हरियाणा पुलिस मुख्यालय में करोड़ों के घोटाले में सब-इंस्पेक्टर गिरफ्तार,  ऐसे रचा गया पूरा खेल

Edited By Isha, Updated: 01 Feb, 2026 03:05 PM

sub inspector has been arrested in connection with a multi crore scam

हरियाणा पुलिस मुख्यालय में लंबे समय से तैनात रहे केयरटेकर रोहताश द्वारा किए करोड़ों के भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के मामले में स्टेट क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई करते हुए सब-इंस्पेक्टर विकास को गिरफ्तार किया है

पंचकूला:  हरियाणा पुलिस मुख्यालय में लंबे समय से तैनात रहे केयरटेकर रोहताश द्वारा किए करोड़ों के भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के मामले में स्टेट क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई करते हुए सब-इंस्पेक्टर विकास को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों के आदेश पर की गई विस्तृत जांच के बाद की गई है।

अज्ञात व्यक्ति ने मामले की शिकायत सीएम, डीजीपी, विजिलेंस व सीआईडी को भेजी थी। इसके बाद सेक्टर-7 थाना पुलिस ने 25 जुलाई 2025 में एक नाम-पता नामालूम शिकायतकर्ता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें आरोप था कि पुलिस मुख्यालय पंचकूला में असिस्टेंट के पद पर कार्यरत रहे रोहताश ने केयरटेकर रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया।

शिकायत के अनुसार रोहताश ने स्वयं या अपने किसी रिश्तेदार के नाम से आरएस इंटरप्राइजेज, सेक्टर-15 पंचकूला के नाम से एक फर्जी फर्म बनाई जिसका कोई वैध जीएसटी नंबर नहीं था। इस फर्म के नाम पर उसने करोड़ों के फर्जी बिल तैयार कर सरकारी भुगतान मंजूर करवाए। शिकायत में बताया है कि आरोपी स्वयं ही फर्जी कोटेशन तैयार करता था और अपनी ही फर्म का रेट सबसे कम दिखाकर भुगतान पास करवाता था। इतना ही नहीं एक ही अनुमति पत्र की फोटोकॉपी का बार-बार इस्तेमाल कर कई-कई बार भुगतान निकलवाया गया। आरोप है कि अप्रैल 2020 से दिसंबर 2020 के बीच करीब 25 करोड़ रुपये तथा जनवरी 2021 से अगस्त 2021 तक लगभग 50 करोड़ रुपये के बिल ड्रॉ करवाए गए जिनमें से अधिकांश फर्जी बताए जा रहे हैं।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी स्टेट क्राइम ब्रांच मुख्यालय के आदेश पर विस्तृत जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर पंचकूला पुलिस ने मामला दर्ज किया। इसके बाद स्टेट क्राइम ब्रांच ने केस में सब-इंस्पेक्टर विकास को गिरफ्तार किया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जो कर्मचारी रोहताश के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का प्रयास करता था उसका दूर-दराज तबादला करवा दिया जाता था जिससे विभाग में डर का माहौल बना रहा। इसी कारण अब तक कोई खुलकर सामने नहीं आया। पुलिस मामले में वित्तीय रिकॉर्ड, कंप्यूटर डेटा और बैंक लेनदेन की गहन जांच की जा रही है।
 


 

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