कांग्रेस के सभी विधायकों की बैठक बुलाने की रणनीति तैयार, दिल्ली हाईकमान के राष्ट्रीय नेता भी रहेंगे मौजूद

Edited By Isha, Updated: 08 Mar, 2026 02:58 PM

a strategy is underway to convene a meeting of all congress mlas

आखिरकार राज्यसभा की दो सीट और दावेदार तीन होने के कारण मुकाबला जहां एक ओर रोचक बन गया है। वहीं, कांग्रेस द्वारा  विधायकों को बाहर लेकर जाने की चर्चाओं पर फिलहाल, विराम लग गया है

चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी ): आखिरकार राज्यसभा की दो सीट और दावेदार तीन होने के कारण मुकाबला जहां एक ओर रोचक बन गया है। वहीं, कांग्रेस द्वारा  विधायकों को बाहर लेकर जाने की चर्चाओं पर फिलहाल, विराम लग गया है। 9 मार्च की देर शाम को कांग्रेस के सभी विधायकों की बैठक बुलाने की  रणनीति तैयार की गई है, जिसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के अलावा दिल्ली हाईकमान के राष्ट्रीय नेता भी मौजूद रहेंगे।

सूत्रों का कहना है कि दिल्ली हाईकमान से आए विशेष दूत पूरे माहौल पर नजर रखने के लिए चंडीगढ़ आ चुके हैं। जो हर हालात पर नजर रखने का काम करेंगे, फिलहाल, बाहर लेकर जाने की चर्चाओं को पार्टी के कईं नेताओं ने हवा हवाई करार दिया है।भीतरीगात रोकने के लिए कांग्रेस आलाकमान की पैनी निगाहें*हरियाणा की दो सीटों पर राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ी हुई है। एक ओर जहां सत्ताधारी पार्टी भाजपा के नेता चिंतन मंथन और अपनी रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। वहीं, कांग्रेस पार्टी अलग से अपने विधायकों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ में चिंतन मंथन में जुट गए हैं।
यहां पर बता दें कि राज्यसभा के दो सदस्यों किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल पूरा होने दोनों सीटों पर 16 मार्च को चुनाव होना तय है। 

राज्यसभा की दो सीटों पर तीसरा नामांकन दाखिल हो जाने के कारण कांग्रेस में ज्यादा चिंता वाली बात हो गई है। अब से पहले भी दो बार भितरघात हो चुका है। मुकाबला न केवल रोचक होगा, बल्कि क्रॉस वोटिंग की आशंका प्रबल हो गई है। वैसे विधायक दल नेता और नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुडडा, बीबी बतरा,अशोक अरोड़ा सभी क्रास वोटिंग अथवा भितरघात के सवालों पर सटीक जवाब दे रहे हैं, उन्होंने कहा कि पूरी पार्टी और विधायक एकजुट हैं। हाईकमान के दिशा निर्देशों का पालन होगा।

दो बार राज्यसभा सीट पर हो चुका खेल
हरियाणा में साल 2016 और साल 2022 के राज्यसभा चुनाव में दो बार खेला हो चुका है। कांग्रेस के पास विधायकों का पर्याप्त संख्या होने के बावजूद क्रॉस वोटिंग हुई और सत्ता पक्ष भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा और कार्तिकेय शर्मा चुनाव जीत चुके हैं। दोनों ने ही निर्दलीय भाग्य आजमाया था।
कांग्रेस के पास अपने हिस्से की सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल है। साथ ही एक सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस को जानी थी, बेहद ही सीधा खेल होने के बाद भी अब तीसरा उम्मीदवार उतरने से कईं तरह की आशंका हो गई हैं। सवाल यह पैदा हो रहा है कि पिछले इतिहास की तरह क्या तीसरी बार राज्यसभा के चुनाव में फिर भाजपा के दिग्गज खेल कर सकते हैं

भाजपा और कांग्रेस को एक-एक सीट 
90 सदस्यीय विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर एक सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जानी तय है। भाजपा ने सोची-समझी रणनीति के तहत कांग्रेस के हिस्से वाली सीट समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतार दिया है, जिससे कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भाजपा ने जिस निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को राज्यसभा के चुनावी रण में उतारा है, वे हरियाणा भाजपा उपाध्यक्ष हैं और पूर्व में विपक्ष के नेता भूपेंद्र हुड्डा के सामने गढ़ी सांपला किलोई से तीन बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं।

खेल हुआ, तो नेता विपक्ष को भी झटका
सतीश नांदल भाजपा की रणनीति के हिसाब से कांग्रेस विधायकों को क्रॉस वोटिंग के लिए तैयार कर लेते हैं, तो ये भूपेंद्र सिंह हुड्डा नेता विपक्ष और पूर्व सीएम को बड़ा झटका होगा। हालांकि विधानसभा सत्र के बाद पूछने पर हुड्डा ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि एक सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस जीतेगी। भाजपा ने पूर्व सांसद संजय भाटिया को अपना उम्मीदवार बनाया है, जिनका बिना किसी लाग-लपेट के राज्यसभा में जाना तय है। कांग्रेस के दलित संगठन में काम करने वाले अंबाला निवासी कर्मवीर बौद्ध को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया है। 

