Edited By Manisha rana, Updated: 07 May, 2026 10:10 AM

अक्सर देखा जाता है कि जब नेता विपक्ष में होते हैं तो देश के स्वतंत्रता आंदोलन के वीरों और शहीदों को बड़े सम्मान के साथ याद करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद वही उत्साह फीका पड़ जाता है।
चंडीगढ़ (धरणी) : अक्सर देखा जाता है कि जब नेता विपक्ष में होते हैं तो देश के स्वतंत्रता आंदोलन के वीरों और शहीदों को बड़े सम्मान के साथ याद करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद वही उत्साह फीका पड़ जाता है। ऐसे दौर में बहुत कम राजनेता होते हैं जो सत्ता में रहते हुए भी देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों को संजोने और उन्हें जन-जन तक पहुंचाने का कार्य निरंतर करते रहें। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज इस मायने में एक अलग पहचान रखते हैं। उनकी कथनी और करनी में स्पष्ट समानता दिखाई देती है—वे जो कहते हैं, उसे धरातल पर उतारते भी हैं।
अंबाला कैंट में अपने 11 वर्षों से अधिक के कार्यकाल के दौरान अनिल विज ने अनेक ऐसे कार्य किए हैं, जो स्वतंत्रता सेनानियों और महान विभूतियों के प्रति उनके सम्मान को दर्शाते हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा की स्थापना और उनके नाम पर सुंदर पार्क का निर्माण, शहीद भगत सिंह की प्रतिमा, तथा उनके साथियों सुखदेव और राजगुरु की प्रस्तावित प्रतिमाएं—ये सभी पहलें उनके समर्पण का प्रमाण हैं।
इसी क्रम में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण कर सामाजिक न्याय के प्रतीक को भी उचित सम्मान दिया गया। अब वीरता और स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी अंतिम चरण में है। इतना ही नहीं, 1857 की क्रांति में शहीद हुए उन वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए, जिन्हें इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया, अंबाला कैंट में लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य शहीद स्मारक तैयार किया गया है। यह स्मारक उद्घाटन की प्रतीक्षा में है और इसमें अंबाला, मेरठ, राव तुलाराम, दिल्ली, झांसी की रानी और तात्या टोपे सहित सैकड़ों वीरों के योगदान का विस्तृत वर्णन किया गया है।
एक और विशेष पहल के तहत, अंबाला छावनी के सदर बाजार स्थित टी-प्वाइंट—जहां अनिल विज पिछले पांच दशकों से सुबह चाय पीने और अखबार पढ़ने जाते हैं—वहीं पर महाराणा प्रताप की भव्य प्रतिमा स्थापित की जा रही है। यह प्रतिमा लगभग साढ़े 12 फुट ऊंची, 16 क्विंटल वजनी और धातु से निर्मित है, जिसे जयपुर के प्रसिद्ध मूर्तिकार महावीर भारती ने तैयार किया है। महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर 9 मई को प्रातः 11 बजे इस प्रतिमा का स्थापना समारोह प्रस्तावित है। इसके लिए अनिल विज ने अपने स्वैच्छिक कोष से 50 लाख रुपये की राशि नगर परिषद अंबाला सदर को प्रदान की है। साथ ही, उन्होंने प्रतिमा स्थल पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था के भी निर्देश दिए हैं, ताकि रात में भी इसकी भव्यता बनी रहे।
“1857 के अनसुने वीरों को मिलेगा सम्मान: अंबाला शहीद स्मारक के उद्घाटन की उम्मीद”
हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री श्री अनिल विज ने आशा व्यक्त की है कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की स्मृति में अंबाला छावनी में निर्मित भव्य शहीद स्मारक का उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शीघ्र करेंगे। उन्होंने कहा कि इस स्मारक के खुलने के बाद देशभर से लोग यहां आकर उन अनसुने वीरों (अनसंग हीरोज) की गाथाओं को जान सकेंगे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे। अनिल विज ने बताया कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का उल्लेख किया, जो इस ऐतिहासिक घटना के महत्व को पुनः रेखांकित करता है। इसी संग्राम की स्मृति में अंबाला छावनी में लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक और भव्य शहीद स्मारक का निर्माण किया गया है।
इस स्मारक में 10 मई 1857 से आरंभ हुए स्वतंत्रता संग्राम की घटनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। अंबाला, मेरठ, झांसी, कश्मीरी गेट सहित देशभर के विभिन्न स्थानों पर लड़ी गई लड़ाइयों को दर्शाया गया है। साथ ही रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे जैसे महान योद्धाओं के योगदान को भी विस्तार से प्रदर्शित किया गया है। उन्होंने कहा कि 1857 के कई वीरों को इतिहास में वह पहचान नहीं मिल सकी, जिसके वे हकदार थे। इसी को ध्यान में रखते हुए इस स्मारक में एक विशेष ‘श्रद्धांजलि स्थल’ बनाया गया है, जहां आगंतुक उन शहीदों को नमन कर सकेंगे, जिन्हें अब तक पर्याप्त सम्मान नहीं मिल पाया। अनिल विज ने आगे बताया ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि मई का महीना 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाता है। उन्होंने मां भारती की वीर संतानों को नमन करते हुए युवाओं, विशेषकर स्कूली बच्चों से आह्वान किया कि वे अपनी छुट्टियों का सदुपयोग करें और कुछ नया सीखने का प्रयास करें। यह शहीद स्मारक न केवल इतिहास को सहेजने का माध्यम बनेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, बलिदान और प्रेरणा की अमूल्य विरासत से भी जोड़ने का कार्य करेगा।