Edited By Isha, Updated: 21 Aug, 2026 08:58 AM

हरियाणा के सरकारी मैडीकल कालेजों में असिस्टैंट प्रोफैसर की भर्ती प्रक्रिया के बीच इंटरव्यू के लिए न्यूनतम अंक निर्धारित करना हरियाणा लोक सेवा आयोग (एच.पी.एस.सी.) को भारी पड़ा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
चंडीगढ़: हरियाणा के सरकारी मैडीकल कालेजों में असिस्टैंट प्रोफैसर की भर्ती प्रक्रिया के बीच इंटरव्यू के लिए न्यूनतम अंक निर्धारित करना हरियाणा लोक सेवा आयोग (एच.पी.एस.सी.) को भारी पड़ा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आयोग की ओर से 13 दिसम्बर 2022 को जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए इंटरव्यू में 50 प्रतिशत और आरक्षित वर्गों के लिए 45 प्रतिशत न्यूनतम अंक अनिवार्य किए गए थे। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने डाक्टर सुरेंद्र सिंह सहित 4 याचिकाओं का निपटारा करते हुए एच.पी.एस.सी. को मूल विज्ञापन में निर्धारित मानदंड के आधार पर चयन प्रक्रिया नए सिरे से पूरी करने का निर्देश दिया है। मामला हरियाणा के सरकारी मैडीकल कालेजों में नियमित आधार पर टीचिंग फैकल्टी के 189 पदों की भर्ती से जुड़ा है।
चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान महानिदेशक, हरियाणा ने 31 मई 2022 को विज्ञापन जारी किया था। इसमें चयन + के लिए 75 अंक पूर्व-निर्धारित शैक्षणिक मानदंडों के आधार पर और 25 अंक इंटरव्यू के लिए रखे गए थे। इसके बाद 13 दिसम्बर 2022 को एच.पी.एस.सी. ने इंटरव्यू में न्यूनतम अंक की नई शर्त लागू कर दी। सामान्य वर्ग के लिए 50 और सभी आरक्षित वर्गों के लिए 45 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि विज्ञापन में इंटरव्यू के लिए न्यूनतम अंकों की कोई शर्त नहीं थी और चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद नया मानदंड जोड़ कर नियम बदल दिए गए।
कोर्ट ने कहा कि चयन योजना नियोक्ता यानी चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान महानिदेशक ने तय की थी। इसमें 75 अंक पूर्व-निर्धारित मानदंड और 25 अंक इंटरव्यू के लिए थे। एच.पी.एस.सी. को केवल इंटरव्यू करवाने की जिम्मेदारी दी गई थी और उसे चयन के मूल मानदंड में बदलाव करने का अधिकार नहीं था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इंटरव्यू में न्यूनतम अंक निर्धारित करना महज कटऑफ तय करना नहीं था, बल्कि इससे उम्मीदवारों की पात्रता प्रभावित हुई और 75 अंकों वाले शैक्षिक मूल्यांकन का महत्व भी कम हो गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया के किसी चरण के लिए नया मानदंड तय करना हो तो उसे प्रक्रिया शुरू होने से पहले निर्धारित करना जरूरी है। कोर्ट ने एच.पी.एस.सी. के फैसले के समय पर भी सवाल उठाया। 13 दिसम्बर को न्यूनतम अंक तय किए गए, जबकि इंटरव्यू 19 और 20 दिसम्बर को होने थे। उस समय आयोग को पहले से पता था कि कौन-कौन से उम्मीदवार इंटरव्यू के लिए चयनित हैं। कोर्ट ने कहा कि इस तरह चयन प्रक्रिया में बदलाव करने से आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर संदेह पैदा होता है और टिप्पणी की कि राज्य की भर्ती एजैंसी होने के नाते एच.पी.एस.सी. अपनी विश्वसनीयता पत्नी संदेह से परे होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने 13 दिसम्बर 2022 का आदेश रद्द करते हुए 23 दिसम्बर 2022 के परिणाम को भी उन उम्मीदवारों की सीमा तक रद्द कर दिया, जिन्हें इंटरव्यू में न्यूनतम अंक न मिलने के कारण बाहर किया गया था। एच.पी.एस.सी. को मूल विज्ञापन के अनुसार कुल 100 अंकों के आधार पर चयन प्रक्रिया नए सिरे से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें 75 अंक शैक्षणिक एवं पूर्व-निर्धारित मानदंडों और 25 अंक इंटरव्यू के होंगे तथा इंटरव्यू में कोई न्यूनतम कटऑफ लागू नहीं होगा। सफल और पात्र पाए जाने वाले उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी करने के भी निर्देश दिए गए हैं।