संक्रमण की दर 30 फ़ीसदी से घटकर आज 1.2 फ़ीसदी से भी कम है  : संजीव कौशल

Edited By Isha, Updated: 16 Jun, 2021 02:28 PM

infection rate has come down from 30 percent

लाल डोरे की संपत्ति की मिल्कियत के कागज न होने के कारण यह संपत्ति आमतौर पर विवादों का कारण बनी रहती थी। फिलहाल इस संपत्ति पर कब्जा धारी ही इसका मालिक माना जाता है।  जिसके चलते

चंडीगढ़( चंद्रशेखर धरणी): लाल डोरे की संपत्ति की मिल्कियत के कागज न होने के कारण यह संपत्ति आमतौर पर विवादों का कारण बनी रहती थी। फिलहाल इस संपत्ति पर कब्जा धारी ही इसका मालिक माना जाता है।  जिसके चलते कोई भी बैंक इस पर लोन नहीं देता। अब सरकार द्वारा लिया गया एक क्रांतिकारी कदम इन संपत्ति मालिकों के लिए जीवन बदल देने वाला साबित हो सकता है।सरकार हरियाणा के ग्रामीण आंचल की लाल डोरे की प्रॉपर्टी को रजिस्ट्रेशन पावर देने जा रही है। जिसके चलते युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। इसके बाद लाल डोरा संपत्ति धारक भी अपनी संपत्ति का रिकॉर्डिड मालिक होगा। साथ ही हरियाणा-उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर मौजूद जमीनों पर रहने वाले विवाद को खत्म करने के लिए दोनों मुख्यमंत्रियों ने अपने अपनी अपनी सीमाओं पर पिल्लर खड़े करने का फैसला किया है। इस निर्माण कार्य के बाद दशकों से चला आ रहा विवाद पूर्णतह खत्म हो जाएगा। करीब 14 ड्रोन काम कर रहे हैं। 8 रिपेयरिंग में है जो कि मेंटेनेंस के बाद वापस आ जाएंगे। 10 ड्रोन हम जल्द ही खरीद रहे हैं और जरूरत पड़ने पर और भी खरीद सकते हैं और भारत सरकार से भी हम आग्रह कर ड्रोन मंगवा सकते हैं। बता दें कि इस प्रकार के विवादों में कई बार बड़ी घटनाएं कत्ल और गोलीबारी जैसी घट चुकी हैं। इस क्रांतिकारी कदम के बाद संबंधित किसान एक राहत की सांस लेंगे। इस विषय में पंजाब केसरी ने हरियाणा आपदा एवं प्रबंधन विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेट्री एवं फाइनेंशियल कमिश्नर रिवेन्यू संजीव कौशल से विशेष मुलाकात की। उनसे तीसरी लहर के बारे में विभाग की तैयारियों के बारे में भी चर्चा की गई। कई और भी महत्वपूर्ण विषयों पर बात हुई। जिसके कुछ अंश आपके सामने प्रस्तुत हैं:-

लाल डोरा के लिए चल रही ड्रोन मैपिंग और हरियाणा उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर किसानों के विवाद का कारण बनी जमीन पर चल रही ड्रोन मैपिंग का बेहतरीन फैसला है आमतौर पर लाल डोरे की पलटी को एक कब्जे की जमीन माना जाता था जिसमें यह माना जाता था कि जिसकी लाठी उसकी भैंस।

उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रदेश में महामारी अलर्ट के तहत जब पाबंदियां लगाई गई तब संक्रमण फैलने की स्पीड बहुत अधिक थी। महामारी को रोकने के लिए जिंदगी की गति को धीमा करना ही हमारे पास एकमात्र हथियार है। ताकि कहीं बड़ी भीड़ इकट्ठे न हो, लोग एक-दूसरे के नजदीक न आएं, संक्रमण न फैले। इसी लिहाज से 4 मई के बाद से यह पाबंदियां लगाई गई थी। उसके बाद हर हफ्ते इसे रिव्यु करके हम बढ़ाते रहे हैं। संक्रमण की दर जो उस वक्त 30 फ़ीसदी के आसपास हो गई थी। वह अब कम होकर 1.2 फ़ीसदी से भी कम रह चुकी है। इन पाबंदियों के कारण पहले दुकानें बंद रही और फिर ओड इवन करके फिर से दुकानें खोली गई। समाजिक तौर पर इकट्ठा होना बंद किया गया। धार्मिक स्थलों पर जाने से रोक लगाई गई। जिसका काफी फायदा मिला है।

