Edited By Isha, Updated: 11 Jan, 2026 12:58 PM

उपभोक्ता फोरम ने स्पष्ट किया कि खेतों में कीटनाशक छिड़काव के दौरान जहर शरीर में जाने से हुई मौत को दुर्घटना माना जाएगा, न कि आत्महत्या। यह निर्णय चनेटी निवासी सुमन देवी, उसके बेटे आर्यन कालिया
यमुनानगर : उपभोक्ता फोरम ने स्पष्ट किया कि खेतों में कीटनाशक छिड़काव के दौरान जहर शरीर में जाने से हुई मौत को दुर्घटना माना जाएगा, न कि आत्महत्या। यह निर्णय चनेटी निवासी सुमन देवी, उसके बेटे आर्यन कालिया की याचिका पर दिया गया। आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया कि मृतक के परिवार को 30 लाख रुपये की बीमा राशि सात प्रतिशत ब्याज के साथ दें। इसके साथ ही मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 21 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया गया।
याचिका में बताया था कि भारतीय सेना से सेवानिवृत्त गांव चनेटी निवासी नरेंद्र कुमार हरियाणा पुलिस में एसपीओ थे। 31 जनवरी 2023 को खेत में कीटनाशक का - छिड़काव करने गए थे। काफी देर तक जब वह खेत से नहीं लौटे तो - उनका भाई देखने गया।
नरेंद्र कुमार खेत में बेहोश मिले। उन्हें अस्पताल में लेकर गए, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। नरेंद्र कुमार का वेतन खाता स्टेट बैंक आफ इंडिया में था। इसलिए वह 30 लाख रुपये के ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी के ग्रुप पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस के तहत कवर थे। उनकी मौत को लेकर बीमा कंपनी में क्लेम का दावा करने पर बीमा कंपनी ने यह कहकर दावे को खारिज कर दिया था कि मृतक ने जानबूझकर जहर निगला है जो पालिसी के नियमों के तहत आत्महत्या या आत्मचोट की श्रेणी में आता है।
कंपनी ने एक निजी अन्वेषक और एक पूर्व फारेंसिक निदेशक की राय का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि छिड़काव के दौरान जहर का शरीर में जाना मुमकिन नहीं है, इसे जानबूझकर पिया गया होगा। इसके बाद आयोग में याचिका दाखिल की गई। आयोग ने सुनवाई करते हुए पाया कि छिड़काव के दौरान सांस के जरिए या त्वचा के संपर्क से जहर का अंदर जाना एक अचानक होने वाली दुर्घटना है।