अल-फलाह विश्वविद्यालय को NCMIEI का कारण बताओ नोटिस, अल्पसंख्यक दर्जा खतरे में

Edited By Deepak Kumar, Updated: 24 Nov, 2025 12:17 PM

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राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग ने अल-फलाह विश्वविद्यालय को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एनसीएमईआई की यह कार्यवाही ऐसे समय में हुई है जब विश्वविद्यालय पहले से ही अपनी वित्तीय व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज को लेकर सवालों के घेरे में है।

हरियाणा डेस्कः राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMIEI) ने अल-फलाह विश्वविद्यालय को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आयोग ने पूछा है कि 10 नवंबर को दिल्ली में विस्फोट हुए, जिसमें 15 लोगों की मौत हुई, के मामले में विश्वविद्यालय के दो डॉक्टरों की भूमिका की जांच चल रही है, ऐसे में उसका अल्पसंख्यक दर्जा क्यों न रद्द कर दिया जाए।

एनसीएमईआई की यह कार्यवाही ऐसे समय में हुई है जब विश्वविद्यालय पहले से ही अपनी वित्तीय व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज को लेकर सवालों के घेरे में है। विश्वविद्यालय को अभी तक राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) से मान्यता भी प्राप्त नहीं है। इसके संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है।

छात्रों में बढ़ी चिंता

अल्पसंख्यक दर्जा खत्म होने की आशंका से छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। कई छात्र सरकारी छात्रवृत्तियों और अनुदानों पर निर्भर हैं, जिन्हें दर्जा रद्द होने की स्थिति में नुकसान हो सकता है। एक अभिभावक ने बताया, “हम अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर चिंतित हैं। हमें डर है कि उनकी डिग्रियों की वैधता कहीं प्रभावित न हो जाए। विश्वविद्यालय और अधिकारियों को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।”

विश्वविद्यालय का पक्ष: ‘संस्थान बंद नहीं होगा’

अल-फ़लाह विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि छात्रों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “विश्वविद्यालय बंद नहीं होगा। हम सभी अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहे हैं और छात्रों के हितों की पूरी रक्षा की जाएगी।” हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि विश्वविद्यालय एनसीएमईआई द्वारा मांगे गए दस्तावेज—जैसे ट्रस्ट डीड, फंडिंग विवरण और ऑडिट रिपोर्ट—प्रस्तुत नहीं कर पाता है, तो कड़ी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।

दस्तावेज जुटाना चुनौतीपूर्ण: शिक्षा विभाग

उधर, शिक्षा विभाग का कहना है कि उसे अभी तक एनसीएमईआई का नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकार किया कि निजी विश्वविद्यालय के विस्तृत रिकॉर्ड जुटाना चुनौतीपूर्ण होगा। अधिकारी ने कहा, “पहले भी हमसे जानकारी मांगी गई थी, लेकिन चूंकि यह निजी संस्थान है, आवश्यक डेटा सीधे हमारे पास उपलब्ध नहीं होता।”

4 दिसंबर को होगी सुनवाई

एनसीएमईआई इस मामले में 4 दिसंबर को सुनवाई करेगा। बैठक में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव दोनों उपस्थित रहेंगे। आयोग यह जांच करेगा कि क्या विश्वविद्यालय का प्रबंधन अब भी उसी अल्पसंख्यक समुदाय के हाथ में है जिसके आधार पर इसे विशेष दर्जा दिया गया था, और क्या स्वामित्व या नियंत्रण में कोई परिवर्तन हुआ है।
 

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