कैथल में रिश्वतखोरी केस में जिला पार्षद व प्रतिनिधि को 7-7 साल की सजा, विजिलेंस ने 2024 में रिश्वत लेते किया था गिरफ्तार

Edited By Manisha rana, Updated: 05 Feb, 2026 02:54 PM

district councilor and representative sentenced to 7 years in prison in kaithal

कैथल में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला अदालत ने एक चर्चित रिश्वतखोरी मामले में सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने जिला पार्षद विक्रम और पार्षद प्रतिनिधि भारत ढुल को दोषी करार देते हुए दोनों को 7-7 साल की कठोर कारावास की सजा और आर्थिक...

कैथल (जयपाल रसूलपुर) : कैथल में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला अदालत ने एक चर्चित रिश्वतखोरी मामले में सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने जिला पार्षद विक्रम और पार्षद प्रतिनिधि भारत ढुल को दोषी करार देते हुए दोनों को 7-7 साल की कठोर कारावास की सजा और आर्थिक दंड से दंडित किया है। फैसले के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। 

यह फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नंदिता कौशिक की अदालत द्वारा सुनाया गया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान विजिलेंस विभाग द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान और ट्रैप कार्रवाई को अहम आधार माना। अदालत ने साफ कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा रिश्वत लेना जनता के विश्वास के साथ धोखा है और ऐसे मामलों में कड़ी सजा आवश्यक है।

2024 का है मामला 

मामला जनवरी 2024 का है, जब विजिलेंस टीम को जिला परिषद के विकास कार्यों में ठेकेदार से 8% कमिशन मांगने की शिकायत मिली थी, दोनों आरोपियों ने ठेकेदार के बिल पास करवाने की एवज में एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायत की पुष्टि के बाद टीम ने जाल बिछाया और ट्रैप ऑपरेशन के दौरान दोनों आरोपियों को रंगे हाथ रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। मौके से नकदी भी बरामद की गई थी, जिसे सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने अपने फैसले में जिला पार्षद विक्रम को 7 साल की सजा के साथ एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उसे एक वर्ष की अतिरिक्त कारावास भुगतनी होगी। वहीं पार्षद प्रतिनिधि भारत ढुल को 7 साल की सजा और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना न देने पर उसे 6 महीने की अतिरिक्त सजा काटनी पड़ेगी।

फैसले के बाद विजिलेंस विभाग ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी सफलता बताया है। अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए भी कड़ा संदेश है कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्थानीय लोगों ने भी अदालत के फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि इससे प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी तथा जनता का भरोसा न्याय व्यवस्था पर और मजबूत होगा। यह फैसला निश्चित रूप से जिले में ईमानदार शासन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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