हरियाणा के सभी विभागों के अधीक्षकों को मिलना चाहिए समान वेतन का लाभ, हाईकोर्ट ने लिया बड़ा फैसला

Edited By Manisha rana, Updated: 25 Apr, 2026 01:39 PM

superintendents of all departments in haryana should get the benefit equal pay

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के कर्मचारियों के लिए बड़ा -फैसला सुनाते हुए राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत सुपरिंटैंडैंट्स (अधीक्षक) के साथ वेतन में किए गए भेदभाव को असंवैधानिक ठहराया है।

चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के कर्मचारियों के लिए बड़ा -फैसला सुनाते हुए राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत सुपरिंटैंडैंट्स (अधीक्षक) के साथ वेतन में किए गए भेदभाव को असंवैधानिक ठहराया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि समान पद पर कार्यरत कर्मचारियों के साथ अलग-अलग वेतनमान का व्यवहार समान काम के लिए समान वेतन के सिद्धांत का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ताओं ने 15 अक्तूबर 2018 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसके जरिए सरकार ने उन्हें उच्च ग्रेड पे (4800 और 5400) देने से इंकार कर दिया था। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि 2 जुलाई 2009 से उन्हें भी वही लाभ दिए जाएं जो हरियाणा सिविल सचिवालय, एफ.सी.आर., राज्यपाल भवन, एच.पी.एस.सी., विधानसभा और लीगल रिमैंबरैंसर कार्यालयों में तैनात अधीक्षकों को दिए गए। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि 1982 में राज्य सरकार ने कार्यालयों की क्लास ए, बी और सी की श्रेणी समाप्त कर दी थी। इसके बाद सभी अधीक्षकों को एक समान ग्रुप बी गजटेड अधिकारी माना गया और वर्षों तक सभी को समान वेतनमान मिलता रहा। 

याची ने कहा कि 2009 में अचानक कुछ कार्यालयों के अधीक्षकों को ज्यादा ग्रेड पे देना भेदभावपूर्ण है। उनका तर्क था कि जब कार्य, जिम्मेदारी और पद समान हैं तो वेतन में अंतर नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि सचिवालय व अन्य प्रमुख कार्यालयों में काम करने वाले अधीक्षकों का कार्य अधिक संवेदनशील और नीति-निर्माण से जुड़ा होता है।

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