यह भूमि केवल एक गांव नहीं है, यह हमारी परंपरा, आस्था और संस्कृति की जीवंत पहचान है: भव्य बिश्नोई

Edited By Manisha rana, Updated: 23 Apr, 2026 04:48 PM

land is not just a village bhavya bishnoi

भारतीय जनता पार्टी हरियाणा युवा मोर्चा के प्रदेश प्रभारी एवं पूर्व विधायक भव्य बिश्नोई ने 22 एवं 23 अपै्रल को मध्य प्रदेश के दो दिवसीय दौरे के दौरान भोपाल, हरदा, मायरा, नीम गांव में कई सामाजिक कार्यक्रमों में शिरकत की।

चंडीगढ़ (धरणी) : भारतीय जनता पार्टी हरियाणा युवा मोर्चा के प्रदेश प्रभारी एवं पूर्व विधायक भव्य बिश्नोई ने 22 एवं 23 अपै्रल को मध्य प्रदेश के दो दिवसीय दौरे के दौरान भोपाल, हरदा, मायरा, नीम गांव में कई सामाजिक कार्यक्रमों में शिरकत की। इस दौरान क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल, कुलदीप बिश्नोई परिवार से तीन-तीन, चार-चार पीढिय़ों से जुड़े बिश्नोई समाज के गण्यमान्य लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया। भोपाल एयरपोर्ट पहुंचने पर अटल खोखर परिवार ने उनका पगडिय़ों, शॉल एवं फूलमालाओं से स्वागत किया। 

नीमगांव पहुंचने पर उन्होंने कहा कि यहां आकर मन को एक अद्भुत शांति और ऊर्जा का अनुभव हुआ है। भव्य बिश्नोई ने कहा कि उन्हें राम सिंह पंवार जी के यहां आने का अवसर मिला, और भाई राजकुमार ने मुझे यहां आमंत्रित किया, इसके लिए वे आभारी हैं। भव्य बिश्नोई ने कहा कि यह भूमि केवल एक गांव नहीं है, यह हमारी परंपरा, हमारी आस्था और हमारी संस्कृति की जीवंत पहचान है। मुझे गर्व है कि मेरे दादा जी, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री, युगपुरुष च्बिश्नोई रत्नज् स्वर्गीय भजन लाल जी सन 1981 में इसी गांव में स्थित गुरु जंभेश्वर भगवान मंदिर के लोकार्पण समारोह में शामिल हुए थे।

आज उसी पवित्र स्थान पर आना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य और गर्व की बात है। यह केवल एक संयोग नहीं, बल्कि हमारे परिवार और आप सभी के बीच पीढिय़ों से चले आ रहे रिश्ते का प्रतीक है। मैं आप सभी से यही अपेक्षा करता हूँ कि जिस प्रकार आपने मेरे दादा जी और मेरे पिता कुलदीप बिश्नोई जी को प्रेम, स्नेह और आशीर्वाद दिया, वही स्नेह और आशीर्वाद मुझे भी मिलता रहे।मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं होते—वे हमारे समाज की आत्मा होते हैं। मंदिर हमें जोड़ते हैं, हमें संस्कार देते हैं, और हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

गुरु जंभेश्वर भगवान के मंदिर जैसे पवित्र स्थल हमें पर्यावरण संरक्षण, जीवों के प्रति दया, और मानवता की सेवा का संदेश देते हैं। मंदिरों में जाकर हम केवल भगवान से नहीं मिलते, बल्कि अपने अंदर की अच्छाई से भी जुड़ते हैं। बिश्नोई समाज सदियों से प्रकृति संरक्षण, जीव रक्षा और मानव सेवा का प्रतीक रहा है। गुरु जंभेश्वर भगवान ने 29 नियमों के माध्यम से हमें जीवन जीने का एक ऐसा मार्ग दिखाया, जो आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है। पेड़ों की रक्षा करना हो, वन्य जीवों को बचाना हो, या समाज में भाईचारा बनाए रखना—बिश्नोई समाज हमेशा आगे रहा है। यह समाज केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता और प्रकृति के लिए जीता है।

मेरे दादा जी स्वर्गीय चौधरी भजन लाल जी केवल एक राजनेता नहीं थे—वे समाज के सच्चे सेवक थे। उन्होंने हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पूरे देश में बिश्नोई समाज के उत्थान के लिए कार्य किया। उन्होंने हमेशा समाज के कमजोर वर्गों को मजबूत बनाने, लोगों को जोडऩे और विकास की राह पर आगे बढ़ाने का काम किया। उनकी सोच हमेशा समावेशी रही—हर व्यक्ति को साथ लेकर चलने की। उनकी इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मेरे पिता चौधरी कुलदीप बिश्नोई ने समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का कार्य किया। उन्होंने देशभर में बिश्नोई समाज को संगठित और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका लक्ष्य हमेशा यही रहा कि समाज में एकता बनी रहे और हर व्यक्ति को सम्मान और अवसर मिले। अंत में मैं यही कहना चाहता हूँ कि यह हमारा पारिवारिक और सामाजिक रिश्ता दिलों का रिश्ता है, विश्वास का रिश्ता है। आइए, हम सब मिलकर अपने पूर्वजों के दिखाए मार्ग पर चलें, समाज को और मजबूत बनाएं, और आने वाली पीढिय़ों के लिए एक बेहतर भविष्य तैयार करें। आप सभी का प्रेम और आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।

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