प्रशासन का ‘चाणक्य’, संवेदनाओं का कवि राजेश खुल्लर का अद्वितीय सफर, हरियाणा के विकास की रणनीति के पीछे की सोच

Edited By Krishan Rana, Updated: 05 Apr, 2026 07:33 PM

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हरियाणा के प्रशासनिक परिदृश्य में यदि किसी एक अधिकारी का नाम रणनीतिक कुशलता, संवेदनशीलता और संतुलित नेतृत्व के

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी):  हरियाणा के प्रशासनिक परिदृश्य में यदि किसी एक अधिकारी का नाम रणनीतिक कुशलता, संवेदनशीलता और संतुलित नेतृत्व के लिए लिया जाता है, तो वह नाम है राजेश खुल्लर। चीफ प्रिंसिपल सेक्रेट्री के रूप में उनकी भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि नीति निर्माण, राजनीतिक समन्वय और सामाजिक दृष्टिकोण के समावेश की भी रही है।

उनका व्यक्तित्व इस बात का उदाहरण है कि एक प्रशासक केवल नियमों का पालन करने वाला अधिकारी नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं को समझने वाला मार्गदर्शक भी हो सकता है। हाल ही में उन्होंने प्रख्यात साहित्यकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय की प्रसिद्ध कविता “तुम मेरे प्राण में हो” का प्रतिउत्तर लिखकर यह साबित कर दिया कि उनके भीतर एक गहन संवेदनशील कवि भी जीवित है।

नीतियों के शिल्पकार, हरियाणा के विकास की रणनीति के पीछे की सोच

राजेश खुल्लर का प्रशासनिक करियर बहुआयामी और प्रभावशाली रहा है। उन्होंने हरियाणा और केंद्र सरकार में अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए नीति निर्माण और क्रियान्वयन में निर्णायक भूमिका निभाई।
रोहतक और सोनीपत के उपायुक्त से लेकर गुरुग्राम और फरीदाबाद के नगर निगम आयुक्त तक, उन्होंने जमीनी स्तर पर प्रशासन को समझा और उसे प्रभावी बनाया। केंद्रीय वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में उन्होंने आर्थिक नीतियों के निर्माण में योगदान दिया, वहीं विश्व बैंक, वाशिंगटन डीसी में कार्यकारी निदेशक के रूप में वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।

हरियाणा में मुख्यमंत्री राजेश खुल्लर के प्रधान सचिव के रूप में उनका कार्यकाल प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। इसी दौरान उन्हें “चाणक्य” की संज्ञा दी गई। वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कार्यकाल में भी उनकी भूमिका उतनी ही प्रभावशाली बनी हुई है।

हरियाणा सरकार में मुख्यमंत्री के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजेश खुल्लर केवल एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भर नहीं हैं, बल्कि वे प्रशासन, नीति-निर्माण, संवेदनशीलता और समय प्रबंधन का ऐसा उदाहरण हैं, जिसकी मिसाल कम ही देखने को मिलती है। सत्ता के सबसे व्यस्त गलियारों में सक्रिय रहने के बावजूद वे अपने भीतर के साहित्यकार को जीवित रखते हैं। बेहद व्यस्त कार्यशैली के बीच से समय निकालकर कविताएं लिखना और जीवन को गहराई से देखना, उनके व्यक्तित्व का वह पक्ष है जो उन्हें एक सामान्य नौकरशाह से अलग पहचान देता है।

करीब 35 वर्षों के प्रशासनिक अनुभव में हरियाणा के भीतर अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके राजेश खुल्लर ने न केवल शासन-प्रशासन की जटिलताओं को बेहद करीब से समझा है, बल्कि समाज के दर्द, बदलाव की जरूरत और मानवीय सरोकारों को भी गहराई से महसूस किया है। यही कारण है कि उन्हें एक संवेदनशील, संतुलित और दूरदर्शी प्रशासक के रूप में देखा जाता है। 24 घंटे का सबसे बेहतर इस्तेमाल कैसे किया जाए, यह राजेश खुल्लर से सीखा जा सकता है

