पारिवारिक पृष्टिभूमि से मिली फिनटेक इंडस्ट्री में करियर बनाने की प्रेरणा : संतोष अग्रवाल

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 07 Mar, 2026 05:51 PM

family background inspired me to pursue a career in the fintech industry santos

लीडरशिप का कोई जेंडर नहीं होता है, काबिलियत मायने रखती है।

गुड़गांव, ब्यूरो :पैसाबाज़ार की CEO संतोष अग्रवाल खास बातचीत में कहा मैं एक बिज़नेस फैमिली से हूं, इसलिए बचपन से ही पढ़ाई के साथ-साथ पिता के बिज़नेस में मदद करती थी। वहीं से सेल्स की समझ आई, लोगों की ज़रूरतों को समझना सीखा और समस्याओं का हल ढूंढने की आदत बनी।  पॉलिसीबाज़ार ज्वाइन करने के बाद बड़े स्तर पर लोगों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने और जागरूकता फैलाने का अवसर मिलना मेरे लिए खुशी की बात थी, पॉलिसीबाज़ार में लाइफ इंश्योरेंस बिज़ेनस को आगे बढ़ाना और बाद में पैसाबाज़ार की CEO बनना, ये मैंने कभी भी पहले से प्लान नहीं किया था। कई बार खुद पर संदेह भी हुआ, लेकिन मेरी मेहनत, धैर्य और लगातार कोशिशों ने मेरे लिए इतने दरवाज़े खोले, जितने शायद कोई भी प्रतिष्ठित संस्थान नहीं खोल पाता। 

 

शुरुआत के दिनों में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

संतोष अग्रवाल ने जवाब में कहा मेरे शुरुआती दिनों की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि हम ऐसी कैटेगरी में काम कर रहे थे जिसे लोग अच्छी तरह समझते नहीं थे। चुनौती सिर्फ डिस्ट्रीब्यूशन की नहीं, बल्कि लोगों को शिक्षित करने की भी थी— उन्हें प्रोडक्ट्स को आसान भाषा में समझाना, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तुलना करने के लिए प्रेरित करना और एजेंट्स पर निर्भरता कम करके खुद फैसले लेने के लिए सक्षम बनाना था। पिछले 18 सालों में पॉलिसीबाज़ार ने देश में इंश्योरेंस के प्रति जागरूकता बढ़ाने और डिजिटल इंश्योरेंस कैटेगरी बनाने में अहम भूमिका निभाई है। शुरुआत में लोगों को ऑनलाइन फाइनेंशियल प्रोडक्ट खरीदने के लिए तैयार करना आसान नहीं था, लेकिन इन्हीं चुनौतियों ने हमारी सोच और काम करने का तरीका तय किया।

 

 इस पुरुष-प्रधान सेक्टर में एक महिला लीडर के तौर पर, बिजनेस के शुरुआती दिनों में आपने अपनी पहचान और जगह कैसे बनाई?

संतोष अग्रवाल: मेरा मानना है लीडरशिप का कोई जेंडर नहीं होता है, काबिलियत मायने रखती है। अपने करियर की शुरुआत में मैंने कुछ सिद्धांत अपनाएं, जिसने मेरी आगे की जर्नी को दिशा दी। पहला, सीखने के लिए हमेशा तैयार रहें। फाइनेंशियल सर्विसेज़ में विश्वास तब बनता है जब आपको अपने प्रोडक्ट की गहरी समझ हो, इसलिए मैंने हर जगह—ग्राहकों, सहकर्मियों और मार्केट से सीखने की कोशिश की। दूसरा, अनिश्चित परिस्थितियों में भी ज़िम्मेदारी लेने से पीछे न हटें। ग्रोथ और पहचान तब मिलती है जब आप आगे बढ़कर ज़िम्मेदारी उठाते हैं।  तीसरा, सिर्फ नेटवर्क नहीं बल्कि मज़बूत रिश्ते बनाएं। भरोसा समय के साथ बढ़ता है और मुश्किल समय में यही रिश्ते सबसे बड़ा सहारा बनते हैं। और आखिर में, आत्मविश्वास। जो कि परफेक्शन से नहीं, बल्कि काम करने और परिणाम देने से आता है — चाहे आप किसी भी जेंडर के हों। 

 

वो कौन-से सिद्धांत हैं, जिसने आपके करियर की शुरुआत से लेकर पैसाबाज़ार की CEO बनने तक की जर्नी को दिशा दी है

संतोष अग्रवाल: दो ऐसे सिद्धांत है, जिसे मैंने हमेशा फॉलो किया है। पहला, हमेशा वो करो जो कंज़्यूमर के लिए सही हो। फाइनेंशियल सर्विसेज़ में भरोसा ही सबकुछ होता है। लॉन्ग टर्म सफलता तभी मिलती है जब आप पारदर्शिता बनाए रखते है, कॉम्प्लेक्स चीज़ों को आसान बनाते हैं और लोगों को सही वित्तीय निर्णय लेने में मदद करते हैं। दूसरा है, मज़बूत पार्टनरशिप बनाना। हमारी ग्रोथ में इंश्योरेंस कंपनियां, बैंक, NBFCs और हमारी अपनी टीम का अहम योगदान रहा है। सस्टेनेबल ग्रोथ तभी होती है जब सभी स्टॉकहोल्डर साथ मिलकर काम करते हैं। इसके साथ ही कंसिस्टेंसी भी ज़रूरी है। समय के साथ मार्केट, प्रोडक्ट और रोल्स बदलते हैं, लेकिन अगर आपका फोकस कस्टमर वैल्यू और साथ मिलकर आगे बढ़ने पर टिका है, तो हर बदलाव आसान हो जाता है।

 

 लोग, खासकर युवा, निवेश और क्रेडिट के बारे में खुद को बेहतर तरीके से कैसे शिक्षित कर सकते हैं, ताकि वे इन फैसलों के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर न रहें?

संतोष अग्रवाल: पर्सनल फाइनेंस को ज़रूरी लाइफ-स्किल की तरह सीखें। शुरुआत जल्दी करें—चाहे वह क्रेडिट स्कोर या इमरजेंसी फंड जैसी बेसिक चीज़ें समझने से ही क्यों न हो।  अपने वित्तीय आंकड़ों को खुद ट्रैक करें और मज़बूत फाइनेंशियल पोर्टफोलियो बनाएं। इमरजेंसी फंड तैयार रखें, पर्याप्त लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस लें, नियमित रूप से अपना क्रेडिट स्कोर चेक करें और भविष्य के लिए निवेश करें। यह भी समझें कि EMI आपके लंबे समय के कैश फ्लो को कैसे प्रभावित करती है। समय-समय पर अपने निवेश की समीक्षा करें। लोगों से सलाह लें लेकिन अंतिम वित्तीय फैसला आपका होना चाहिए।

आप अपने अब तक के सफर को देखते हुए, उन महिलाओं से क्या कहना चाहेंगी जो अपना बिज़नेस शुरू करने या फाइनेंस की दुनिया में कदम रखने से हिचकिचाती हैं?

संतोष अग्रवाल: मैं यही कहूंगी कि पूरी तरह तैयार होने के बाद काम शुरू करने का इंतजार न करें। काम शुरू करें आत्मविश्वास काम करते-करते आ जाएगा। टैलेंट होने से पहला मौका मिल सकता है, लेकिन आगे बढ़ने के लिए कंसिस्टेंसी, भरोसा और ईमानदारी ज़रूरी है।

 

 

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