Edited By Deepak Kumar, Updated: 20 Oct, 2025 09:17 AM

हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में एक बेहद भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। दरअसल, जिले के पिहोवा क्षेत्र स्थित अरुणाय गांव में पति की मौत के महज 15 घंटे बाद उसकी पत्नी ने भी दम तोड़ दिया। रविवार सुबह दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया।
डेस्कः हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में एक बेहद भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। दरअसल, जिले के पिहोवा क्षेत्र स्थित अरुणाय गांव में पति की मौत के महज 15 घंटे बाद उसकी पत्नी ने भी दम तोड़ दिया। रविवार सुबह दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। इस दृश्य को देख गांव की आंखें नम हो गईं। मृतकों की पहचान 45 वर्षीय नरेंद्र सिंह उर्फ बिट्टू और उनकी 40 वर्षीय पत्नी करमजीत कौर के रूप में हुई है। नरेंद्र गांव स्थित पीर की दरगाह पर सेवा करते थे, जबकि करमजीत गृहिणी थीं।
अचानक बिगड़ी तबीयत
परिजनों के अनुसार, शनिवार दोपहर करीब 12 बजे नरेंद्र सिंह को अचानक सीने में तेज दर्द उठा। स्वजन उन्हें तुरंत पिहोवा के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। नरेंद्र की मौत की खबर जैसे ही गांव में फैली, शोक की लहर दौड़ गई।
पत्नी को भी लगा गहरा सदमा, रात में हुई मौत
पति की मौत की खबर से करमजीत कौर गहरे सदमे में थीं। रात का समय होने की वजह से नरेंद्र का अंतिम संस्कार टाल दिया गया था, लेकिन रविवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे करमजीत की भी तबीयत बिगड़ गई। स्वजन उन्हें भी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। आशंका जताई जा रही है कि उनकी मौत का कारण भी हार्ट अटैक हो सकता है।
बेटे ने दी मुखाग्नि, गांव हुआ गमगीन
रविवार सुबह गांव में पति-पत्नी का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। दोनों की एक ही चिता सजाई गई, जिसे उनके इकलौते बेटे विशु ने मुखाग्नि दी। इस दौरान गांव का माहौल बेहद गमगीन रहा। गांववासियों की आंखें नम थीं और हर कोई इस हृदयविदारक घटना से स्तब्ध था। नरेंद्र सिंह की दो बेटियां सनूर और ट्विंकल हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। बेटा विशु पिहोवा में कपड़े की दुकान पर काम करता है और तीन बेटियों के साथ अपने माता-पिता के साथ रह रहा था।
10 साल पहले गांव में बसे थे
नरेंद्र सिंह के पिता बलवंत सिंह भारतीय सेना से हवलदार के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। बाद में वे हरियाणा पुलिस में सेवा में रहे। करीब दस वर्ष पूर्व बलवंत सिंह की मृत्यु के बाद उनका परिवार मूल रूप से गुरुग्राम से आकर अरुणाय गांव में बस गया था।