 हरियाणा में राज्यसभा चुनाव हमेशा राजनीतिक दृष्टि से दिलचस्प रहे हैं। इस बार भी 2026 के राज्यसभा चुनाव में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। विधानसभा के मौजूदा गणित के आधार पर एक सीट सत्तारूढ़ दल के खाते में और दूसरी सीट विपक्ष के खाते में जाना लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन चुनावी मैदान में अतिरिक्त उम्मीदवारों की एंट्री के बाद अब मुकाबला रोचक हो गया है।
इस पूरे परिदृश्य में सबसे अधिक चर्चा कांग्रेस की स्थिति को लेकर हो रही है। संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस के पास एक सीट जीतने का गणित मौजूद है, लेकिन राजनीतिक समीकरणों और संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है।

विधानसभा का गणित
हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए लगभग 31 वोट की आवश्यकता होती है।
वर्तमान में विधानसभा का राजनीतिक संतुलन इस प्रकार माना जाता है:भाजपा – 48 विधायक,कांग्रेस –  37 विधायक,इनेलो: 2 विधायक,निर्दलीय – 3 विधायक हैं

कांग्रेस की रणनीति
कांग्रेस ने इस चुनाव में सामाजिक संतुलन और राजनीतिक संदेश देने की रणनीति अपनाई है। पार्टी ने दलित समाज से आने वाले उम्मीदवार को मैदान में उतारकर सामाजिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने का प्रयास किया है।कांग्रेस का प्रयास यह है कि पार्टी के सभी विधायक एकजुट रहें और मतदान के दौरान कोई भी असंतोष या क्रॉस वोटिंग सामने न आए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने में सफल रहती है तो उसके लिए राज्यसभा की सीट जीतना कठिन नहीं होगा।

भाजपा की रणनीति
दूसरी ओर सत्तारूढ़ दल की रणनीति इस चुनाव को पूरी तरह राजनीतिक मुकाबले में बदलने की है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि विपक्षी खेमे में थोड़ी भी असंतुष्टि सामने आती है तो सत्ता पक्ष उस स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश कर सकता है। हरियाणा की राजनीति में अतीत में ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जब क्रॉस वोटिंग के कारण चुनावी परिणाम अप्रत्याशित हो गए।

निर्दलीय उम्मीदवार से बदला समीकरण
इस बार चुनावी मैदान में एक निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल की एंट्री ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है। निर्दलीय उम्मीदवार के आने से अब मुकाबला केवल दो दलों के बीच सीमित नहीं रहा, बल्कि तीसरा कोण भी बन गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निर्दलीय उम्मीदवार की उपस्थिति का मुख्य उद्देश्य चुनावी गणित को प्रभावित करना और विपक्षी वोटों में संभावित विभाजन की स्थिति पैदा करना हो सकता है।

कांग्रेस के सामने आंतरिक चुनौती
कांग्रेस के सामने इस चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखना है।
हरियाणा की राजनीति में कई बार यह देखा गया है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान दलों के भीतर असंतोष या व्यक्तिगत समीकरणों के कारण क्रॉस वोटिंग हो जाती है। यदि ऐसा हुआ तो कांग्रेस के लिए चुनावी स्थिति मुश्किल हो सकती है। इसी कारण पार्टी नेतृत्व लगातार अपने विधायकों के संपर्क में है और उन्हें पार्टी लाइन पर मतदान करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

अतीत के अनुभव
हरियाणा के राज्यसभा चुनाव पहले भी राजनीतिक रूप से चर्चित रहे हैं। कई बार चुनाव में अप्रत्याशित परिणाम सामने आए हैं।
राजनीतिक इतिहास में ऐसे उदाहरण भी रहे हैं जब संख्या बल के बावजूद किसी दल को हार का सामना करना पड़ा। यही कारण है कि इस बार भी चुनाव को लेकर राजनीतिक दल बेहद सतर्क दिखाई दे रहे हैं।

कांग्रेस के लिए सकारात्मक पहलू
हालांकि चुनौतियों के बावजूद कांग्रेस के पास कुछ मजबूत पक्ष भी हैं।विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल।

विपक्षी दल के रूप में विधायकों का अपेक्षाकृत 

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का विधायकों पर प्रभाव।

यदि ये तीनों कारक मजबूती से बने रहते हैं तो कांग्रेस की जीत की संभावना मजबूत बनी रहती है।

संभावित राजनीतिक परिदृश्य
राजनीतिक विश्लेषण के अनुसार तीन संभावित स्थिति बन सकती हैं:

पहली स्थिति:
भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने उम्मीदवार को जिता लें।

दूसरी स्थिति:
यदि क्रॉस वोटिंग होती है तो परिणाम में उलटफेर संभव है।

तीसरी स्थिति:
निर्दलीय उम्मीदवार के कारण वोटों का विभाजन हो सकता है, जिससे मुकाबला और कड़ा हो जाएगा।

निष्कर्ष
हरियाणा में 2026 का राज्यसभा चुनाव केवल एक औपचारिक चुनाव नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक मजबूती की परीक्षा बन गया है।
कांग्रेस के पास संख्या बल के आधार पर एक सीट जीतने का स्पष्ट अवसर है, लेकिन चुनावी राजनीति में केवल गणित ही सब कुछ नहीं होता। राजनीतिक रणनीति, विधायकों की एकजुटता और मतदान के समय की परिस्थितियाँ भी परिणाम तय करती हैं।
इसी कारण यह चुनाव हरियाणा की राजनीति में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखकर सीट सुरक्षित कर पाती है या फिर चुनाव में कोई अप्रत्याशित मोड़ सामने आता है।


 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!