Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 24 Sep, 2026 08:35 PM

शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के मामले में गुरुग्राम की अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है।
गुड़गांव,(ब्यूरो): शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के मामले में गुरुग्राम की अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया है कि राज्य सरकार की प्रक्रिया से लॉटरी में चुने गए बच्चे को कोई भी निजी स्कूल दाखिला देने से मना नहीं कर सकता।
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश वर्षा जैन की अदालत ने सिविल जज (जूनियर डिविजन) के पुराने आदेश को रद्द करते हुए डीएलएफ सिटी फेज-चार स्थित द श्री राम स्कूल को आदेश दिया है कि वह चार वर्षीय बच्चे को आगामी 15 दिनों के भीतर एलकेजी कक्षा में तुरंत दाखिला प्रदान करें। गुरुग्राम की शीतला कॉलोनी निवासी महिला ने अपने चार साल के बेटे का दाखिला सत्र 2026-27 के लिए आरटीई एक्ट 2009 के तहत एलकेजी कक्षा में कराने हेतु आवेदन किया था। हरियाणा विद्यालय शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित आधिकारिक ऑनलाइन लॉटरी प्रणाली के जरिए बच्चे को द श्री राम स्कूल आवंटित किया गया था।
जब परिजन बच्चे का दाखिला कराने स्कूल पहुंचे, तो स्कूल प्रबंधन ने दूरी का हवाला देते हुए बच्चे को प्रवेश देने से मना कर दिया। इसके खिलाफ बच्चे की मां ने निचली अदालत में याचिका दायर की थी, जिसे सिविल जज की अदालत ने 20 जुलाई को खारिज कर दिया था। इसके बाद पीड़ित परिवार ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश वर्षा जैन की अदालत में अपील दाखिल की। स्कूल के वकील अभिषेक गुप्ता ने तर्क दिया कि बच्चे द्वारा दिए गए घर के पते और स्कूल के बीच की दूरी आरटीई नियमों के तहत निर्धारित पड़ोस मानदंड को पूरा नहीं करती। बच्चे के वकील जलजीत थुराना ने तर्क दिया कि सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत कोटा आरक्षित है और 0 से 3 किलोमीटर का दूरी मानदंड निर्धारित है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब राज्य सरकार ने पात्रता जांच कर बच्चे को स्कूल आवंटित कर दिया है, तो स्कूल प्रबंधन दाखिला नहीं देने का अधिकार नहीं रखता।
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायाधीश वर्षा जैन ने कहा कि संविधान के तहत शिक्षा का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। अगर आरटीई एक्ट 2009 के नियमों को सही भावना से लागू नहीं किया गया, तो यह अधिकार केवल एक खोखला वादा बनकर रह जाएगा।सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, यदि किसी स्कूल को सरकार द्वारा आवंटित बच्चे के चयन पर कोई आपत्ति या असहमति है, तो वह संबंधित प्राधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रख सकता है, लेकिन वह इस प्रक्रिया के दौरान बच्चे का दाखिला रोक नहीं सकता।कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस स्तर पर राहत न देने से मासूम बच्चे का शैक्षणिक वर्ष बर्बाद होगा और उसे अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।अदालत ने निचली अदालत के 20 जुलाई 2026 के आदेश को निरस्त करते हुए द श्री राम स्कूल को निर्देश जारी किया है कि वह 15 दिनों के भीतर बच्चे को सत्र 2026-27 के लिए एलकेजी में प्रवेश देना होगा।