Edited By Krishan Rana, Updated: 10 Jun, 2026 08:15 PM

दिल्ली और आसपास के राज्यों के करोड़ों लोगों के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की सीमाओं से जुड़ी एक बेहद
हरियाणा डेस्क : दिल्ली और आसपास के राज्यों के करोड़ों लोगों के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की सीमाओं से जुड़ी एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। हरियाणा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का दायरा अब बहुत जल्द बड़े स्तर पर सिकुड़ने वाला है। आगामी 16 जून को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (एनसीआरपीबी) की एक अहम बैठक होने जा रही है। यहां करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी जिलों का बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से बाहर हो सकता है।
दरअसल, केंद्र सरकार और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड रीजनल प्लान-2041 के तहत एनसीआर की सीमाओं की समीक्षा कर रहे हैं। प्रस्ताव के अनुसार, एनसीआर की सीमा दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर के दायरे तक सीमित की जा सकती है। इस बदलाव का सबसे अधिक असर हरियाणा पर पड़ने की संभावना है।
वर्तमान में हरियाणा के 14 जिले पूरी तरह या आंशिक रूप से एनसीआर में शामिल हैं। इनका कुल क्षेत्रफल 25 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक है। नया प्रस्ताव लागू होने पर यह क्षेत्र घटकर करीब 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर रह सकता है। इससे करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी जैसे जिलों के बड़े हिस्से एनसीआर की सीमा से बाहर हो सकते हैं।
इस मुद्दे को सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उठाया था। उनका तर्क था कि दिल्ली से काफी दूर स्थित जिलों को एनसीआर में बनाए रखना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने एनसीआर के मौजूदा ढांचे की समीक्षा की आवश्यकता पर कई बार जोर दिया था। अब उनकी इसी सोच को रीजनल प्लान-2041 के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है।
क्या है हरियाणा सरकार का दिया गया सुझाव?
हरियाणा सरकार ने यह भी सुझाव दिया है कि राज्य के 11 राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर चौड़े कॉरिडोर को एनसीआर में शामिल रखा जाए . इससे सड़क और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े क्षेत्रों को फायदा मिल सकता है . माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से पानीपत और करनाल के कुछ हिस्सों को राहत मिल सकती है।
राज्य सरकार का कहना है कि एनसीआर में शामिल जिलों पर कई अतिरिक्त नियम और प्रतिबंध लागू होते हैं। वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का असर उन क्षेत्रों पर भी पड़ता है, जो दिल्ली के प्रभाव क्षेत्र से काफी दूर हैं। इससे उद्योग, निर्माण कार्य और अन्य आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।
यदि एनसीआर की सीमा में बदलाव होता है, तो इसका असर केवल एनसीआर का दर्जा खत्म होने तक सीमित नहीं रहेगा। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग, परिवहन परियोजनाओं, रेल कनेक्टिविटी, निवेश योजनाओं और रियल एस्टेट सेक्टर पर भी प्रभाव पड़ सकता है।अब सभी की नजर 16 जून को होने वाली एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक पर टिकी है, जहां इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय की दिशा तय हो सकती है।
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