पुलिस हिरासत में प्रताड़ना की शिकायत पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग का संज्ञान

Edited By Deepak Kumar, Updated: 26 Oct, 2025 07:47 PM

haryana human rights commission cognizance of police custody torture complaint

हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने पुलिस हिरासत में कथित रूप से प्रताड़ना के एक मामले में गंभीर संज्ञान लेते हुए, हरियाणा पुलिस महानिदेशक तथा स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक को विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए हैं।

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी ) : हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने पुलिस हिरासत में कथित रूप से प्रताड़ना के एक मामले में गंभीर संज्ञान लेते हुए, हरियाणा पुलिस महानिदेशक तथा स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक को विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए हैं। यह निर्देश आयोग के सदस्य दीप भाटिया द्वारा शिकायत संख्या 1037/10/2023 के अंतर्गत जारी किए गए, जिसमें धर्म सिंह (शिकायतकर्ता के पिता) और उप निरीक्षक कृष्ण चंद, सीआईए-II, करनाल आयोग के समक्ष उपस्थित हुए थे।

हरियाणा मानव अधिकार आयोग के समक्ष प्रस्तुत अभिलेखों के अनुसार, एफआईआर संख्या 64 दिनांक 11.03.2023, धारा 379 भारतीय दंड संहिता तथा धारा 136 विद्युत अधिनियम, थाना निसिंग, जिला करनाल में दर्ज मामले की जांच उप निरीक्षक कृष्ण चंद द्वारा की गई थी। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता लवदीप को 14.04.2023 को गिरफ्तार किया गया था और उसी दिन उसका चिकित्सकीय परीक्षण भी करवाया गया था। हालाँकि, प्रस्तुत चिकित्सा दस्तावेज़ स्पष्ट रूप से पढ़ने योग्य नहीं थे और ऐसा प्रतीत हुआ कि उस रिपोर्ट में किसी नई चोट का उल्लेख नहीं किया गया है।

आयोग के सदस्य दीप भाटिया के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि 15.04.2023 को किए गए चिकित्सकीय परीक्षण (एम.एल.आर.) में चोटों का उल्लेख किया गया है, जिनकी अवधि 4 से 7 दिन पुरानी बताई गई है। जांच अधिकारी इस विरोधाभास को स्पष्ट करने में असमर्थ रहे कि क्यों 14.04.2023 की रिपोर्ट में चोटों का उल्लेख नहीं किया गया, जबकि अगले दिन की रिपोर्ट में वही चोटें दर्ज की गईं।

इस पर उप निरीक्षक कृष्ण चंद (सीआईए-II, करनाल) तथा निरीक्षक दिनेश कुमार (कार्यालय महानिदेशक जांच, आयोग) ने आयोग के समक्ष यह बताया कि आमतौर पर पुलिस अभिरक्षा में चिकित्सा परीक्षण के समय चिकित्सक केवल उन्हीं चोटों का उल्लेख करते हैं जिनके बारे में आरोपी स्वयं शिकायत करता है, और शरीर का संपूर्ण परीक्षण (full body examination) नहीं किया जाता। आयोग  के सदस्य दीप भाटिया ने इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि यह पुलिस हिरासत में प्रताड़ना (custodial torture) से संबंधित अत्यंत संवेदनशील मामला है। 

आयोग के प्रोटोकॉल, सूचना व जनसंपर्क अधिकारी डॉक्टर पुनीत अरोड़ा ने बतया कि सदस्य दीप भाटिया  ने अपने आदेश में पुलिस महानिदेशक, हरियाणा, पंचकूला को निर्देशित किया है कि वे किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को नामित कर इस मामले की विस्तृत जांच कराएं तथा शिकायतकर्ता के साथ हुई कथित हिरासत प्रताड़ना और पुलिस अधिकारियों द्वारा बताए गए कार्य-प्रणाली (modus-operandi) के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत करें। साथ ही, स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक, हरियाणा को भी यह निर्देश दिए गए हैं कि वे 14.04.2023 एवं 15.04.2023 को किए गए दोनों चिकित्सकीय परीक्षणों के संबंध में जांच रिपोर्ट 17 दिसंबर 2025 से पहले प्रस्तुत करें।

उन्हें यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में पुलिस अभिरक्षा में लिए गए प्रत्येक व्यक्ति का पूर्ण शारीरिक परीक्षण (Full Body Examination) किया जाए और यह केवल औपचारिकता निभाने हेतु सतही (superficial) परीक्षण न हो। इसके लिए सभी क्षेत्रीय चिकित्सकों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के भी आदेश दिए गए हैं। हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने स्पष्ट किया है कि पुलिस हिरासत में मानवाधिकारों का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय है।ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न केवल नागरिक अधिकारों का हनन है, बल्कि न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती है।

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