Edited By Krishan Rana, Updated: 04 Jun, 2026 04:25 PM

केंद्र और हरियाणा सरकार ने डीएपी, यूरिया तथा अन्य खादों की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था को
पंचकूला : पश्चिम एशिया में बने युद्ध जैसे हालात और उर्वरकों की संभावित कमी को देखते हुए केंद्र और हरियाणा सरकार ने डीएपी, यूरिया तथा अन्य खादों की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए अब खाद वितरण में क्यूआर कोड और आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली लागू की जाएगी।
हरियाणा में यह उत्तर प्रदेश से सटे यमुना नगर तथा राजस्थान से सटे रेवाड़ी तथा महेंद्रगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है। इन जिलों का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यहां खाद वितरण में अनियमितताओं और कालाबाजारी की सबसे अधिक शिकायतें सामने आ रही थीं।
सरकार के अनुसार कई मामलों में हरियाणा के किसानों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर डीएपी और यूरिया को पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बेचा जा रहा था। इसके ही तहत हरियाणा के तीन जिला चुने गए हैं। यह कदम युद्ध संकट के चलते उर्वरक का आयात प्रभावित होने के चलते किया गया है।
बता दें कि प्रदेश के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा पहले ही यह कह चुके हैं कि कालाबाजारी रोकने के लिए नया सिस्टम अपनाया जा रहा है। इस योजना के लिए भी जल्द गाइडलाइन जारी कर दी जाएगी। कोड स्कैन नहीं होने पर किसान को आइडी आधार नंबर और आवेदन नंबर के जरिए भी यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
नई व्यवस्था में यह विकल्प इसलिए दिया गया है कि किसानों को किसी तरह की परेशानी नही हो। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे पूरे हरियाणा में लागू करने की तैयारी भी की जा रही है।
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