हांसी में दो सफाई कर्मियों की मौत,  हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने होटल मालिक व प्रशासन से मांगी रिपोर्ट

Edited By Isha, Updated: 04 Nov, 2025 10:40 AM

two sanitation workers died in hansi  human rights commission sought report

हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने 20 अक्टूबर, 2025 को एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित “होटल के सेप्टिक टैंक में उतरे दो कर्मचारी, मौत” शीर्षक वाली खबर का स्वप्रेरित संज्ञान लिया है। रिपोर्ट में बता

चंडीगढ़(चन्द्र शेखर धरणी):  हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने 20 अक्टूबर, 2025 को एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित “होटल के सेप्टिक टैंक में उतरे दो कर्मचारी, मौत” शीर्षक वाली खबर का स्वप्रेरित संज्ञान लिया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि हिसार जिले के हांसी स्थित एक होटल में कार्यरत सोमवीर (निवासी: गांव गढ़ी) और वीरेंद्र (निवासी: गांव जमावरी) नामक दो कर्मचारियों को सीवर मोटर खराब होने पर बिना किसी सुरक्षात्मक उपकरण के सेप्टिक टैंक में उतरने के लिए मजबूर किया गया। एक कर्मचारी के टैंक में उतरते ही बेहोश हो जाने पर, दूसरे ने उसे बचाने की कोशिश की पर वह भी बेहोश हो गया। दोनों की मृत्यु टैंक के भीतर संभवत: जहरीली गैसों के संपर्क में आने से हुई। मृतकों के परिजनों ने होटल प्रबंधन पर लापरवाही और जबरदस्ती का आरोप लगाते हुए घटना के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया है।

हरियाणा मानव अधिकार आयोग को प्राप्त हुई रिपोर्ट एवं प्रारंभिक जानकारी से ज्ञात होता है कि उक्त कर्मचारियों को बिना ऑक्सीजन सिलेंडर, गैस जांच या सुरक्षा उपकरणों के टैंक में उतरने का निर्देश दिया गया। मृतकों के परिवारों का आरोप है कि होटल प्रबंधन ने सुरक्षा मानकों और मानव गरिमा की अनदेखी करते हुए उन्हें खतरनाक टैंक में उतरने के लिए बाध्य किया।

हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा तथा दोनों सदस्यों कुलदीप जैन और दीप भाटिया को मिलाकर बने पूर्ण आयोग के अनुसार यह विधिवत स्थापित है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार में सुरक्षित, स्वस्थ एवं गरिमामय कार्यस्थल का अधिकार भी सम्मिलित है। नियोक्ता तथा राज्य प्राधिकरणों का यह कानूनी दायित्व है कि वे कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के जानलेवा खतरों से कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने उपभोक्ता शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र बनाम भारत संघ [1995 (3) SCC 42] में यह प्रतिपादित किया कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सकीय देखभाल का अधिकार अनुच्छेद 21 के साथ-साथ अनुच्छेद 39(c), 41 और 43 के तहत एक मौलिक अधिकार है, जो कामगारों के जीवन को सार्थक एवं गरिमापूर्ण बनाता है।

खतरनाक वातावरण जैसे कि सेप्टिक टैंक या संकुचित स्थानों में कार्यरत मजदूरों हेतु नियोक्ता के दायित्व निम्नलिखित हैं:

  • प्रशिक्षित कर्मियों की नियुक्ति;
  • अनिवार्य सुरक्षा एवं श्वसन उपकरणों की उपलब्धता;
  • प्रवेश से पूर्व गैस परीक्षण एवं वेंटिलेशन की व्यवस्था;
  • तत्पर बचाव दल एवं साधन उपलब्ध रखना; तथा
  • यांत्रिक या स्वचालित सफाई विधियों का उपयोग।

