Edited By Harman, Updated: 30 Jun, 2026 06:28 PM

राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन को मंगलवार को घनघस खाप का खुला समर्थन मिला।
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन को मंगलवार को घनघस खाप का खुला समर्थन मिला। घनघस खाप के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट जगदीप घनघस धरना स्थल पहुंचे और पार्टी के संस्थापक एवं अध्यक्ष अभिजीत दिपके से मुलाकात कर आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई। इस दौरान उन्होंने कहा कि हरियाणा की समस्त खापों की ओर से अभिजीत दिपके को हरियाणा आने का औपचारिक निमंत्रण दिया गया है, जहां उनका सम्मान किया जाएगा।
20 जून से जारी है अनिश्चितकालीन आंदोलन
एडवोकेट जगदीप घनघस ने बताया कि यह आंदोलन 20 जून 2026 से लगातार जारी है। इससे पहले 6 जून को जंतर-मंतर पर एक दिवसीय सांकेतिक प्रदर्शन किया गया था, लेकिन विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के मामलों को लेकर इसे बाद में अनिश्चितकालीन धरने का रूप दे दिया गया। मंगलवार को आंदोलन का 11वां दिन रहा।
उन्होंने बताया कि पिछले तीन दिनों से प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन के समर्थन में धरना स्थल पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वहीं 28 जून से कई खाप पंचायतों और किसान संगठनों ने भी छात्रों के समर्थन में इस आंदोलन से जुड़कर अपना समर्थन दर्ज कराया है।
अभिजीत दिपके ने विदेश से की थी पार्टी की शुरुआत
घनघस ने बताया कि अभिजीत दिपके कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक हैं। उन्होंने इस राजनीतिक मंच की शुरुआत अमेरिका के बॉस्टन शहर से ऑनलाइन की थी। दिपके इससे पहले आम आदमी पार्टी के साथ भी कार्य कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का एजेंडा केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन, न्यायपालिका, शिक्षा और चुनावी सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित है।
ये हैं आंदोलन और पार्टी की प्रमुख मांगें
आंदोलनकारियों ने कई महत्वपूर्ण मांगें सरकार के सामने रखी हैं। इनमें न्यायपालिका की पूर्ण स्वतंत्रता सुनिश्चित करना, मुख्य न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी प्रकार का राजनीतिक पद या राज्यसभा सदस्यता नहीं देने की व्यवस्था लागू करना शामिल है। इसके अलावा संसद और केंद्रीय मंत्रिमंडल में बिना परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने की प्रतीक्षा किए महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने, दल-बदल पर सख्त रोक लगाने के लिए एंटी-डिफेक्शन कानून को और मजबूत बनाने, प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह भ्रष्टाचार मुक्त बनाने तथा पेपर लीक या परीक्षा संबंधी धांधलियों के लिए संबंधित मंत्रियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जा रही है। आंदोलनकारी चुनावी प्रक्रिया में मतदाता सूची से नाम हटाने की व्यवस्था को भी अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की मांग कर रहे हैं।
परीक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं में आक्रोश
जगदीप घनघस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों का मानना है कि यदि परीक्षा प्रणाली बार-बार विफल होती है और पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी संबंधित मंत्री को लेते हुए पद छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा, सीयूईटी, सीबीएसई सहित विभिन्न परीक्षाओं में सामने आई तकनीकी खामियों और कथित अनियमितताओं ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है। छात्र परीक्षा प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता, निष्पक्षता और व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।
छात्र आत्महत्याओं और रोजगार के मुद्दे भी उठे
धरना-प्रदर्शन में छात्रों की आत्महत्या के मामलों को भी गंभीर मुद्दे के रूप में उठाया गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और लगातार अनिश्चितता के कारण कई युवाओं पर मानसिक दबाव बढ़ा है। उन्होंने प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने तथा सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
इसके साथ ही सरकारी स्कूलों के बंद होने, शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में रिक्त पदों और बढ़ती बेरोजगारी को भी आंदोलन का महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि युवाओं की शिक्षा और रोजगार संबंधी समस्याओं को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
खापों और किसान संगठनों का बढ़ता समर्थन
घनघस खाप के अनुसार, आंदोलन को लगातार विभिन्न सामाजिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है। खाप पंचायतों और किसान संगठनों के जुड़ने से आंदोलन को नई मजबूती मिली है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।