बंदियों को जमानत, पैरोल की होगी समीक्षा, 30 अप्रैल तक चलेगा अभियान

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 05 Mar, 2026 07:51 PM

prisoners bail and parole will be reviewed

हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा 1 मार्च से 30 अप्रैल 2026 तक “न्याय और सम्मान महिला एवं वृद्ध बंदियों के लिए अभियान” चलाया जा रहा है।

गुड़गांव, (ब्यूरो): हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा 1 मार्च से 30 अप्रैल 2026 तक “न्याय और सम्मान महिला एवं वृद्ध बंदियों के लिए अभियान” चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य जेलों में बंद महिला बंदियों और वरिष्ठ नागरिक बंदियों को न्याय तक पहुंच, निःशुल्क विधिक सहायता और विभिन्न कल्याणकारी सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराना है।

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मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राकेश कादियान ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य महिला और वृद्ध बंदियों को समय पर विधिक सहायता उपलब्ध कराना तथा उनके अधिकारों और सम्मान की रक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि महिला और वृद्ध बंदी आपराधिक न्याय प्रणाली के सबसे संवेदनशील वर्गों में शामिल हैं। कई मामलों में उन्हें विधिक जागरूकता की कमी, पारिवारिक सहयोग के अभाव, स्वास्थ्य समस्याओं और समय पर विधिक प्रतिनिधित्व न मिलने जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा इस विशेष अभियान के माध्यम से उनकी सहायता के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।

 

अभियान के दौरान जेलों में विधिक जागरूकता कार्यक्रम और “अपने अधिकार जानें” सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बंदियों को उनके संवैधानिक अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता, जमानत के प्रावधान, पैरोल और फर्लो की प्रक्रिया सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। इन कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नाटक, भूमिका-अभिनय, लघु वीडियो और सूचना पुस्तिकाओं का भी उपयोग किया जाएगा।

 

राकेश कादियान ने बताया कि पात्र बंदियों के मामलों की समीक्षा कर उन्हें आवश्यक विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी जेलों का दौरा कर महिला एवं वरिष्ठ नागरिक बंदियों से संवाद करेंगे और जमानत, पैरोल, रिहाई अथवा अन्य कानूनी राहत के लिए पात्र मामलों की पहचान करेंगे। इसके अलावा जेलों में विधिक सहायता क्लीनिक भी आयोजित किए जाएंगे, जहां पैनल अधिवक्ता और पैरा लीगल वालंटियर बंदियों को सीधे कानूनी परामर्श और सहायता प्रदान करेंगे।

 

अभियान के अंतर्गत पैनल अधिवक्ताओं के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम और जेल स्टाफ के लिए संवेदनशीलता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे महिला एवं वृद्ध बंदियों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके। साथ ही अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी के साथ समन्वय स्थापित कर पात्र बंदियों के मामलों की समय पर समीक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाएंगे तथा महिला बंदियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। यह अभियान जेल विभाग, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से संचालित किया जाएगा।

 

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