हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: विजिलेंस ट्रैप में फंसी रिश्वत की रकम अब तुरंत होगी वापस, सरकार देगी वापिस

Edited By Isha, Updated: 17 Aug, 2026 08:45 PM

bribe money caught in vigilance traps will now be returned immediately

हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस ट्रैप कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले नागरिक को ट्रैप के दौरान अपनी जेब से दी गई

चंडीगढ़(चन्द्र शेखर धरणी):  हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस ट्रैप कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले नागरिक को ट्रैप के दौरान अपनी जेब से दी गई रिश्वत की राशि के लंबे समय तक फंसे रहने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। सरकार ने ऐसी राशि की प्रतिपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा विजिलेंस ब्यूरो रिवॉल्विंग फंड का गठन किया है।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार फंड का संचालन महानिदेशक, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, हरियाणा द्वारा किया जाएगा। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह है कि विजिलेंस ट्रैप में सहयोग करने वाले शिकायतकर्ता को आपराधिक मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

ट्रैप राशि की प्रतिपूर्ति के लिए तय हुई औपचारिक प्रक्रिया
सरकार ने शिकायतकर्ताओं को ट्रैप कार्रवाई के लिए उपलब्ध कराई गई राशि की प्रतिपूर्ति के लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की है। संबंधित जांच अधिकारी प्रतिपूर्ति का प्रस्ताव तैयार कर उसे संबंधित रेंज प्रभारी के माध्यम से आगे भेजेगा। यह प्रस्ताव पुलिस महानिरीक्षक (आईजी), उप पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी) अथवा पुलिस अधीक्षक के माध्यम से विजिलेंस मुख्यालय पहुंचेगा।
इसके बाद मुख्यालय स्तर पर गठित समिति मामले के तथ्यों और गुण-दोष के आधार पर प्रतिपूर्ति पर अंतिम निर्णय लेगी। समिति में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अथवा पुलिस महानिरीक्षक अध्यक्ष होंगे। एक डीआईजी तथा जिला अटॉर्नी या उप जिला अटॉर्नी को समिति का सदस्य बनाया गया है।

शपथ-पत्र के बाद शिकायतकर्ता के खाते में पहुंचेगी राशि
प्रतिपूर्ति को लेकर सरकार ने एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी है। समिति से राशि की मंजूरी मिलने के बाद शिकायतकर्ता को शपथ-पत्र देना होगा। इसमें उसे यह अंडरटेकिंग देनी होगी कि आपराधिक कार्यवाही पूरी होने के बाद न्यायालय द्वारा जारी की जाने वाली ट्रैप राशि को वह दोबारा रिवॉल्विंग फंड में जमा करेगा। यह अंडरटेकिंग मिलने के बाद स्वीकृत राशि सीधे शिकायतकर्ता के बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी जाएगी। इससे शिकायतकर्ता को ट्रैप की कार्रवाई में सहयोग करने के बाद लंबे समय तक अपनी राशि के न्यायिक प्रक्रिया में फंसे रहने से राहत मिलेगी।

फंड का 70 फीसदी इस्तेमाल होने पर दोबारा उपलब्ध होगी राशि
रिवॉल्विंग फंड के संचालन के साथ वित्तीय नियंत्रण भी तय किए गए हैं। सरकार ने प्रावधान किया है कि फंड की 70 प्रतिशत राशि उपयोग होने के बाद उसमें आवश्यक राशि फिर से उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि भविष्य की विजिलेंस ट्रैप कार्रवाई के लिए पर्याप्त धनराशि बनी रहे। फंड की वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसका लेखा-परीक्षण प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा), हरियाणा द्वारा किया जाएगा।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में बढ़ेगा नागरिकों का भरोसा
सरकार के इस फैसले को भ्रष्टाचार विरोधी व्यवस्था में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अक्सर शिकायतकर्ता विजिलेंस को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़वाने में सहयोग तो करना चाहते हैं, लेकिन ट्रैप के लिए अपनी राशि उपलब्ध कराने और उसके लंबे समय तक वापस न मिलने को लेकर आशंकित रहते हैं।

रिवॉल्विंग फंड की व्यवस्था से ऐसी आर्थिक चिंता कम होगी। इससे शिकायतकर्ता बिना वित्तीय दबाव के विजिलेंस कार्रवाई में सहयोग कर सकेंगे और भ्रष्टाचार के मामलों में सरकारी एजेंसियों को कार्रवाई के लिए अधिक प्रभावी आधार मिल सकेगा। सरकार का यह कदम भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ शिकायतकर्ता संरक्षण और प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने वाला है।

 
 

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