Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 14 Sep, 2026 10:47 PM

पटौदी इलाके में 54 साल पहले दुनिया छोड़ चुके एक बुजुर्ग को फर्जी कागजातों में जिंदा दिखाकर उनकी करोड़ों रुपये की जमीन हड़पने की गहरी साजिश रची गई। इस पूरे खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब पीड़ित परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
गुड़गांव, (ब्यूरो): पटौदी इलाके में 54 साल पहले दुनिया छोड़ चुके एक बुजुर्ग को फर्जी कागजातों में जिंदा दिखाकर उनकी करोड़ों रुपये की जमीन हड़पने की गहरी साजिश रची गई। इस पूरे खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब पीड़ित परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। पटौदी के इलाका मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दीपक जागलान की अदालत के आदेश पर थाना शहर पटौदी पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपियों और नम्बरदार सहित अन्य सहयोगियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संगीन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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पटौदी के अमरपुरी छावनी निवासी भूपेंद्र शर्मा, राज कुमार शर्मा और हेली मंडी निवासी आरती मेहता ने अपने अधिवक्ता पुष्पेंद्र सिंह राघव के माध्यम से अदालत में एक इस्तगासा दायर किया था। इसमें बताया गया कि शिकायतकर्ताओं के परदादा बोधराज पुत्र दासू राम को भारत सरकार की रिहैबिलिटेशन स्कीम के तहत मौज़ा पटौदी तहसील पटौदी में मुस्ततिल नंबर 124, किला नंबर 20/1 में चार कनाल 14 मरला भूमि अलॉट हुई थी। राजस्व रिकॉर्ड यानी जामबंदी में साल 1960-61 से ही उनके दादा चमन लाल उर्फ चमन राम पुत्र बोधराज का नाम चला आ रहा है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उनके दादा चमन लाल की मृत्यु 15 दिसंबर 1970 को तथा पिता फकीर चंद की मृत्यु 10 अगस्त 1983 को हो चुकी है, जिसके आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र भी दर्ज शिकायत के साथ प्रस्तुत किए गए।
शातिर आरोपियों ने इसी जमीन को हड़पने के लिए एक बड़ा फर्जीवाड़ा रचा। आरोपी प्रवीण और उसके पति नूर हसन निवासी पटौदी ने किसी अज्ञात फर्जी व्यक्ति को मृतक चमन राम बनाकर उसका नकली आधार कार्ड और पैन कार्ड तैयार करवा लिया, जिसमें फर्जी पता गली नंबर छह, नजदीक शिव मंदिर, नरेला, नार्थ-वेस्ट दिल्ली दर्शाया गया। इसके बाद आरोपियों ने पटौदी के मामन सिंह नंबरदार को अपने साथ साठगांठ में शामिल किया। 22 जनवरी 2025 को आरोपियों ने इस फर्जी चमन राम के जरिए वसीका नम्बर 3930 के तहत बयानामा पंजीकृत करवाकर जमीन प्रवीण के नाम करवा ली। इसके महज एक महीने बाद 25 फरवरी 2025 को वसीका नम्बर 4444 के जरिए ट्रांसफर डीड बनाकर नूर हसन ने पूरी जमीन अपनी पत्नी के नाम से अपने नाम पर करवा ली। इन दोनों ही प्रक्रियाओं में मामन सिंह नंबरदार ने फर्जी दस्तावेजों की तस्दीक करते हुए बतौर गवाह अपने हस्ताक्षर किए।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस फर्जीवाड़े के दम पर आरोपी नूर हसन जमीन पर जबरन अवैध कब्जा करने की नीयत से उन्हें डरा-धमका रहा है। पीड़ितों ने इस संबंध में 27 मई 2025 को उच्च पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने कोर्ट का रुख किया। अदालत ने पूरे मामले की गंभीरता और संलग्न प्रमाणों को देखते हुए धारा 175(3) बीएनएसएस के तहत मामला दर्ज करने का आदेश जारी किया। कोर्ट के निर्देशानुसार थाना शहर पटौदी में आरोपी प्रवीण, नूर हसन, मामन सिंह नंबरदार शकील (व अन्य अज्ञात सह-आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा के तहत मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारी ने बताया कि मामले में जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।