उन्होंने  कहा कि पिछले साल आई पहली लहर से हमने काफी कुछ सीखा। इस बार जो हमने पाबंदियां लगाई उसमें हमारी इंडस्ट्री पर कोई अंतर नहीं आया, प्रोडक्शन जारी रही। हमारी कोशिश थी कि हमारी स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज पर भी प्रभाव न पड़े। हालांकि दुकानें बंद होने के कारण फर्क पड़ा है। लेकिन इकोनामी पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ा। मजदूरों का पलायन भी नहीं हुआ। सरकार ने बहुत सधे हुए कदमों के साथ काम किया। मुझे बताते हुए गर्व की अनुभूति हो रही है कि हमें लगाई गई पाबंदियों की क्लेरिफिकेशन भी जारी नहीं करनी पड़ी जैसे कि पिछली बार करना पड़ता था। हमने आपदा से सीखा और जितनी पाबंदियों की जरूरत थी उतनी ही लगाई। उन्होंने ने कहा कि    जोकि पहले दुकाने ओड इवन से खुलती थी, वह अब 9 बजे से 8 बजे तक सभी खुल सकेंगी।मॉल्स में भी पाबंदियों को काफी कम करते हुए खोलने के लिए अलाउड किया गया है। रेस्टोरेंट पिछले हफ्ते 50 फ़ीसदी लोगों की बैठने की व्यवस्था के साथ खोले जा सकते थे, उसमें थोड़ा समय और बढ़ा दिया गया है। रात 10 बजे तक रेस्टोरेंट्स अपने बार व अन्य सुविधाओं के साथ खुल सकेंगे।

उन्होंने कहा कि   सहकारिता मंत्री महोदय डॉ बनवारी लाल की अध्यक्षता में बैठक हुई है। बहुत बारीकी से को-ऑपरेटिव शुगर मिलों की परफॉर्मेंस का रिव्यू किया गया। इस बार तकरीबन 430 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई हुई है जो कि काफी अच्छी परफॉर्मेंस है। हमारी शुगर मिलों में इस बार कोई अड़चन- कोई रुकावट- कोई बड़ी खराबी नहीं आई है। जिस कारण शुगर मिलें लगातार चलती रही। किसान भाइयों को भी कोई समस्या नहीं आई। दूसरी अच्छी बात यह रही कि हम किसानों की पेमेंट साथ ही साथ करते रहे और सहकारिता मंत्री ने 10 जुलाई तक किसान की पाई-पाई का हिसाब करने की घोषणा की है। आज के दिन तक जो 1500 करोड़ रुपए का गन्ना लिया गया, पिराई की गई, उसमें से लगभग 1082 करोड रुपए की पेमेंट किसानों को कर दी गई है। यानि 72 फ़ीसदी पेमेंट कर दी गई हैं। कुछ शुगर मिलों ने करीब 315 करोड रुपए का लोन सरकार से लेना है। जिस का प्रावधान कर दिया गया है। 10 जुलाई तक सब की पेमेंट हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि हरियाणा-उत्तर प्रदेश की सीमाओं के बीच यमुना नदी है। बारिश के दिनों में जब यमुना का आवेश बढ़ने पर उसके बहाव की दिशा बदल जाती है। जो कि उत्तर प्रदेश और हमारे किसानों में आमतौर पर जमीनी विवाद का कारण बनता है। इसके समाधान के लिए दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों की मीटिंग हुई तथा डिजाइन पिलर बॉर्डर्स पर खड़े करवाने का बड़ा फैसला किया गया। इस बारे में दोनों प्रदेशों के फाइनेंशियल कमिश्नर रिवेन्यू की भी बैठकें हुई और मुख्यमंत्रियों द्वारा लिए गए फैसलों पर काम चल रहा है। इसके तहत सर्वे ऑफ इंडिया हमारी मसावियों में एंट्री करती है। 20 जुलाई तक करनाल जिले में सभी पिल्लरों का काम पूरा हो जाएगा। जिन जिलों में इस प्रकार के विवाद होते हैं, जमीन का कटाव होता है, वह जिले करनाल-पानीपत-सोनीपत-फरीदाबाद-पलवल है और इन जिलों के उपायुक्तों की बैठक करनाल में होनी है। क्योंकि करनाल में सबसे पहले यह काम शुरू हुआ है, इसलिए करनाल उपायुक्त सभी उपायुक्तों को प्रेजेंटेशन दे रहे हैं। इसमें सर्वे ऑफ इंडिया और राजस्व विभाग के अधिकारी भी शामिल होंगे। बातचीत के तुरंत बाद बाकि सभी इन जिलों में भी तेज गति से काम पूरा करवाया जाएगा। ताकि अगले साल तक दोनों तरफ के किसानों के बीच किसी भी प्रकार का विवाद न हो पाए।

