'माउंट पिको दे ओरिज़ाबा' पर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने निकलेंगे हरियाणा के नरेंद्र सिंह यादव

Edited By Isha, Updated: 26 May, 2026 01:44 PM

haryana s narendra singh yadav to set out to set a world record

भारत का राष्ट्रीय ध्वज अब विश्व की एक और दुर्गम ऊँचाई पर अपनी ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज कराने जा रहा है। हरियाणा के रेवाड़ी ज़िले के नेहरूगढ़ गाँव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण जगत में

रेवाड़ी(महेंद्र भारती):  भारत का राष्ट्रीय ध्वज अब विश्व की एक और दुर्गम ऊँचाई पर अपनी ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज कराने जा रहा है। हरियाणा के रेवाड़ी ज़िले के नेहरूगढ़ गाँव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण जगत में अपनी विशेष पहचान बनाने वाले युवा पर्वतारोही नरेंद्र सिंह यादव उत्तरी अमेरिका की सर्वोच्च ज्वालामुखीय चोटी “माउंट पिको दे ओरिज़ाबा” पर एक विशेष अंतरराष्ट्रीय अभियान का नेतृत्व करेंगे। यह अभियान एनएसवाई आउटडोर के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। नरेंद्र सिंह यादव ने अपने महत्वाकांक्षी “वोल्कैनिक समिट्स प्रोजेक्ट” की औपचारिक शुरुआत करते हुए विश्व के प्रमुख ज्वालामुखीय पर्वतों पर भारत का तिरंगा फहराने का संकल्प लिया है। माउंट पिको दे ओरिज़ाबा उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊँची ज्वालामुखीय चोटी मानी जाती है। 


लगभग 5,636 मीटर (18,491 फीट) ऊँची यह चोटी अपने खतरनाक ग्लेशियर मार्ग, भीषण ठंड, तेज़ बर्फीली हवाओं और कठिन तकनीकी चढ़ाई के लिए विश्वभर के पर्वतारोहियों के बीच प्रसिद्ध है। यहाँ तापमान कई बार शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुँच जाता है, जहाँ सामान्य शारीरिक संतुलन बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बन जाता है। इस अभियान की सबसे बड़ी चुनौती ऊँचाई पर ऑक्सीजन की अत्यधिक कमी होगी। इसके कारण पर्वतारोहियों को हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, सांस लेने में कठिनाई, तेज़ सिरदर्द और शरीर की ऊर्जा में अचानक गिरावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। समिट पुश के दौरान 40 से 60 डिग्री तक की खड़ी बर्फीली ढलानों पर क्रैम्पोन, आइस एक्स और रस्सियों के सहारे आगे बढ़ना होगा, जहाँ छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।


 माउंट पिको दे ओरिज़ाबा का मौसम अत्यंत अप्रत्याशित माना जाता है। कुछ ही मिनटों में साफ आसमान भीषण बर्फीले तूफ़ान में बदल सकता है। व्हाइट आउट कंडीशन, ब्लैक आइस, ग्लेशियर क्रेवास और हिमस्खलन का खतरा इस अभियान को और अधिक जोखिमपूर्ण बनाता है। तेज़ हवाएँ कई बार पर्वतारोहियों के लिए संतुलन बनाए रखना भी कठिन कर देती हैं। यही कारण है कि इस पर्वत को केवल शारीरिक क्षमता ही नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, धैर्य और उच्च तकनीकी कौशल की भी परीक्षा माना जाता है।

नरेंद्र सिंह यादव 26 मई 2026 को भारत से मेक्सिको के लिए रवाना हो चुके हैं। सात दिन तक चलने वाले इस कठिन अभियान में विश्व के विभिन्न देशों के अनुभवी पर्वतारोही भाग लेंगे। इस अंतरराष्ट्रीय अभियान का नेतृत्व एक भारतीय पर्वतारोही द्वारा किया जाना पूरे देश के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। यह अभियान केवल पर्वतारोहण की उपलब्धि नहीं होगा, बल्कि भारत के साहस, आत्मविश्वास और अटूट संकल्प का वैश्विक प्रतीक भी बनेगा। 

अभियान की सफलता के बाद माउंट पिको दे ओरिज़ाबा की चोटी पर तिरंगा फहराने का उनका संकल्प भारत की राष्ट्रीय भावना को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान देगा। नरेंद्र सिंह यादव सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर सफल आरोहण करने वाले भारत के पहले युवा पुरुष पर्वतारोही हैं। उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर दो सफल आरोहण किए हैं, जिनमें एक अभियान उन्होंने बिना किसी पूर्व अनुकूलन के मात्र छह दिनों में पूरा कर अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण जगत को चौंका दिया था।


महज 12 वर्ष की आयु में पर्वतारोहण की शुरुआत करने वाले नरेंद्र सिंह यादव अब तक 23 विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा चुके हैं। दिसंबर 2024 में उन्होंने 30 वर्ष और 10 दिन की आयु में सेवन समिट्स पूर्ण कर भारत के सबसे कम उम्र के पुरुष सेवन समिट्स पर्वतारोही बनने का गौरव हासिल किया। पर्वतारोहण के साथ-साथ वे सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रसेवा के कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। 

राष्ट्र और संस्कृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए उन्होंने “रन फॉर राम” नामक अल्ट्रा मैराथन अभियान शुरू किया, जिसके अंतर्गत वे रामेश्वरम, सोमनाथ और बूढ़ा अमरनाथ से अयोध्या तक कुल 6,211 किलोमीटर की दूरी दौड़कर पूरी कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने प्रतिदिन औसतन 51 किलोमीटर की दौड़ लगाई। इस अभियान का अंतिम चरण परशुराम कुंड से अयोध्या तक वर्ष 2026 में प्रस्तावित है। भविष्य में नरेंद्र सिंह यादव का लक्ष्य “एक्सप्लोरर्स ग्रैंड स्लैम” को पूर्ण करना है, जिसमें सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों के साथ उत्तर और दक्षिण ध्रुव तक पहुँचना शामिल है।

 इसके अतिरिक्त वे सातों महाद्वीपों के प्रमुख ज्वालामुखीय पर्वतों पर आरोहण कर भारत का परचम विश्व मंच पर और अधिक ऊँचाइयों तक पहुँचाने की तैयारी में जुटे हैं। एनएसवाई आउटडोर के नेतृत्व में आयोजित यह अभियान न केवल भारतीय पर्वतारोहण की क्षमता और प्रतिभा को प्रदर्शित करेगा, बल्कि देश के युवाओं को सीमाओं से आगे सोचने, चुनौतियों का सामना करने और असंभव को संभव बनाने की प्रेरणा भी देगा। नरेंद्र सिंह यादव आज के युवाओं के लिए संघर्ष, समर्पण और राष्ट्रप्रेम की जीवंत मिसाल बन चुके हैं।
 

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