सड़क हादसों पर लगाम लगाने की तैयारी,  हाईवे पर बेसहारा पशुओं का खतरा होगा कम... जानें क्या है सरकार का प्लान

Edited By Isha, Updated: 17 Aug, 2026 08:45 PM

the danger of stray animals on the highway will be reduced

हरियाणा में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर बेसहारा पशुओं के कारण वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) ने व्यापक निगरानी तंत्र तैयार किया है। विभाग ने सड़क और किलोमीटर

चंडीगढ़(चन्द्र शेखर धरणी):  हरियाणा में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर बेसहारा पशुओं के कारण वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) ने व्यापक निगरानी तंत्र तैयार किया है। विभाग ने सड़क और किलोमीटर के हिसाब से उन हिस्सों की पहचान की है, जहां बेसहारा पशुओं की मौजूदगी से हादसों का खतरा अधिक रहता है। इन स्थानों पर निगरानी के लिए उपमंडल अभियंता स्तर के नोडल अधिकारी नियुक्त करने के साथ कनिष्ठ अभियंता और फील्ड कर्मचारियों की गश्ती टीमें भी तय की गई हैं।

सड़क के साथ कारण भी दर्ज, जिम्मेदारी भी तय
विभाग की तैयार सूची महज संवेदनशील स्थानों की पहचान तक सीमित नहीं है। इसमें सड़क का नाम, उसकी श्रेणी, लंबाई, पशुओं की मौजूदगी वाला किलोमीटर, नोडल अधिकारी, कनिष्ठ अभियंता तथा पर्यवेक्षक या मेट का नाम और मोबाइल नंबर तक दर्ज किया गया है। कई स्थानों पर यह भी बताया गया है कि आखिर बेसहारा पशु सड़क पर क्यों पहुंचते हैं।
इस व्यवस्था से राजमार्गों पर पशुओं से जुड़े खतरे की निगरानी अधिक व्यवस्थित होने के साथ संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी। किसी चिन्हित स्थान पर बार-बार पशु सड़क पर आते हैं तो स्थानीय स्तर पर कार्रवाई और निगरानी की जवाबदेही तय की जा सकेगी।

नूंह में फल, बिरयानी की दुकानें बनीं पशुओं के जमाव की वजह
गुरुग्राम सर्किल के अंतर्गत गुरुग्राम-अलवर राष्ट्रीय राजमार्ग-248ए के कई हिस्सों को संवेदनशील माना गया है। नूंह शहर के एक हिस्से को लेकर विभाग ने विशेष टिप्पणी दर्ज की है। यहां कई स्थानों पर फल और बिरयानी की बिक्री के कारण बेसहारा पशुओं तथा कुत्तों के सड़क पर आने की बात कही गई है।
इसी मार्ग पर एक तालाब के आसपास भी पशुओं की मौजूदगी दर्ज की गई है। फिरोजपुर झिरका में सब्जी मंडी के बाहर पशुओं के खड़े होने की समस्या बताई गई है। दोहा चौक पर बिरयानी की बिक्री के कारण आवारा कुत्तों के जमा होने का उल्लेख है। वहीं नूंह-पलवल राज्य राजमार्ग-13 के किलोमीटर 2 से 15.75 तक के हिस्से के लिए भी निगरानी टीम निर्धारित की गई है।

मंडी से गोशाला तक चिन्हित किए गए संवेदनशील स्थान
रोहतक-भिवानी-लोहारू राष्ट्रीय राजमार्ग-709ई पर भी विभाग ने कई स्थानों की पहचान की है। लाहली गांव के पास पशु आहार की दुकान और गोशाला के बाहर पशुओं की मौजूदगी दर्ज की गई है। कलानौर में सब्जी मंडी, होटल, सब्जी की दुकानों और फलों की रेहड़ियों को पशुओं के सड़क पर आने से जोड़ा गया है।

भिवानी शहर में किलोमीटर 118 से 118.300 के बीच सब्जी मंडी के बाहर बेसहारा पशुओं की मौजूदगी दर्ज है। किलोमीटर 118.900 से 119.500 के बीच पशु आहार की दुकान और 120.950 से 121 किलोमीटर के पास गोशाला को पशुओं के सड़क किनारे आने की वजह बताया गया है।

लोहानी, जुई, ढिगावा और लोहारू में भी सब्जी व फल विक्रेताओं के आसपास पशुओं और कुत्तों के जमा होने वाले हिस्सों को चिन्हित किया गया है। लोहारू में राजमार्ग के समीप स्थित गोशाला के पास का हिस्सा भी निगरानी सूची में शामिल है।

