Edited By Isha, Updated: 07 Aug, 2026 08:55 PM

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में पीजीटी भर्ती के लिए आयु सीमा में छूट को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि भर्ती विपंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में पीजीटी भर्ती के लिए आयु सीमा में छूट को लेकर महत्वपूर्ण फैसला...
चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी): पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में पीजीटी भर्ती के लिए आयु सीमा में छूट को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि भर्ती विज्ञापन की कोई भी शर्त वैधानिक सेवा नियमों के विपरीत नहीं हो सकती। अदालत ने कहा कि यदि भर्ती विज्ञापन और वैधानिक सेवा नियमों में टकराव होता है तो सेवा नियमों को ही सर्वोच्च माना जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि कार्यपालिका अथवा प्रशासनिक निर्देश न तो वैधानिक नियमों में संशोधन कर सकते हैं और न ही उनके प्रभाव को सीमित कर सकते हैं।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने नरेश कुमारी व अन्य की याचिकाओं पर संयुक्त रूप से फैसला सुनाया। याचिकाओं में 23 जुलाई 2024 को जारी पीजीटी भर्ती विज्ञापन की उस शर्त को चुनौती दी गई थी, जिसके अनुसार आयु में छूट केवल उन अभ्यर्थियों को दी जानी थी, जिन्होंने समकक्ष पद पर कार्य किया हो। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह शर्त हरियाणा स्टेट एजुकेशन स्कूल कैडर (ग्रुप-बी) सर्विस रूल्स, 2012 के प्रावधानों के विपरीत है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जहां भर्ती विज्ञापन की शर्तें और वैधानिक सेवा नियम परस्पर विरोधी हों, वहां सेवा नियम ही लागू होंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक निर्देश केवल नियमों के क्रियान्वयन में सहायक हो सकते हैं, लेकिन वे नियमों का स्थान नहीं ले सकते और न ही उनके दायरे को सीमित कर सकते हैं।
अदालत ने पाया कि वर्ष 2012 के सेवा नियमों के नियम-5 के तहत सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त तथा मान्यता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को अधिकतम पांच वर्ष तक आयु में छूट देने का प्रावधान है। इस नियम में कहीं भी "समकक्ष पद" पर कार्य करने की अनिवार्यता का उल्लेख नहीं है। इसलिए भर्ती विज्ञापन के माध्यम से ऐसी अतिरिक्त शर्त जोड़ना वैधानिक नियमों के विपरीत माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने चारों याचिकाएं स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ताओं की उम्मीदवारी केवल "समकक्ष पद" का अनुभव न होने के आधार पर रद्द करने के आदेश निरस्त कर दिए। अदालत ने हरियाणा सरकार और हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) को निर्देश दिया कि नियम-5 के अनुरूप आयु में छूट का लाभ देते हुए याचिकाकर्ताओं के मामलों पर नए सिरे से विचार किया जाए, बशर्ते वे पहले इस एकमुश्त छूट का लाभ नियमित नियुक्ति के लिए प्राप्त न कर चुके हों।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि जिस याचिकाकर्ता का साक्षात्कार नहीं लिया गया था, उसे साक्षात्कार का अवसर दिया जाए। यदि सभी याचिकाकर्ता पात्रता और मेरिट के आधार पर चयनित पाए जाते हैं तो उन्हें नियुक्ति के साथ सभी परिणामी काल्पनिक (नोटेशनल) लाभ दिए जाएंगे, जबकि वास्तविक वेतन कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से देय होगा। हाईकोर्ट ने पूरी प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं।