मौसम का यह 'मिजाज' बिगाड़ सकता है गेहूं का 'हिसाब', 24.45 लाख हैक्टेयर में है गेहूं की फसल

Edited By Manisha rana, Updated: 06 Feb, 2026 09:58 AM

this  mood  of the weather can spoil the  calculation  of wheat

मौसम का मिजाज इस बार रूखा-रूखा बना हुआ है। इस बार अनुमान के मुताबिक कोहरा भी नहीं पड़ा है और बरसात भी औसत से कम दर्ज की गई है। ऐसे में गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। चिंता की बात यह है कि सिरसा, फतेहाबाद व जींद प्रदेश के प्रमुख गेहूं उत्पादक...

हरियाणा डेस्क : मौसम का मिजाज इस बार रूखा-रूखा बना हुआ है। इस बार अनुमान के मुताबिक कोहरा भी नहीं पड़ा है और बरसात भी औसत से कम दर्ज की गई है। ऐसे में गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। चिंता की बात यह है कि सिरसा, फतेहाबाद व जींद प्रदेश के प्रमुख गेहूं उत्पादक जिले हैं। कुल 24 लाख 45 हजार हैक्टेयर गेहूं की फसल में से इन 3 जिलों में पौने 6 लाख हैक्टेयर में गेहूं की फसल है। 1 जनवरी से 4 फरवरी तक सिरसा, फतेहाबाद वा जींद जिलों में 3 मिलीमीटर से भी कम बरसात दर्ज की गई है। इस समय दिन का तापमान 22 डिग्री है।

मौसम विभाग के अनुसार फरवरी के दूसरे पखवाड़े में तापमान 27 डिग्री तक पहुंच सकता है जो गेहूं के उत्पादन पर असर डाल सकता है। हालांकि यह राहत की बात है कि इस बार गेहूं की फसल में किसी तरह के रोग का प्रकोप नजर नहीं आया और मौसम का मिजाज इस माह के अंत तक भी ठंडा रहता है तो फिर गेहूं का उत्पादन अच्छा भी हो सकता है। इस बार मौसम के मिजाज में लगातार आ रहे बदलाव के बाद गेहूं उत्पादक किसान मायूस हैं। फरवरी माह में ही अधिकतम पारा 22 डिग्री तक पहुंच गया है। लगातार बढ़ रहे तापमान से गेहूं का दाना मोटा नहीं बन रहा है और इससे भी उत्पादन पर असर पड़ेगा। 

कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक गर्मी गेहूं की फसल के उत्पादन पर असर डाल सकती है। इस बार प्रदेश में 130 लाख टन से अधिक गेहूं उत्पादन की संभावना जताई जा रही थी और अब यह उत्पादन 20 से 30 लाख टन कम रह सकता है। इससे पहले प्रदेश में 2011-12 में रिकॉर्ड 131 लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ था। केंद्रीय भंडारण में हरियाणा का रहता है 15 प्रतिशत हिस्साः गौरतलब है कि हरियाणा देश का प्रमुख गेहूं उत्पादक प्रदेश है। उत्तर प्रदेश और पंजाब के बाद सबसे अधिक गेहूं का उत्पादन हरियाणा में होता है। हरियाणा 44,212 वर्ग किलोमीटर के साथ देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 1.6 प्रतिशत है लेकिन गेहूं उत्पादन में इस छोटे से राज्य का 15 प्रतिशत योगदान रहता है। 1966 में हरियाणा का गठन हुआ। उस समय 7,43,193 हैक्टेयर रकबे पर गेहूं की फसल थी।

1981 में आंकड़ा 14,80,000 हैक्टेयर तक पहुंच गया। इसके बाद हरित क्रांति के दौर में खेती में मशीनीकरण के साथ ही संसाधन और सुविधाओं का इजाफा हुआ तो गेहूं उत्पादन में हरियाणा ने रिकॉर्ड तोड़ दिए। 1990-91 में गेहूं का रकबा 18,50,000 जबकि साल 2000 में 23 लाख 55 हजार हैक्टेयर तक हो गया। 2010-11 में 25 लाख 2000 हैक्टेयर, 18-19 में 25 लाख 53 हजार, 2019-20 में 25 लाख 34 हजार, जबकि 2020-21 में 25 लाख 64000 हैक्टेयर गेहूं की काश्त की गई। इन सबके बीच सबसे अधिक 25 लाख 76 हजार हैक्टेयर रकबा 2015-16 में रहा। पिछले साल 24 लाख 71 हजार हैक्टेयर में गेहूं की फसल थी।

प्रदेश में औसत से कम हुई है बरसातः भारतीय मौसम विभाग से मिली जानकारी अनुसार 1 जनवरी से 4 फरवरी तक प्रदेश में करीब 18 मिलीमीटर बरसात हुई है। सिरसा में 3, फतेहाबाद में 2.5 एवं जींद में 2.2 मिलीमीटर बरसात हुई है। ऐसे ही हिसार में 11.5, भिवानी में 21.3, चरखी दादरी में 12.5, महेंद्रगढ़ में 8.1, जींद में 22, कैथल में 26.6, रोहतक में 10.8, झज्जर में 15.5, रेवाड़ी में 10.5, नूंह में 9, गुरुग्राम में 19, फरीदाबाद व पलवल में 13-13, सोनीपत में 11.9, पानीपत में 36.2, करनाल में 29, कुरुक्षेत्र में 56, अंबाला में 60.4, यमुनानगर में 43 एवं पंचकूला में 49 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई है।

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