हिसार से सिरसा तक कई प्रमुख मार्ग निगरानी में
हिसार सर्किल के तहत हिसार, हांसी, फतेहाबाद और सिरसा के कई प्रमुख मार्गों को सूची में शामिल किया गया है। जींद-बरवाला-अग्रोहा-आदमपुर रोड और करनाल-असंध-जींद-हांसी-तोशाम-सोड़ीवास रोड के विभिन्न हिस्सों पर निगरानी तय की गई है।
फतेहाबाद में बुधलाडा-रतिया-फतेहाबाद-भट्टू से राज्य सीमा तक जाने वाले एसएच-21 तथा सुरेवाला चौक-उकलाना-भूना-फतेहाबाद एसएच-2 के हिस्सों के लिए अलग-अलग नोडल अधिकारी और फील्ड कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। सिरसा में सरदूलगढ़-सिरसा-ऐलनाबाद मार्ग के किलोमीटर 68 से 70.76 और सिरसा-ओट्टू-रानियां-डबवाली मार्ग के किलोमीटर 18.50 से 20.60 को भी चिन्हित किया गया है।

कैथल और जींद के कई मार्गों पर भी निगरानी
कैथल सर्किल में मेरठ-सोनीपत-गोहाना-असंध-कैथल-पटियाला रोड और कुंजपुरा-करनाल-कैथल-खनौरी रोड समेत कई प्रमुख मार्ग सूची में हैं। करनाल-कौल-पिहोवा-पटियाला तथा नीलोखेड़ी-करसा-ढांड रोड के हिस्सों के लिए भी नोडल अधिकारी और गश्ती कर्मचारी तय किए गए हैं।
जींद में जींद-सफीदों, जींद-भिवानी, जींद-हांसी और जींद-बरवाला रोड के संवेदनशील हिस्सों की निगरानी के लिए भी जिम्मेदारी निर्धारित की गई है।

पंचकूला में पिंजौर बाईपास भी सूची में
पंचकूला जिले में एनएच-105 के चार लेन वाले पिंजौर बाईपास पर किलोमीटर 5.80 से 5.98 तक का हिस्सा चिन्हित किया गया है। पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ मार्ग पर किलोमीटर 0.15 से 0.55 तथा जगाधरी बिलासपुर-सढौरा-नारायणगढ़-रायपुररानी मार्ग पर किलोमीटर 61 से 63.5 तक का हिस्सा भी निगरानी के दायरे में है। यमुनानगर के जगाधरी-बिलासपुर रोड पर विभाग ने यह भी दर्ज किया है कि कुछ स्थानों पर पशु अचानक सड़क पार करते हैं, जिससे वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।

झज्जर के कई हिस्सों में खतरा नहीं, ‘Nil’ दर्ज
विभागीय सूची की एक खास बात यह भी है कि इसमें हर सड़क को संवेदनशील नहीं माना गया है। झज्जर-सुबाना-कोसली, झज्जर-फर्रुखनगर और झज्जर-बहादुरगढ़ सहित कई हिस्सों के सामने ‘Nil’ दर्ज किया गया है। इससे स्पष्ट है कि विभाग ने राजमार्गों की वास्तविक स्थिति के आधार पर जोखिम वाले हिस्सों की पहचान करने का प्रयास किया है। जहां समस्या नहीं है, वहां भी स्थिति को रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।

जोखिम-मैपिंग के साथ अब फील्ड स्तर पर जवाबदेही
बेसहारा पशुओं की समस्या को लेकर तैयार यह सूची प्रदेश के राजमार्गों की एक तरह से जोखिम-मैपिंग और जवाबदेही व्यवस्था बनकर सामने आई है। संवेदनशील किलोमीटर की पहचान के साथ अधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों के नाम तथा संपर्क नंबर दर्ज होने से निगरानी तंत्र को अधिक जवाबदेह बनाया गया है।

इसका उद्देश्य केवल पशुओं को सड़क से हटाना नहीं, बल्कि उन कारणों की पहचान करना भी है जिनकी वजह से वे बार-बार राजमार्गों पर पहुंचते हैं। मंडियों, फल-सब्जी की दुकानों, पशु आहार केंद्रों, होटलों और गोशालाओं के आसपास विशेष निगरानी से समस्या के मूल कारणों पर भी काम किया जा सकता है। इससे राजमार्गों पर वाहन चालकों की सुरक्षा बढ़ाने और हादसों के जोखिम को कम करने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर अधिक प्रभावी कार्रवाई का आधार तैयार होगा।

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