हरियाणा सूचना आयोग का बड़ा फैसला: क्लर्क और सहायक नहीं बन सकेंगे SPIO, आयोग ने जताई सख्त आपत्ति

Edited By Isha, Updated: 17 Aug, 2026 06:23 PM

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हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने सहायक स्तर के क्लेरिकल कैडर के कर्मचारियों को राज्य लोक सूचना अधिकारी (एसपीआईओ) नियुक्त करने पर गंभीर आपत्ति जताई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि एसपीआईओ की भूमिका महज आरटीआई आवेदन लेने और सूचना उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है।...

चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी):   हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने सहायक स्तर के क्लेरिकल कैडर के कर्मचारियों को राज्य लोक सूचना अधिकारी (एसपीआईओ) नियुक्त करने पर गंभीर आपत्ति जताई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि एसपीआईओ की भूमिका महज आरटीआई आवेदन लेने और सूचना उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। उसे यह भी तय करना होता है कि मांगी गई सूचना कानून के तहत सार्वजनिक की जा सकती है या किसी वैधानिक अपवाद के दायरे में आती है। ऐसे में इस जिम्मेदारी के लिए पर्याप्त प्रशासनिक अनुभव और कानूनी समझ रखने वाले अधिकारी की नियुक्ति जरूरी है।


राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय सूरा की पीठ ने फरीदाबाद निवासी दीपक त्रिपाठी की शिकायत पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। मामले में नगर निगम फरीदाबाद की ओर से 25 अगस्त 2025 को जारी उस ज्ञापन का उल्लेख हुआ, जिसके तहत सहायक स्तर के अधिकारियों को एसपीआईओ नामित किया गया था। ये अधिकारी लिपिकीय कैडर से आते हैं और क्लर्क से एक पद वरिष्ठ होते हैं।

कानून की भावना के अनुरूप नहीं व्यवस्था
आयोग ने कहा कि लिपिकीय स्टाफ यानी सहायकों को एसपीआईओ बनाना आरटीआई कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के अनुकूल नहीं है। आयोग की राय में यह व्यवस्था सूचना का अधिकार अधिनियम की भावना और उद्देश्य तथा राज्य सरकार की ओर से जारी निर्देशों के अनुरूप भी नहीं है।
आयोग ने हरियाणा सरकार की 14 अगस्त 2018 की हिदायतों का भी हवाला दिया। इनमें मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से कहा गया था कि राज्य लोक सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के रूप में पर्याप्त वरिष्ठता वाले अधिकारियों को नामित किया जाना चाहिए।

वरिष्ठ अधिकारी के पास व्यापक प्रशासनिक पहुंच
सूचना आयोग ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न शाखाओं में उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड तक बेहतर पहुंच रखते हैं। साथ ही आरटीआई अधिनियम की धारा 5(4) के तहत वे जरूरत पड़ने पर अधीनस्थ अधिकारियों से सहायता भी ले सकते हैं।

आयोग के अनुसार एसपीआईओ को कई मामलों में यह भी तय करना पड़ता है कि मांगी गई सूचना कानून में निर्धारित अपवादों के अंतर्गत आती है या नहीं। इसके लिए प्रशासनिक अनुभव और संबंधित कानूनी प्रावधानों की समझ जरूरी है। वरिष्ठ अधिकारी पारदर्शिता के अधिकार और कानून से संरक्षित हितों के बीच संतुलन कायम करते हुए अधिक प्रभावी निर्णय ले सकते हैं।

नगर निगम आयुक्त को व्यवस्था की समीक्षा की सलाह
आयोग ने हालांकि नगर निगम फरीदाबाद को कोई अनिवार्य आदेश जारी नहीं किया, लेकिन नगर निगम आयुक्त को मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने की सलाह दी है। आयोग ने कहा कि पर्याप्त प्रशासनिक अधिकार और अनुभव रखने वाले मध्य स्तर या वरिष्ठ अधिकारियों को एसपीआईओ की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।

आयोग की इस टिप्पणी से सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों में आरटीआई व्यवस्था के तहत अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर वरिष्ठता और प्रशासनिक क्षमता के महत्व पर नए सिरे से जोर पड़ा है। इसका उद्देश्य आरटीआई आवेदनों के निस्तारण को महज लिपिकीय प्रक्रिया के बजाय जिम्मेदारीपूर्ण प्रशासनिक निर्णय के रूप में सुनिश्चित करना है।
 
 

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