ने दूसरी जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
बैंक खाता बेचने वाला नितिन शर्मा को नहीं मिली जमानत
अतिरिक्त जिला सत्र एवं न्यायाधीश वर्षा जैन की अदालत ने साइबर थाना दक्षिण में दर्ज 41.90 हजार रुपये की ठगी मामले में गिरफ्तार आरोपी नीतिन शर्मा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। पीड़ित ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोडा गया और झांसे में लेकर 41.90 लाख की ठगी को अंजाम दिया गया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि ठगी की रकम में से 20 लाख रुपये के एक खाते में जमा कराए गए थे। इस खाते की व्यवस्था करने वाले आरोपी नितिन शर्मा निवासी सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ने यमुनानगर से खरीदकर दिल्ली में बैठकर साइबर अपराध चला रहे गिरोह को इस्तेमाल के लिए मुहैया कराया था। बचाव पक्ष ने अन्य सह-आरोपियों की जमानत का हवाला देते हुए समानता के आधार पर जमानत मांगी। अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
पार्ट-टाइम नौकरी का झांसा देने के मामले में गिरफ्तार आरोपी जेल में रहेगा
अतिरिक्त जिला सत्र एवं न्यायाधीश वर्षा जैन की अदालत ने साइबर थाना पूर्व में पीड़ित माणिक आहूजा से पार्ट-टाइम जॉब और ऑनलाइन कमाई का लालच देकर 55.28 लाख की धोखाधड़ी की गई थी। जांच में सामने आया कि ठगे गए पैसों में से 4.25 लाख आरोपी विशाल सेंधव निवासी देवास, मध्य प्रदेश के बैंक खाते में जमा हुए थे। 19 अगस्त 2026 को गिरफ्तार विशाल ने पूछताछ में माना कि उसने 10 हजार के कमीशन के लालच में अपना खाता, एटीएम कार्ड और दस्तखत किए हुए खाली चेक इंदौर जाकर सह-आरोपी को सौंपे थे। पैसे जमा होने के बाद उसने चेक के जरिए 4.25 लाख निकालकर सह-आरोपियों को दिए और अतिरिक्त 1500 कमीशन प्राप्त किया। कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
ठगी के रुपये वापस करने के बाद भी जमानत नहीं मिली
अतिरिक्त जिला सत्र एवं न्यायाधीश सुदीप गोयल की अदालत में सुनवाई के दौरान ठगी मामले में गिरफ्तार आरोपी को जमानत नहीं दी गई। पीड़ित शिव चौहान से नियति और अर्जुन नामक ठगों द्वारा आईपीओ योजनाओं में निवेश का झांसा देकर 19 किस्तों में कुल 11 लाख 16 हजार 139 रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया था। जांच में पाया गया कि ठगी की राशि में से दो लाख 21 हजार आरोपी सक्षम निवासी बदरपुर, दक्षिण दिल्ली के खाते में ट्रांसफर हुए थे। आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि सक्षम मात्र 22 वर्ष का नौजवान है, उसका पूरा करियर आगे पड़ा है, जांच पूरी हो चुकी है और उसने पीड़ित को ठगी के दो लाख 21 हजार पूरे वापस लौटा दिए हैं तथा पीड़ित को जमानत पर कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दी। न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल पीड़ित को पैसे वापस लौटा देने से अपराध का प्रभाव समाप्त नहीं हो जाता।