हर व्यक्ति के पास दिन में 24 घंटे ही होते हैं, लेकिन इन 24 घंटों का सर्वश्रेष्ठ उपयोग कैसे किया जाए, यह बात राजेश खुल्लर की जीवनशैली को देखकर समझी जा सकती है। उनकी कार्यशैली, अनुशासन, अध्ययनशीलता और रचनात्मकता यह साबित करती है कि समय का सही उपयोग ही किसी व्यक्ति को असाधारण बनाता है। राजेश खुल्लर ने अपने प्रशासनिक जीवन के अनुभवों को केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें साहित्य में भी रूपांतरित किया।

उन्होंने ‘वायरल सत्य’ नामक एक उपन्यास भी लिखा। यह रचना उस आत्ममंथन का परिणाम मानी जाती है, जो उन्हें हरियाणा में एचआईवी प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में कार्य करने के बाद हुआ। उस दौरान उन्हें लगा कि उस पद पर रहते हुए वे समाज के लिए और बहुत कुछ कर सकते थे। यही बेचैनी आगे चलकर साहित्यिक अभिव्यक्ति में बदल गई।

1992: जब एक युवा आईएएस अधिकारी ने बेटी बचाने की दिशा में सोच बदली

राजेश खुल्लर के प्रशासनिक जीवन की सबसे उल्लेखनीय शुरुआती उपलब्धियों में से एक वर्ष 1992 से जुड़ी है। उस समय वे बतौर आईएएस अधिकारी अपेक्षाकृत युवा थे और एडीसी पानीपत के रूप में कार्यरत थे। हरियाणा में उस दौर में भ्रूण हत्या एक गंभीर सामाजिक चुनौती बनती जा रही थी। जगह-जगह ऐसे बोर्ड दिखाई देते थे जिन पर लिखा होता था — “लड़का या लड़की, परीक्षण करवाएं”।
एक संवेदनशील अधिकारी के रूप में यह दृश्य उन्हें भीतर तक विचलित करता था।
तब, मात्र लगभग छह वर्ष के प्रशासनिक अनुभव के साथ, राजेश खुल्लर ने एक ऐसी नीति की रूपरेखा तैयार की, जिसने आगे चलकर हरियाणा की सामाजिक सोच पर गहरा असर डाला। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री को पहली बार एक नीति बनाकर दी ।

‘अपनी बेटी अपना धन’
यह केवल एक सरकारी योजना नहीं थी, बल्कि बेटियों के प्रति समाज के नजरिए को बदलने की दिशा में एक गंभीर और साहसिक प्रशासनिक पहल थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इस नीति को न केवल पसंद किया, बल्कि इसे हरियाणा में लागू भी किया।
विशेष बात यह रही कि उस समय तक केंद्र सरकार द्वारा पीएनडीटी एक्ट भी लागू नहीं किया गया था। ऐसे दौर में बेटियों को सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक स्वीकार्यता देने के उद्देश्य से इस नीति का बनना, राजेश खुल्लर की सामाजिक संवेदनशीलता और नीति-दृष्टि का बड़ा प्रमाण माना जाता है। जब हरियाणा में ‘अपनी बेटी अपना धन’ योजना लागू हुई, उस समय राजेश खुल्लर एडीसी गुरुग्राम के रूप में कार्यरत थे।

अंबाला से आईएएस तक: मेहनत, मेधा और अनुशासन की यात्रा

राजेश खुल्लर मूल रूप से अंबाला के रहने वाले हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा भी अंबाला में ही हुई। शैक्षणिक रूप से वे हमेशा गंभीर और मेधावी रहे। उन्होंने एमएससी फिजिक्स की पढ़ाई की और इसके बाद संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर आईएएस अधिकारी बने।
अब तक के अपने प्रशासनिक जीवन में वे लगभग 30 अलग-अलग पदों पर कार्य कर चुके हैं। इतने विविध और महत्वपूर्ण दायित्वों का अनुभव किसी भी अधिकारी को प्रशासन की गहराई और समाज की नब्ज दोनों समझने में मदद करता है — और यही बात राजेश खुल्लर के व्यक्तित्व में साफ दिखाई देती है।