कौशल ने बताया कि - हमारे करीब 14 ड्रोन काम कर रहे हैं। 8 रिपेयरिंग में है जो कि मेंटेनेंस के बाद वापस आ जाएंगे। 10 ड्रोन हम जल्द ही खरीद रहे हैं और जरूरत पड़ने पर और भी खरीद सकते हैं और भारत सरकार से भी हम आग्रह कर ड्रोन मंगवा सकते हैं।उन्होंने  कहा कि लाल डोरे पर फैसला लेने वाला हरियाणा पहला प्रदेश है। करनाल के सिरसी गांव में सबसे पहले काम शुरू किया गया था। अब केंद्र सरकार ने उसी नीति को सारे भारत में इंप्लीमेंट किया है। आशा है कि हम इस काम को 3 महीने में पूरा कर लेंगे। पूरे हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में लाल डोरे की पूरी मैपिंग 3 महीने में हो चुकी होगी।इस प्रक्रिया से पहले लाल डोरे में किसी के पास मिलकियत के कागज नहीं होते थे। इससे पड़ोसियों के साथ भी कुछ-न-कुछ विवाद रहता था।  कागज न होने के कारण खरीद-फरोख्त करने में दिक्कत आती थी। प्रॉपर्टी की मिलकियत के कागज न होने के कारण बैंक इत्यादि से लोन भी नहीं मिलता था। इस काम के बाद यह तीनों समस्याएं खत्म हो जाएंगी। विवाद खत्म हो जाएंगे, बैंक इत्यादि तुरंत लोन देगा और खरीद-फरोख्त भी खुलेगा।

उन्होंने कहा कि हरियाणा में कॉलेक्टर रेट्स बिल्कुल, लागू हो चुके हैं। हमने 21 मार्च की डेडलाइन रखी थी। सारे जिलों के कलेक्टर रेट को सोच समझ कर, उसी प्रक्रिया के तहत ऑब्जेक्शन इनवाइट करके, लोगों को इसमें साझा करके, फैसला लिया गया है।-उन्होंने ने कहा कि  - हमारे पास दो बटालियन है। जिसमें एक एसपी जो इस वक्त गुड़गांव में स्थापित हैं। दो यूनिट कंपनीज बनी हुई हैं। हमारे पास गोताखोर है। जिन्हें  जरूरत की जगहों पर रखा गया है। एनडीआरएफ की तरह हमारे पास एसडीआरएफ है जो कि अच्छी तरह से मुस्तैद है। हमारी किश्तियों की वेरिफिकेशन कर ली गई है। उनके रखरखाव के लिए बोल दिया गया है।हमने कंट्रोल रूम स्थापित किया है। इस प्रकार की आपदा होने पर हम पूरी तरह से सजग हैं।- एसडीआरएफ का मतलब आपके पास एक रिजर्व फोर्स है। कहीं पर भी-कोई भी दुर्घटना होने पर इन्हें वहां भेजा जा सकता है। चाहे फ्लड हो, कोई बिल्डिंग गिरी हो, चाहे भूचाल हो या किसी और तरह की प्राकृतिक आपदा के दौरान यह फोर्स सबसे पहले लोगों को मदद पहुंचाने में सक्षम है। बड़ी स्पीड से बचाव कार्य करती है।

 

 मानसून को देखते हुए यमुना के किनारे बैठे गांव में क्या कोई अलर्ट जारी किया गया है या उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए कोई योजना है ? आप कौशल ने कहा कि  अभी कोई ऐसी स्थिति नहीं है। लेकिन आवश्यकता पढ़ने पर हर स्थिति से निपटने के लिए हम तैयार हैं। उन्होंने ने कहा कि  आपदा विभाग सभी विभागों के साथ मिलकर अलग-अलग किस्म की जो भी कार्यवाही की जरूरत होती है वह करवाता है। अगर संक्रमण से बचने के लिए पाबन्दिया लगानी हो तो भी वह लगाता है। हमारे हेल्थ के बारे में हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर विभाग काम करता है। मेडिकल एजुकेशन विभाग मेडिकल कॉलेज और अन्य माध्यमों से हेल्थ एजुकेशन की प्रक्रिया को करता है। इसी तरह हमारी पुलिस आपदा से बचाने के लिए पुलिसिंग करती है। रिवेन्यू विभाग-अर्बन लोकल बॉडीज को भी हम कोडिनेट करते हैं। सरकार का आपदा विभाग इन सभी महकमों को साथ लेकर सभी चीजों के फैसले करने के लिए तैयार रहता है। 

 

 

 

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