स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे पकड़े कोख के दो कातिल, फर्जी सर्टिफिकेट दिखाकर खुद को बता रहे थे डॉक्टर

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 20 May, 2025 03:09 PM

health department raid on clinic and caught fake doctor with mtp kit

स्वास्थ्य विभाग ने अवैध रूप से कोख में पल रहे बच्चे का कत्ल करने वाले दो फर्जी डॉक्टरों को काबू किया है। सूचना के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक डेकॉय कस्टमर को भेजकर इन फर्जी डॉक्टरों से अबॉर्शन की दवाएं खरीदवाई जिसके बाद इन दोनों को टीम ने...

गुड़गांव, (ब्यूरो): स्वास्थ्य विभाग ने अवैध रूप से कोख में पल रहे बच्चे का कत्ल करने वाले दो फर्जी डॉक्टरों को काबू किया है। सूचना के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक डेकॉय कस्टमर को भेजकर इन फर्जी डॉक्टरों से अबॉर्शन की दवाएं खरीदवाई जिसके बाद इन दोनों को टीम ने पुलिस की मदद से मौके पर काबू कर लिया। आरोपियों द्वारा स्वयं को आरएमडी डॉक्टर बताया गया, लेकिन जब उनके सर्टिफिकेट की जांच की गई तो यह सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। डीएलएफ फेज-3 थाना पुलिस ने केस दर्ज कर न केवल आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया बल्कि इनके क्लीनिक को सील करते हुए इनके कब्जे से अबॉर्शन की दवाएं भी बरामद की हैं।

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स्वास्थ्य विभाग व औषधि नियंत्रक विभाग को सूचना मिली थी कि डीएलएफ फेज-3 में अवैध रूप से महिलाओं का गर्भपात कराया जा रहा है। इस सूचना के बाद एक टीम का गठन किया गया और एक डेकॉय कस्टमर को बुलाया गया। करीब 9 सप्ताह की गर्भवती का अल्ट्रासाउंड कराकर यह सुनिश्चित किया गया कि वह गर्भवती है। उसे सबसे पहले डीएलएफ फेज-3 के यू ब्लाॅक के पास बने बंगाली क्लीनिक पर भेजा गया। टीम ने डेकॉय कस्टमर को रुपए देकर भी भेजे जो गर्भपात की दवा लेने के दौरान डेकॉय ने कथित डॉक्टर को दिए। गर्भपात की दवा लेने के बाद जैसे ही डेकॉय कस्टमर क्लीनिक से आगे बढ़ी और उसने टीम को इशारा किया तो टीम ने तुरंत ही क्लीनिक में रेड कर दी। यहां मौजूद व्यक्ति ने खुद को डॉ परेश नुनिया बताया। उससे पूछताछ में उसने खुद को RMP बताते हुए सामाजिक चिकित्सा महासंघ का सर्टिफिकेट दिखाया। जांच करने पर यह फर्जी पाया गया। इसके बाद टीम ने उसे काबू कर लिया और उसके कब्जे से एक एमटीपी किट बरामद की।

 

वहीं, टीम ने इसी डेकॉय कस्टमर के साथ मिल इसी क्षेत्र में नवज्योति क्लीनिक पर रेड की। इसी तरह यहां पर भी मिले व्यक्ति ने खुद को डॉ सैलेन सरकार  बताया। जांच के दौरान उसने भी सामाजिक चिकित्सा महासंघ का सर्टिफिकेट दिखाया जो जांच में फर्जी निकला। इस पर टीम का नेतृत्व कर रहे पलड़ा पीएचसी के डॉ हरीश कुमार ने डीएलएफ फेज-3 थाना पुलिस को शिकायत दी। उन्होंने पुलिस को बताया कि आरोपियों द्वारा एक हजार रुपए में एमटीपी किट बेची जा रही थी। इस पर प्रिंट रेट 460 रुपए मिला। इसके साथ ही इन दोनों के पास आरएमपी डॉक्टर का कोई सर्टिफिकेट तक नहीं है। वहीं, आरोपियों के कब्जे से टीम ने एमटीपी किट भी बरामद की है। इस पर पुलिस ने केस दर्ज करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। 

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