जापान में गूंजा गीता का संदेश, मोरी कोकुदो को भेंट की गई श्रीमद्भगवद्गीता

Edited By Manisha rana, Updated: 19 Jun, 2026 07:48 AM

message of the gita resonated in japan

जापान की हाउस ऑफ काउंसिलर्स के अंतरराष्ट्रीय मामलों के महानिदेशक मोरी कोकुदो को भारतीय संस्कृति और सनातन ज्ञान की अमूल्य धरोहर श्रीमद्भगवद्गीता भेंट की गई। यह विशेष अवसर भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक...

चंडीगढ़ (धरणी) : जापान की हाउस ऑफ काउंसिलर्स के अंतरराष्ट्रीय मामलों के महानिदेशक मोरी कोकुदो को भारतीय संस्कृति और सनातन ज्ञान की अमूल्य धरोहर श्रीमद्भगवद्गीता भेंट की गई। यह विशेष अवसर भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला साबित हुआ। इस दौरान गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज तथा डॉ. अमित अग्रवाल (कमिश्नर एवं सचिव) विशेष रूप से उपस्थित रहे।

विश्वभर में गीता ज्ञान के प्रचार-प्रसार में अग्रणी हैं स्वामी ज्ञानानंद जी

गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज का नाम आज देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी श्रीमद्भगवद्गीता के प्रचार-प्रसार के लिए सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने अपना जीवन गीता के ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने और मानवता को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने के लिए समर्पित किया है। स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज विभिन्न देशों में जाकर गीता के संदेश को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं। उनके प्रवचनों में केवल धार्मिक विषय ही नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन, नेतृत्व क्षमता, कर्तव्यबोध, सकारात्मक सोच, तनावमुक्त जीवन और विश्व शांति जैसे विषय भी प्रमुखता से शामिल रहते हैं। यही कारण है कि युवाओं, शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों और विदेशी नागरिकों में भी उनके विचारों को व्यापक स्वीकार्यता मिल रही है।

जापान में चला रहे हैं विशेष गीता जागरण अभियान

इन दिनों स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज जापान प्रवास पर हैं, जहां वे विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और आध्यात्मिक मंचों पर गीता के संदेश का प्रचार कर रहे हैं। उनका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और सनातन संस्कृति की वैश्विक प्रासंगिकता को स्थापित करना है। जापान में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में स्वामी जी यह संदेश दे रहे हैं कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए जीवन जीने की कला सिखाने वाला मार्गदर्शक ग्रंथ है।

गीता भेंट कर दिया सांस्कृतिक मैत्री का संदेश

मोरी कोकुदो को श्रीमद्भगवद्गीता भेंट करते हुए स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांतों—वसुधैव कुटुम्बकम्, मानव कल्याण और विश्व बंधुत्व—का संदेश भी साझा किया। उन्होंने कहा कि गीता का ज्ञान सीमाओं, भाषाओं और देशों से परे समस्त मानव समाज को जोड़ने की क्षमता रखता है।

भारतीय आध्यात्मिक विरासत को मिल रही वैश्विक पहचान

स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के सतत प्रयासों के कारण विदेशों में भारतीय संस्कृति, योग, ध्यान और गीता के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है। जापान में उनका यह प्रवास भी उसी कड़ी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। उनके मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम भारत की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने का कार्य कर रहे हैं। भारत और जापान के बीच बढ़ते सांस्कृतिक संवाद के बीच यह आयोजन दोनों देशों के रिश्तों में आध्यात्मिक आयाम जोड़ने वाला महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ। स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज की पहल से गीता का सार्वभौमिक संदेश जापान सहित विश्व के अनेक देशों तक पहुंच रहा है, जो मानवता, सद्भाव और विश्व कल्याण की भावना को मजबूत कर रहा है।

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