इन सुरक्षा उपायों का उल्लंघन मनुष्यों को मात्र श्रम की मशीन समझने के समान है — जिसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने गैस चैंबर में धकेलने जैसा बताया है। जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाले पूर्ण आयोग का यह भी ध्यान में रखने योग्य है कि “हस्तचालित मैला ढोने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध तथा उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013” की धारा 7 में स्पष्ट प्रावधान है कि “राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने की तिथि से एक वर्ष के भीतर किसी भी व्यक्ति, स्थानीय प्राधिकरण या संस्था द्वारा सीधे या परोक्ष रूप से किसी को भी सेवर या सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई के लिए नियोजित नहीं किया जाएगा।” इस अधिनियम की धारा 9 में ऐसे किसी भी उल्लंघन के लिए दंड का प्रावधान है, जिसमें पहली बार के लिए दो वर्ष तक का कारावास या दो लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं, और पुनरावृत्ति के मामले में पांच वर्ष तक का कारावास या पांच लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों। यह उल्लंघन मानवाधिकारों और श्रमिकों की गरिमा का गंभीर हनन है।

केन्द्रीय लोक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण अभियांत्रिकी संगठन (CPHEEO), आवास और शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नवंबर 2018 में जारी “सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP)” में यांत्रिक एवं वैज्ञानिक तरीकों के माध्यम से सुरक्षित सफाई हेतु विस्तृत दिशा निर्देश दिए गए हैं। SOP में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि हाथ से टैंक में उतरना पूर्णतः निषिद्ध है सिवाय विशेष परिस्थितियों के, और तभी जब उचित सुरक्षा उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मियों की सहायता से किया जाए।

हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा तथा दोनों सदस्यों कुलदीप जैन और दीप भाटिया को मिलाकर बने पूर्ण आयोग का मानना है कि वर्तमान मामले में, होटल प्रबंधन द्वारा उचित सुरक्षा साधन, प्रशिक्षित कर्मी, बचाव दल एवं यांत्रिक सफाई व्यवस्था न उपलब्ध कराने से श्रमिकों के जीवन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और गरिमा का हनन हुआ है। खतरनाक वातावरण में बिना सुरक्षा साधनों के काम करना मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।

उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाले पूर्ण आयोग पाता है कि मृतकों के मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है एवं नियोक्ता तथा संबंधित प्राधिकरणों द्वारा श्रम सुरक्षा एवं संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में असफलता हुई है। इस घटना से भविष्य में पुनरावृत्ति रोकने हेतु तंत्रगत सुधार और पीड़ित परिवारों को राहत की आवश्यकता है। आयोग के प्रोटोकॉल, सूचना व जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि उपलब्ध तथ्यों और गंभीर आरोपों को देखते हुए, हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने आदेश दिया है कि निम्न आदेश देता है:

उपायुक्त, हिसार छह सप्ताह के भीतर मृतकों के परिजनों को प्रदान की गई या स्वीकृत राहत, क्षतिपूर्ति और पुनर्वास उपायों का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।  नगर परिषद, हांसी (या यदि क्षेत्र नगर सीमा से बाहर है तो ग्राम पंचायत, गांव रामपुरा, तहसील हांसी, जिला हिसार) छह सप्ताह में घटना के कारणों, होटल के लाइसेंस एवं निरीक्षण की स्थिति तथा अधिनियम, 2013 के उल्लंघन की जानकारी प्रस्तुत करे। पुलिस अधीक्षक, हांसी छह सप्ताह में दर्ज एफआईआर, आरोपित धाराएं एवं जांच की प्रगति पर प्रतिवेदन दें। होटल प्रबंधन तुरंत सेप्टिक या सीवर टैंकों में बिना सुरक्षात्मक उपकरण, गैस जांच, बचाव व्यवस्था, ऑक्सीजन सिलेंडर आदि के मैनुअल एंट्री को प्रतिबंधित करे एवं छह सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट जमा करे। उपरोक्त सभी ने आदेश में उल्लिखित बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई की तिथि अर्थात् 17.12.2025 से पूर्व आयोग को प्रस्तुत करनी है।


 

 

 
 

 
 

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