मां का चित्र देखकर भावुक हुए विस अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, सोशल मीडिया पर साझा की दिल छू लेने वाली भावनाएं

Edited By Krishan Rana, Updated: 18 May, 2026 08:46 PM

vidhan sabha speaker harvinder kalyan became emotional after seeing his mother s

‘मां’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि त्याग, ममता, करुणा और निःस्वार्थ प्रेम का वह अथाह सागर

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): ‘मां’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि त्याग, ममता, करुणा और निःस्वार्थ प्रेम का वह अथाह सागर है, जिसकी गहराई को आज तक कोई माप नहीं पाया। मां वह शक्ति है, जो स्वयं कष्ट सहकर भी अपनी संतान के जीवन को खुशियों से भरने का प्रयास करती है। जिसके सिर पर मां का साया हो, उसके लिए जीवन की कठिन से कठिन राह भी आसान हो जाती है।

ऐसा ही एक बेहद भावुक क्षण घरौंडा विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला, जब हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण को एक युवा समर्थक ने उनकी दिवंगत माता स्वर्गीय प्रेम कौर कल्याण का चित्र भेंट किया। मां की तस्वीर देखते ही स्पीकर भावुक हो उठे और उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए एक मार्मिक पोस्ट लिखी, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं।

गौरतलब है कि हाल ही में हरविंदर कल्याण की माता प्रेम कौर कल्याण का 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। मां के अस्थि विसर्जन से पूर्व भी उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बेहद संवेदनशील पोस्ट साझा की थी, जिसमें उन्होंने मां के त्यागमयी जीवन को याद किया।

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उन्होंने लिखा कि 16 मार्च को कुटेल शिवपुरी में मां के फूल उठाए जा रहे थे, जिन्हें हरिद्वार में विसर्जित किया जाना था। तभी पीछे से किसी ने कहा —
“हड्डी हैईं कितनी, घणी थोड़ी हैं…”

यह सुनते ही उनके मन में मां के पूरे जीवन का संघर्ष और समर्पण चलचित्र की तरह घूम गया। उन्होंने लिखा कि 86 वर्षों के लंबे जीवन में मां ने कभी अपने लिए नहीं जिया। न अपनी सेहत की चिंता की, न अपनी इच्छाओं की। उनका पूरा जीवन केवल बच्चों और परिवार के सुख-दुख के लिए समर्पित रहा।

हरविंदर कल्याण ने लिखा कि बचपन से उन्होंने मां को शांत, सकारात्मक, अनुशासित, परिश्रमी और आत्मविश्वासी रूप में देखा। उनके भीतर हमेशा सभी के लिए प्यार, दुलार और आशीर्वाद ही रहा। मां ने उन्हें जीवन में अपने कर्तव्यों को निभाने के साथ-साथ भगवान का धन्यवाद करना भी सिखाया।
उन्होंने भावुक शब्दों में लिखा कि अंतिम समय में मां का हाथ सिर तक पहुंचने में असमर्थ हो गया था, लेकिन उनकी आंखें सब कुछ कह जाती थीं। अंत तक उनके होंठों पर यही शब्द रहे —
“खुश रहो, सुखी रहो, भगवान तुम्हें…”

स्पीकर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि महत्वपूर्ण यह नहीं कि अंत में कितनी हड्डियां बचीं, बल्कि यह है कि वह जीवन किन कार्यों में लगा। उनकी मां का पूरा जीवन परिवार की खुशहाली और मजबूती के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कभी मां की ऊंची आवाज नहीं सुनी, लेकिन हर मोड़ पर 
मां परिवार की सबसे मजबूत ताकत बनकर खड़ी रहीं।
उन्होंने मां को लक्ष्मी, दुर्गा और सरस्वती — तीनों स्वरूपों का प्रतीक बताते हुए अंत में लिखा —
“आपका पुत्र होने पर मुझे गर्व है…आपको व हर मां को मेरा सादर नमन।”

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