पेंशन केसों पर सख्त हुई हरियाणा सरकार, अधिकारियों को दी ये कड़ी चेतावनी

Edited By Harman, Updated: 24 Jun, 2026 06:40 PM

haryana government tightens its grip on pension cases

हरियाणा सरकार ने अदालतों में लंबित पेंशन संबंधी मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। वित्त विभाग ने सभी विभागों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अदालतों में दायर किए जाने वाले जवाब और लिखित बयान...

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : हरियाणा सरकार ने अदालतों में लंबित पेंशन संबंधी मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। वित्त विभाग ने सभी विभागों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अदालतों में दायर किए जाने वाले जवाब और लिखित बयान समयबद्ध तरीके से दाखिल किए जाएं। सरकार ने साफ किया है कि पेंशन मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही अब संबंधित अधिकारियों पर भारी पड़ सकती है।

सरकार का मानना है कि अदालतों में समय पर और तथ्यात्मक जवाब दाखिल न होने से न केवल राज्य सरकार को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है, बल्कि कई मामलों में प्रतिकूल कानूनी उदाहरण भी स्थापित हो सकते हैं। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी और विभाग की जवाबदेही तय की जाएगी। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि 29 जनवरी 2018 को जारी निर्देशों के अनुसार पेंशन संबंधी न्यायिक मामलों में वित्त विभाग और प्रधान महालेखाकार कार्यालय की ओर से संयुक्त जवाब दाखिल करने की व्यवस्था पहले से लागू है। इसके बावजूद कई मामलों में जवाब दाखिल करने में देरी और समन्वय की कमी सामने आ रही है। इसी को देखते हुए अब सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि पेंशन मामलों में अदालतों में दायर किए जाने वाले जवाबों को प्राथमिकता के आधार पर तैयार किया जाए और समयसीमा के भीतर दाखिल किया जाए।

सरकारी निर्देशों के मुताबिक पेंशन मामलों में तैयार किया गया संयुक्त जवाब महाधिवक्ता कार्यालय के माध्यम से अदालत में दाखिल किया जाएगा। इसके लिए संबंधित विभागों, वित्त विभाग और प्रधान महालेखाकार कार्यालय के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को कहा गया है। वित्त विभाग ने पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी अधिकारी या विभाग की लापरवाही के कारण अदालत में राज्य सरकार का पक्ष कमजोर पड़ता है, वित्तीय नुकसान होता है या सरकार के खिलाफ प्रतिकूल फैसला आता है, तो जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की मानी जाएगी। यह निर्देश राज्य के सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भेजे गए हैं। सरकार चाहती है कि पेंशन विवादों से जुड़े मामलों में एक समान और तथ्यात्मक पक्ष अदालत के सामने रखा जाए, ताकि अनावश्यक मुकदमेबाजी और सरकारी नुकसान को रोका जा सके।
 

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