विजिलेंस का बड़ा 'हंटर': अवैध खनन घोटाले में माइनिंग इंजीनियर संजय सिम्बरवाल गिरफ्तार... पंचकूला से दबोचा

Edited By Isha, Updated: 20 Mar, 2026 12:33 PM

vigilance delivers a major blow

जिले में अवैध खनन से जुड़े घोटाले में विजिलेंस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खनन इंजीनियर संजय सिम्बरवाल को बुधवार रात पंचकूला से गिरफ्तार किया है। उन्हें बृहस्पतिवार को नारनौल लाया गया। आरोप है कि वर्ष

नारनौल: जिले में अवैध खनन से जुड़े घोटाले में विजिलेंस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खनन इंजीनियर संजय सिम्बरवाल को बुधवार रात पंचकूला से गिरफ्तार किया है। उन्हें बृहस्पतिवार को नारनौल लाया गया। आरोप है कि वर्ष 2020 के दौरान नियमों को ताक पर रख सरकार को राजस्व के रूप में भारी नुकसान पहुंचाया गया। विजिलेंस रेवाड़ी और नारनौल की संयुक्त जांच में सामने आया कि उस समय खनन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी वाहन मालिकों के साथ मिलकर नियमों को दरकिनार कर रहे थे।

जांच में पाया गया कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के आदेशों के तहत अवैध खनन में पकड़े गए वाहनों पर भारी पर्यावरण क्षतिपूर्ति जुर्माना लगाया जाना था। लेकिन विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने वाहन मालिकों के साथ मिलीभगत कर फर्जी शपथपत्र और गलत कीमत के दस्तावेज तैयार करवाए। इन दस्तावेजों के आधार पर चार लाख रुपये तक के जुर्माने को घटाकर दो लाख रुपये या उससे भी कम कर दिया गया।

एसीबी की ओर से दर्ज की गई एफआइआर के अनुसार, जांच के दौरान कुल 292 जब्त वाहनों के रिकार्ड खंगाले गए। इनमें से 43 मामलों में फर्जी दस्तावेजों के जरिए कम जुर्माना वसूलने की पुष्टि हुई। कई मामलों में वाहन की वास्तविक कीमत 30-40 लाख रुपये होने के बावजूद कागजों में इसे 25 लाख रुपये से कम दिखाया गया, जिससे जुर्माना सीधे आधा हो गया। इस पूरे घोटाले से सरकार को करीब 21 लाख रुपये की वित्तीय हानि पहुंचने का आंकलन किया गया है। हालांकि, जांच एजेंसियों का मानना है कि यह राशि और बढ़ सकती है। एफआईआर में तत्कालीन खनन अधिकारी राजेंद्र प्रसाद, सहायक खनन अधिकारी संजय सिम्बरवाल, लिपिक चंद्रशेखर, कर्मचारी नरेंद्र कुमार, डाटा एंट्री ऑपरेटर अजीत कुमार सहित अन्य कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं।

आरोप है कि इन सभी ने मिलकर बिना आरटीए सत्यापन के दस्तावेज स्वीकार किए और नियमों की अनदेखी कर जुर्माना कम किया। मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के उपयोग और आपराधिक साजिश की धाराओं आइपीसी 420, 467, 468, 471, 120-बी के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। एसीबी के इंस्पेक्टर अशोक कुमार के अनुसार अब तक 17 में से 15 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। संजय सिम्बरवाल की ताजा गिरफ्तारी के बाद अब दो आरोपित एमओ राजेंद्र और क्लर्क चंद्रशेखर फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में विजिलेंस लगातार दबिश दे रही है।

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