Edited By Manisha rana, Updated: 03 Feb, 2026 04:12 PM

हरियाणा के यमुनानगर की 100% दिव्यांग मोनिका शर्मा को 16 साल से नौकरी का इंतजार है। अब मोनिका ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी से मार्मिक अपील करते हुए उम्मीद जताई है कि वह अपनी हरियाणा की इस बेटी के लिए आवश्य...
यमुनानगर (सुरेंद्र मेहता) : हरियाणा के यमुनानगर की 100% दिव्यांग मोनिका शर्मा को 16 साल से नौकरी का इंतजार है। अब मोनिका ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी से मार्मिक अपील करते हुए उम्मीद जताई है कि वह अपनी हरियाणा की इस बेटी के लिए आवश्य कुछ करेंगे।
यमुनानगर शहर के कांसापुर स्थित रामनगर में साधारण परिवार में राजकुमार शर्मा के घर 28 जनवरी 1986 को जन्मी मोनिका शर्मा जब महज आठ वर्ष की थी तो उन्हें किसी गंभीर बीमारी ने घेर लिया। इसी बीमारी के चलते मोनिका शर्मा का पूरा शरीर पैरालाइज से ग्रस्त हो गया। जिससे उसके दोनों हाथ व दोनों पांव निष्प्राण हो गए और आवाज भी चली गई। जिससे मोनिका के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मोनिका के पिता राजकुमार प्राइवेट नौकरी करते हैं जिससे परिवार का गुजारा चलाना बड़ा मुश्किल है। मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मोनिका का बड़े अस्पतालों में महंगे से महंगा उपचार करवाया। करीब डेढ़ साल के बाद मोनिका की आवाज तो वापस लौट आई मगर उनका शरीर स्वस्थ नहीं हो सका।
मुंह को बनाया सफलता का मुकाम
आवाज लौटने के बाद मोनिका ने पढ़ाई जारी रखने का इरादा बनाया। मगर किसी भी स्कूल ने उन्हें यह कह कर दाखिला नहीं दिया कि लड़की के हाथ पांव तो चलते नहीं, पढ़ाई कैसे करेगी। बड़े प्रयासों के बावजूद उन्हें रामनगर स्थित राजकीय स्कूल में दाखिला मिल गया। जिसके बाद मोनिका ने मुंह से कलम पकड़कर सफलता की सीढिय़ां चढऩा शुरु किया। मोनिका ने पहले दसवीं और फिर वर्ष 2010 में स्नातक की परीक्षा पास की। लेकिन परिवार की आमदनी कम होने के कारण उन्हें आगे की पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
पेंटिंग कर जीते कई आवार्ड
मोनिका शर्मा पूर्ण दिव्यांग होने के बावजूद दिव्यांगता से पीडि़त लड़कियों के लिए प्रेरणा बनकर उभरी। पढ़ाई छोड़ने के बाद उन्होंने मुंह में ब्रश पकड़कर पेंटिंग करना शुरू किया। वह अपनी पेंटिंग के माध्यम से जहां पर्यावरण स्वच्छता का संदेश दे रही हैं, वहीं वह बेटी पढ़ाओ बेटी पढ़ाओ समेत अन्य ज्वलंत मुद्दों पर पेंटिंग बनाकर समाज को संदेश दे रही हैं। मोनिका की चित्रकारी की आज प्रदेश व देश भर में सराहना हो रही है। उनकी कई पेंटिंग को आर्ट गैलरियों में जहां स्थान मिला है, यही वजह है कि मोनिका को अब तक मानवता को समर्पित ह्युमैनिटी अचीवर आवार्ड-2018, कर्मयोगी पुरस्कार, 2020में डाक्टर सरोजनी नायडू अवार्ड, व वेद शंकुतला मेमोरियल आवार्ड-2019 सहित विभिन्न अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
दिव्यांग लड़कियों के लिए सरकार उठाए कदम
मोनिका शर्मा का कहना है कि दिव्यांग लड़कियां अपने जीवन से संघर्ष करती हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि दिव्यांगों के लिए कोई ठोस योजना बनाएं। ताकि वह सम्मान के साथ अपना जीवन यापन कर सकें और किसी की मोहताज बनकर रह सकें।मोनिका का कहना है कि सरकार ने दिव्यांग के लिए योजनाएं जरूर चलाएं हैं लेकिन धरातल पर उसका असर देखने को नहीं मिलता। सरकार ने उसके लिए कोई नौकरी का बंदोबस्त नहीं किया। इस समय वह दिमागी व आर्थिक रूप से परेशानी की हालत में है। मोनिका का कहना है कि वह अनाउंसर की नौकरी कर सकती हैं। वह चाहती है कि आर्थिक रूप से अपने परिवार पर और बोझ ना बने। उन्हें प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से उम्मीद है जो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के लिए हमेशा प्रयास करते नजर आते हैं।

उम्र के साथ बढ़ रही मोनिका की तकलीफें
जैसे-जसे उम्र बढ़ रही है वैसे-वैसे मोनिका की शारीरिक तकलीफ में भी बढ़ रही हैं। पहले वह जहां अपनी कमर को सपोर्ट देकर बैठकर कुछ काम कर लेती थी। वहीं इस समय उसकी रीड की हड्डी इस कदर मुड़ चुकी है कि बैठना भी संभव नहीं हो पाता। ऐसे में वह दूसरों पर निर्भर रहने लगी है। परिवार के सदस्यों की अपनी भी मजबूरियां हैं। उनके हेल्थ से संबंधित परेशानियां हैं। ऐसे में मोनिका को चाहिए किसी ऐसे अटेंडेंट की जो उसकी देखभाल कर सकें।
मोनिका के पिता राजकुमार का कहना है कि वह 66 वर्ष के हो चुके हैं अब वह मोनिका के भविष्य को लेकर चिंतित हैं उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से अपील की की हरियाणा की इस बेटी के लिए कुछ करें ताकि वह अपनी जिंदगी जी सके।
वहीं फिजियोथैरेपिस्ट डॉक्टर रिचा का कहना है कि मोनिका की वर्तमान एम आर आई देखने के बाद वह कह सकते हैं कि मोनिका को हर समय अटेंडेंट की जरूरत है, क्योंकि वह अपना कोई भी कार्य कर पाने में पूरी तरह असमर्थ है।
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