न नक्शा, न राख, न रिकॉर्डिंग…सबूतों की कमी से कैथल रिश्वत कांड में SHO समेत 2 आरोपी बरी, जानिए पूरा मामला

Edited By Krishan Rana, Updated: 16 Mar, 2026 03:24 PM

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कैथल के बहुचर्चित रिश्वत कांड मामले में जिला सत्र अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए चीका थाना के तत्कालीन SHO

कैथल (जयपाल रसूलपुर) : कैथल के बहुचर्चित रिश्वत कांड मामले में जिला सत्र अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए चीका थाना के तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर जयवीर शर्मा और उनके एक सहयोगी को बरी कर दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश नंदिता कौशिक की अदालत ने सुनवाई के दौरान विजिलेंस द्वारा पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत न किए जाने पर दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करार दिया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान विजिलेंस विभाग की जांच पर कई सवाल खड़े हुए।

 विजिलेंस द्वारा पेश किए गए चालान में नया आरोप लगाया गया था कि इंस्पेक्टर जयवीर ने रिश्वत के तौर पर लिए गए 5 हजार रुपये अपने सहयोगी को दे दिए थे, जो पैसे लेकर वहां से भाग गया और बाद में भाखड़ा नहर के पास जाकर उन्हें जला दिया। हालांकि सुनवाई के दौरान विजिलेंस उस स्थान का नक्शा भी अदालत में पेश नहीं कर पाई और न ही कथित रूप से जलाए गए नोटों की राख या कोई अन्य सबूत बरामद कर सकी।

इसके अलावा विजिलेंस ने अदालत में चीका थाना में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पेश करने का दावा किया था, लेकिन वह फुटेज भी अदालत में नहीं चल पाई। वहीं शिकायतकर्ता चांद राम द्वारा लगाया गया आरोप था कि एसएचओ जयवीर ने उसके खिलाफ थाने में आई शिकायत के निपटारे के बदले रिश्वत मांगी थी, लेकिन जांच के दौरान विजिलेंस को वह शिकायत ही थाने के रिकॉर्ड में नहीं मिली।

रिश्वत मांगने की कथित रिकॉर्डिंग जिस मोबाइल फोन में की गई थी, वह मोबाइल भी जांच एजेंसी बरामद नहीं कर सकी। सुनवाई के दौरान कई अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी विजिलेंस के तर्क कमजोर साबित हुए। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। इस मामले में इंस्पेक्टर जयवीर के वकील जनक राज ने बताया कि यदि जयवीर चाहें तो वह शिकायतकर्ता तथा विजिलेंस अधिकारियों के खिलाफ हर्जाने (कंपनसेशन) का मामला भी अदालत में दायर कर सकते हैं।

यह था मामला

गौरतलब है कि 2 फरवरी 2022 को हरियाणा स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने चीका थाना के तत्कालीन एसएचओ जयवीर शर्मा के खिलाफ रेड की थी। आरोप था कि उन्होंने चीका के पूर्व पार्षद प्रतिनिधि चांद राम से उसके खिलाफ आई शिकायत के निपटारे के बदले 5,000 रुपये रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट और शैडो गवाह की मौजूदगी में छापा मारकर जयवीर शर्मा को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए पकड़ा था।

हालांकि कार्रवाई के दौरान जयवीर के हाथों पर केमिकल का रंग तो पाया गया, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से उसके पास से रिश्वत की राशि बरामद नहीं हो सकी थी। इसके बावजूद विजिलेंस ने जयवीर को गिरफ्तार कर लिया था और कोर्ट से लगातार तीन बार उसका रिमांड भी लिया था, लेकिन जांच में कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लग पाए। बाद में अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अब लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया है।

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