Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 11 Sep, 2026 08:11 AM

हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) में फर्जीवाड़े और पद के दुरुपयोग का एक और मामला आया है। हरियाणा सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने ओस्टिज कोटा (विस्थापित कोटा) के तहत दो भूखंडों के गलत तरीके से आवंटन में दो सेवानिवृत्त आईएएस...
गुड़गांव, (ब्यूरो): हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) में फर्जीवाड़े और पद के दुरुपयोग का एक और मामला आया है। हरियाणा सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने ओस्टिज कोटा (विस्थापित कोटा) के तहत दो भूखंडों के गलत तरीके से आवंटन में दो सेवानिवृत्त आईएएस समेत नौ लोगों पर केस दर्ज किया है।
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जानकारी के मुताबिक, जून 2024 में कन्हई गांव निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत की। जांच में सामने आया कि सिविल लाइंस निवासी जगदीश चंद्र गुप्ता ने 12 जुलाई 1994 को भूखंड के लिए आवेदन किया। ड्रॉ में उनका सेक्टर-40 में 200 वर्ग मीटर का प्लॉट नंबर 833ए निकला। हालांकि, जमीन के अन्य सह-मालिकों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) न दे पाने के कारण उन्हें आवंटन पत्र जारी नहीं किया गया। सात सितंबर 2015 को जगदीश चंद्र की पत्नी सुभाष रानी उर्फ सुशीला ने पति की मृत्यु की सूचना देते हुए भूखंड उनके नाम करने की मांग की। तत्कालीन अधिकारियों ने नया विज्ञापन आने पर आवेदन करने की बात कह उनके दावे को खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने भी विभाग के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद 15 मई 2019 को तत्कालीन मुख्य प्रशासक डी.सुरेश, प्रशासक गिरीश कुमार और जिला अटॉर्नी अनिल कुमार अग्रवाल ने कथित तौर पर साठगांठ कर 24 मई 2019 को पंचकूला अर्बन ब्रांच के अधीक्षक नितिन हुड्डा के माध्यम से 200 वर्ग मीटर के लिए योग्य आवेदक को 220 वर्ग मीटर का आवंटन पत्र जारी कर दिया। इसके लिए अनिवार्य 10 प्रतिशत की राशि भी जमा नहीं कराई गई। ऐसा ही मामला सेक्टर-39 के भूखंड नंबर 257ए (चार मरला/100 वर्ग गज) का आया, जहां श्याम सिंह नामक आवेदक को हाईकोर्ट के फैसले के विरुद्ध ओस्टिज कोटे का भूखंड 29 मई 2019 को आवंटित कर दिया गया। एसीबी की जांच के बाद पूर्व आईएएस डी. सुरेश व गिरीश कुमार, जिला अटॉर्नी अनिल कुमार, अधीक्षक नितिन हुड्डा समेत नौ लोगों को आरोपी बनाया है।
एसीबी अधिकारियों के अनुसार, दोनों मामलों में जैसे ही आरोपी सुभाष रानी और श्याम सिंह को आवंटन पत्र मिला, उन्होंने तुरंत इन भूखंडों को दूसरे व्यक्तियों को बेच दिया। सिर्फ सेक्टर-40 के भूखंड की ई-नीलामी होती, तो राज्य सरकार को लगभग चार करोड़ रुपये का राजस्व मिलता। इस वर्ष अगस्त में सेवानिवृत्त हुए आईएएस डी. सुरेश पर एसीबी गुरुग्राम में तीन मामले दर्ज कर चुकी है। सेक्टर-23 में भी जब्त किए गए भूखंड को गलत तरीके से आवंटित करने में उन्हें आरोपी बनाया गया है।