Edited By Krishan Rana, Updated: 20 Aug, 2026 06:46 PM
हरियाणा में युवाओं को रोजगार देने का मुद्दा एक बार फिर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस के बीच राजनीतिक
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा में युवाओं को रोजगार देने का मुद्दा एक बार फिर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है। हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों, युवाओं की नौकरी की सुरक्षा, आरक्षण और भर्ती प्रक्रिया को लेकर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
कांग्रेस द्वारा बुधवार को पंचकूला स्थित HKRN कार्यालय का घेराव किए जाने के बाद भाजपा ने गुरुवार को सोशल मीडिया के जरिए कांग्रेस पर जोरदार पलटवार किया।
भाजपा ने कांग्रेस पर प्रदेश में ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस व्यवस्था के खिलाफ आज कांग्रेस आंदोलन कर रही है, उसकी नींव उसी के शासनकाल में रखी गई थी। पार्टी नेताओं और विधायकों ने सोशल मीडिया पर अलग-अलग पोस्ट के माध्यम से कांग्रेस के पुराने शासन और वर्तमान एचकेआरएन व्यवस्था की तुलना करते हुए युवाओं के रोजगार के मुद्दे पर विपक्ष को घेरने का प्रयास किया।
भाजपा का आरोप- कांग्रेस के शासन में सिफारिश और ठेकेदारी हावी रही
भाजपा की ओर से जारी राजनीतिक हमले का मुख्य आधार ठेकेदारी प्रथा रहा। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस और इनेलो के शासनकाल में सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की सेवाएं ठेकेदारों के माध्यम से ली जाती थीं। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था में युवाओं की मेहनत की कमाई में कटौती होती थी और डीसी रेट के नाम पर भी वेतन संबंधी विसंगतियां बनी रहती थीं।
भाजपा ने सवाल उठाया कि जब ठेकेदारों के माध्यम से नियुक्तियां की जाती थीं, उस समय मेरिट, आरक्षण और पारदर्शिता को लेकर कांग्रेस ने क्या कदम उठाए। पार्टी का तर्क है कि अब जब एचकेआरएन के माध्यम से नियुक्तियों की प्रक्रिया को संस्थागत स्वरूप दिया गया है तो कांग्रेस इसका विरोध कर रही है।
हालांकि कांग्रेस का जोर इस बात पर है कि एचकेआरएन के माध्यम से लगे कर्मचारियों को रोजगार की स्थायी सुरक्षा मिले तथा भर्ती प्रक्रिया में सामाजिक न्याय और आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो।
मनोहर लाल सरकार के समय हुई HKRN की शुरुआत
भाजपा ने अपने पक्ष में HKRN की स्थापना की समयरेखा भी सामने रखी है। पार्टी के अनुसार, ठेकेदारी व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस दिशा में पहल की। 13 अक्टूबर 2021 को हरियाणा कौशल रोजगार निगम का पंजीकरण हुआ और 1 नवंबर 2021 को इसका पोर्टल लॉन्च किया गया।
इसके बाद बड़ी संख्या में युवाओं ने पोर्टल पर पंजीकरण कराया। सरकार की ओर से इसे सरकारी विभागों में मानव संसाधन की जरूरत पूरी करने के साथ-साथ युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया गया।
भाजपा का कहना है कि एचकेआरएन के माध्यम से पारंपरिक ठेकेदारी व्यवस्था को हटाकर एक केंद्रीकृत प्रणाली विकसित की गई, जिसमें पात्रता और उपलब्ध पदों के आधार पर युवाओं को रोजगार देने का प्रयास किया जा रहा है।
नायब सैनी सरकार के सामने अब जॉब सिक्योरिटी की चुनौती
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के सामने अब एचकेआरएन कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है। कांग्रेस के आंदोलन के बाद सरकार पर यह दबाव बढ़ा है कि एचकेआरएन के माध्यम से कार्यरत युवाओं को रोजगार की स्थिरता और भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति दी जाए।
भाजपा का कहना है कि सरकार एचकेआरएन कर्मचारियों की जॉब सिक्योरिटी और रोजगार व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। राजनीतिक रूप से यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हरियाणा में सरकारी नौकरी युवाओं के लिए लंबे समय से बड़ा चुनावी और सामाजिक मुद्दा रही है।
आरक्षण और मेरिट पर भी राजनीतिक बहस तेज
एचकेआरएन को लेकर छिड़ी बहस में आरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया है। भाजपा का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में पात्रता, सत्यापन और मेरिट को महत्व दिया जा रहा है। पार्टी के अनुसार, पीपीपी के माध्यम से सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि नियमित सरकारी भर्तियों में संवैधानिक आरक्षण व्यवस्था लागू है।
भाजपा ने कांग्रेस से सवाल किया कि जब नियुक्तियां ठेकेदारों के जरिए होती थीं, तब आरक्षण और पारदर्शिता की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी। पार्टी ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें सिफारिश और शोषण की जगह मेरिट, पारदर्शिता, सम्मान और रोजगार की सुरक्षा हो।
वहीं कांग्रेस की राजनीति का केंद्र यह है कि रोजगार के नाम पर युवाओं को लंबे समय तक अस्थायी व्यवस्था में नहीं रखा जा सकता। ऐसे में एचकेआरएन अब केवल कर्मचारियों से जुड़ा प्रशासनिक विषय नहीं रह गया है, बल्कि दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
रोजगार मेलों और सीईटी को लेकर भाजपा ने गिनाए आंकड़े
भाजपा के एक विधायक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार की रोजगार संबंधी योजनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि आने वाले समय में 1,150 रोजगार मेले आयोजित किए जाएंगे। इनमें 44,500 प्लेसमेंट का लक्ष्य निर्धारित किए जाने की बात कही गई है।
इसके साथ ही दावा किया गया कि इन प्रयासों से करीब 1 लाख 61 हजार युवाओं को रोजगार का लाभ मिल सकेगा। विधायक ने यह भी कहा कि सीईटी पास युवाओं को जल्द 9,000 रुपये मासिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।
इन आंकड़ों के जरिए भाजपा यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि सरकार का फोकस केवल एचकेआरएन तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार मेलों, कौशल विकास और सीईटी जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते तैयार किए जा रहे हैं।
आने वाले दिनों में और गरमाएगा रोजगार का मुद्दा
हरियाणा में रोजगार का मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप से और गरमाने के आसार हैं। कांग्रेस एचकेआरएन कर्मचारियों की समस्याओं, रोजगार की स्थिरता और आरक्षण के मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ सकती है। दूसरी ओर भाजपा कांग्रेस के पुराने शासनकाल की ठेकेदारी व्यवस्था को मुद्दा बनाकर विपक्ष के आंदोलन की राजनीतिक काट तैयार कर रही है।
ऐसे में HKRN केवल सरकारी नियुक्तियों की व्यवस्था नहीं, बल्कि हरियाणा की रोजगार राजनीति का नया केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। एक तरफ कांग्रेस युवाओं के रोजगार और सुरक्षा को लेकर सरकार को घेर रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा अपनी मौजूदा व्यवस्था को पारदर्शिता और मेरिट आधारित बताते हुए कांग्रेस के शासनकाल पर सवाल उठा रही है। अब असली राजनीतिक परीक्षा इस बात की होगी कि सरकार एचकेआरएन कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा और युवाओं की रोजगार संबंधी अपेक्षाओं को किस तरह पूरा करती है।
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