मानव जीवन को सरल शब्दों में समझने वाले प्रशासक
राजेश खुल्लर की सोच केवल प्रशासनिक फाइलों तक सीमित नहीं है। वे मानव जीवन, उसके चरणों और उसकी आंतरिक यात्रा को भी बेहद सरल और सहज शब्दों में समझते हैं। वे बचपन से लेकर वरिष्ठ नागरिक अवस्था तक के जीवन को कोतूहल, जिज्ञासा, उत्सुकता, परीक्षण, मिमांसा, अन्वेषण और मननशीलता जैसे चरणों में देखने का दृष्टिकोण रखते हैं। यही कारण है कि वे केवल एक ‘ऑफिसर’ नहीं, बल्कि एक विचारशील व्यक्तित्व के रूप में भी पहचाने जाते हैं।

सोशल मीडिया से दूरी, काम से निकटता
आज के दौर में जहां अधिकांश अधिकारी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय रहते हैं, वहीं राजेश खुल्लर इस मामले में बिल्कुल अलग हैं। वे केवल व्हाट्सएप का ही उपयोग करते हैं। इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से वे दूरी बनाए रखते हैं। उनका मानना है कि यदि सोशल मीडिया का उपयोग हो, तो वह केवल नागरिकों को त्वरित सेवा देने और प्रशासन को अधिक उत्तरदायी बनाने के लिए होना चाहिए। उनकी कार्यशैली शुरू से ऐसी रही है कि उनके पास किसी काम से पहुंचने वाला व्यक्ति यह महसूस करता है कि उसकी बात सुनी जाएगी। हरियाणा के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में उनकी यह छवि लंबे समय से बनी हुई है कि वे लोगों को निराश लौटाने वालों में नहीं हैं।

नायब सैनी सरकार में फिर सबसे अहम भूमिका

हरियाणा की सत्ता के गलियारों में यदि किसी अफसर को सबसे अधिक प्रभावशाली, रणनीतिक और भरोसेमंद माना जाता है, तो वह नाम है राजेश खुल्लर।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार के दूसरे कार्यकाल में भी वे चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी के रूप में बेहद अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इससे पहले वे सैनी सरकार के पहले कार्यकाल और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के दूसरे कार्यकाल में भी इसी भूमिका में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। हरियाणा की राजनीति और प्रशासन को करीब से जानने वाले लोगों का मानना है कि मनोहर लाल खट्टर के लिए जिस तरह राजेश खुल्लर ने ‘चाणक्य’ की भूमिका निभाई, उसी तरह 13 मार्च 2024 के बाद से वे नायब सिंह सैनी के लिए भी सत्ता संचालन के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार के रूप में उभरे हैं।

सीएमओ की धुरी, सरकार की गति के सूत्रधार

राजेश खुल्लर को केवल एक वरिष्ठ नौकरशाह कहना उनके योगदान को छोटा कर देना होगा। वे मुख्यमंत्री कार्यालय यानी CMO की कार्यशैली के केंद्रीय स्तंभ माने जाते हैं। सरकार के भीतर मंत्रियों, विधायकों, चेयरमैनों और संगठन से जुड़े नेताओं के साथ समन्वय स्थापित करने में उनकी विशेष दक्षता रही है। यही वजह है कि सत्ता पक्ष ही नहीं, विपक्ष के कई नेता भी यह मानते हैं कि खुल्लर की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे संवाद का रास्ता कभी बंद नहीं होने देते।
प्रशासनिक निर्णयों में उनकी तेजी, संतुलन और संवेदनशीलता ने कई बार सरकार को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकालने में बड़ी भूमिका निभाई है। वे पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले अधिकारी माने जाते हैं, लेकिन उनके निर्णयों और हस्तक्षेप का असर अक्सर सत्ता के केंद्र तक साफ दिखाई देता है।

मनोहर सरकार के सबसे भरोसेमंद अफसरों में रहे शामिल

राजेश खुल्लर लंबे समय तक पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल की भरोसेमंद टीम का सबसे अहम हिस्सा रहे। प्रधान सचिव और बाद में मुख्य प्रधान सचिव के रूप में उन्होंने न केवल प्रशासनिक मशीनरी को धार दी, बल्कि सरकार और संगठन के बीच संवाद को भी सहज बनाए रखा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हरियाणा की सत्ता संरचना, राजनीतिक दलों के स्वभाव और नेताओं के टेंपरामेंट को समझने में खुल्लर की पकड़ बेहद मजबूत रही है।

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