Edited By Manisha rana, Updated: 07 May, 2026 10:03 AM

“पंचायत विकास योजना के निर्माण की प्रक्रिया में पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (पाई) को प्रभावी संकेतक और मापक के रूप में व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में भारत सरकार खासी गंभीर है।
चंडीगढ़ (धरणी) : “पंचायत विकास योजना के निर्माण की प्रक्रिया में पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (पाई) को प्रभावी संकेतक और मापक के रूप में व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में भारत सरकार खासी गंभीर है। इसका उद्देश्य सतत विकास के वैश्विक लक्ष्यों को गांव-गांव तक पहुंचाकर उन्हें धरातल पर साकार करना है।” यह जानकारी हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी)विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला से लौटकर दी।
डॉ. चौहान ने बताया कि यह राष्ट्रीय कार्यशाला भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय के तत्वावधान में नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित की गई। इस कार्यशाला में देशभर से पंचायती राज संस्थाओं, ग्रामीण विकास विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, नीति-निर्माता, विषय विशेषज्ञ तथा विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के संदर्भ में ग्राम विकास योजना तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर प्रतिभागियों ने विस्तृत पूर्वाभ्यास किया।
उन्होंने कहा कि पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (पाई) एक ऐसा समग्र और वैज्ञानिक उपकरण है, जिसके माध्यम से ग्राम पंचायतों के विकास की वास्तविक स्थिति का आंकलन किया जा रहा है। यह इंडेक्स विभिन्न सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और प्रशासनिक मानकों पर आधारित होगा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कोई पंचायत विकास के किस स्तर पर है और उसे आगे बढ़ाने के लिए किन क्षेत्रों में विशेष प्रयास की आवश्यकता है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि इस इंडेक्स का प्रमुख उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDGs) को स्थानीय स्तर पर लागू करना है। उन्होंने कहा कि जब तक ग्राम पंचायतों की योजनाएं इन लक्ष्यों के अनुरूप नहीं बनेंगी, तब तक समग्र और संतुलित विकास संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि पाई स्कोर के माध्यम से पंचायतों के प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा, जिससे न केवल योजनाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। इसके साथ ही, बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को प्रोत्साहन मिलेगा और अन्य पंचायतों को उनसे सीखने का अवसर प्राप्त होगा।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि इस कार्यशाला में ई ग्राम स्वराज समेत विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग, डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजना निर्माण तथा सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत विकास योजना को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और तकनीकी सहयोग को भी सुदृढ़ किया जाएगा।
डॉ. वीरेंद्र चौहान ने कहा कि हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाते हुए राज्य की पंचायतों को इस नए ढांचे के अनुरूप प्रशिक्षित और मार्गदर्शित करेगा, ताकि राज्य की ग्राम पंचायतें विकास के नए मानक स्थापित कर सकें। कार्यशाला में भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय में सचिव विवेक भारद्वाज, अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी, जलशक्ति मंत्रालय में सचिव अशोक के मीणा, पंचायती राज निदेशक विपुल उज्जवल और विजय कुमार आदि आला अधिकारियों ने देश भर से आए ग्राम विकास संस्थानो के निदेशकों, पंचायती राज विभाग के अधिकारियों और अन्य प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया।