आखिर क्यों फरवरी 2025 से अस्तित्व में नहीं राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण ?

Edited By Manisha rana, Updated: 03 Nov, 2025 02:03 PM

why state environment impact assessment authority not existence since february

हरियाणा में राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण का फरवरी 2025 के बाद से अस्तित्व में नहीं होना यानी प्राधिकरण का पुनर्गठन नहीं किया जाना राज्य की अनेक औद्योगिक इकाइयों का निर्माण संबंधित परियोजनाओं को पूरी तरह से प्रभावित कर रहा है।

चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा में राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण का फरवरी 2025 के बाद से अस्तित्व में नहीं होना यानी प्राधिकरण का पुनर्गठन नहीं किया जाना राज्य की अनेक औद्योगिक इकाइयों का निर्माण संबंधित परियोजनाओं को पूरी तरह से प्रभावित कर रहा है।

हालांकि भारत सरकार के जलवायु एवं वन मंत्रालय द्वारा 14.9.2006 को एक नोटिफिकेशन व एनवायरमेंट प्रोटक्शन रूल्स 1986 के अनुसार सब सेक्शन दो / तीन और पर्यावरण प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के अनुसार हर एक राज्य में पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण का होना अनिवार्य होता है। जिसमें प्रशासनिक अनुभव वाले अधिकारी व गणमान्य व्यक्ति जो पर्यावरण में अपना विशेष अनुभव और रुचि रखते हो वह अध्यक्ष व सदस्य तथा निदेशक एनवायरनमेंट डिपार्टमेंट बतौर सदस्य सचिव होते हैं।

 ज्ञात रहे कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पीके दास ने 22 फरवरी 2025 को अपनी सेवानिवृत्ति इसी पद से ली थी। उनके बाद से यह पद रिक्त है तथा प्राधिकरण का पिछले 9 माह से पुनर्गठन नहीं किया गया। जिस कारण फरवरी में 26 परियोजनाओं के आवेदन जो की लंबित थे वह अब तक लंबित हीं है और ना ही प्राधिकरण द्वारा पोर्टल खोला गया जिससे यह पता चल सके कि कितने दर्जनों या सैकड़ो आवेदन पत्र प्रस्तुत किए गए होंगे।

यह प्राधिकरण खनन कार्य, नदी घाटी परियोजनाएं, थर्मल पावर प्लांट, तेल एवं गैस निकासी परमाणु परियोजनाएं, खनन वाशिंग प्लांट, रासायनिक उद्योग, सीमेंट प्लांट, पेट्रोलियम रिफाइंड प्लांट, केमिकल फर्टिलाइजर प्लांट, चमड़ा उद्योग, पेस्टिसाइड एवं फर्टिलाइजर प्लांट, पेट्रोकेमिकल, डिस्टलरीज, पेंट उद्योग, चीनी मिल्स, इंडस्ट्रियल एस्टेट, कंपलेक्स, पार्क, राष्ट्रीय राजमार्ग, नगर निगम का पालिकाओं से संबंधित प्लांट, 20000 वर्ग मीटर से अधिक का भवन निर्माण परियोजनाओं के बारे में पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करते हुए आवश्यक अनुमति प्रदान की जाती है।

 उक्त प्राधिकरण का गठन न होने यानी अस्तित्व में न होने के कारण ऊपर वर्णित परियोजनाओं पर लगातार कु प्रभाव पड़ रहा है। यह प्राधिकरण पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है यानी पर्यावरण को बेहतर रखने के लिए अति महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाए जा रहे।
 

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