Edited By Isha, Updated: 20 Apr, 2026 04:31 PM

रियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक गंभीर गतिरोध पैदा हो गया है। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'आयुष्मान भारत योजना' (चिरायु हरियाणा) के तहत निजी अस्पतालों का बकाया भुगतान 500 करोड़
चंडीगढ़: हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक गंभीर गतिरोध पैदा हो गया है। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'आयुष्मान भारत योजना' (चिरायु हरियाणा) के तहत निजी अस्पतालों का बकाया भुगतान 500 करोड़ रुपये के पार पहुँच गया है। इस भारी लंबित राशि की जांच सरकार द्वारा शुरू किए जाने के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने सख्त रुख अपनाते हुए सेवाएं बंद करने की चेतावनी दी है।
मुख्य बिंदु: आखिर क्यों बढ़ा विवाद?
500 करोड़ का भारी बकाया: प्रदेश के लगभग 700 निजी अस्पतालों का दावा है कि पिछले कई महीनों से उनके क्लेम का भुगतान सरकार के पास अटका हुआ है। सरकार ने भुगतान जारी करने से पहले बिलों की गहन जांच (Audit) के आदेश दिए हैं। सरकार का मानना है कि इलाज के नाम पर हो रही किसी भी वित्तीय अनियमितता को रोकने के लिए यह आवश्यक है। डॉक्टरों के संगठन का कहना है कि वे किसी भी जांच के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन 'जांच' के नाम पर वाजिब भुगतान को महीनों तक लटकाना अस्पतालों को आर्थिक रूप से पंगु बना रहा है।
अस्पतालों का अल्टीमेटम
IMA हरियाणा इकाई ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार ने जल्द ही भुगतान की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित नहीं किया और लंबित राशि जारी नहीं की, तो प्रदेश के सभी निजी अस्पताल आयुष्मान कार्ड पर इलाज करना पूर्णतः बंद कर देंगे।
मरीजों पर क्या होगा असर?
हरियाणा के लाखों मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवार इस योजना पर निर्भर हैं। यदि निजी अस्पताल सेवाएं रोकते हैं, तो डायलिसिस और कीमोथेरेपी जैसे नियमित इलाज रुक सकते हैं। सरकारी अस्पतालों में भारी भीड़ बढ़ेगी, जिससे स्वास्थ्य ढांचा चरमरा सकता है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को निजी अस्पतालों में नकद भुगतान करना होगा, जो कई परिवारों की पहुंच से बाहर है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और IMA के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का दौर जारी है। जनता की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या सरकार जांच के साथ-साथ भुगतान की प्रक्रिया में तेजी लाकर इस स्वास्थ्य संकट को टाल पाएगी या नहीं।