Edited By Manisha rana, Updated: 22 Dec, 2025 10:17 PM

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व उपमुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के पौत्र एवं राजनीतिक नेता दिग्विजय चौटाला द्वारा दायर सुरक्षा याचिका का निस्तारण करते हुए हरियाणा सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता और उनके परिवार की जान-माल की सुरक्षा...
चंडीगढ़ (धरणी) : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व उपमुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के पौत्र एवं राजनीतिक नेता दिग्विजय चौटाला द्वारा दायर सुरक्षा याचिका का निस्तारण करते हुए हरियाणा सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता और उनके परिवार की जान-माल की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाए। यह आदेश जस्टिस संजय वशिष्ठ ने पारित किया।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया कि बिश्नोई गेंग की ओर से याचिकाकर्ता को गंभीर धमकियां प्राप्त हुई थीं। इन धमकियों के आधार पर 30 जुलाई 2025 को डबवाली थाने में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। इसके बावजूद राज्य के वर्तमान पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने 10 दिसंबर 2025 को बिना किसी ठोस कारण अथवा लिखित स्पष्टीकरण के याचिकाकर्ता की सुरक्षा वापस ले ली, जो न केवल मनमाना कदम है बल्कि संभावित खतरे को नजरअंदाज करने जैसा भी है।
याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत का ध्यान इस तथ्य की ओर भी दिलाया कि डीजीपी का चौटाला परिवार के प्रति कथित विरोधात्मक रवैया उनके एक आंतरिक संचार से भी झलकता है, जो 11 दिसंबर को मीडिया मंच में प्रकाशित हुआ था। दलील दी गई कि ऐसे माहौल में सुरक्षा हटाया जाना याचिकाकर्ता और उनके परिवार की जान को गंभीर जोखिम में डाल सकता है।
सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया, लेकिन साथ ही हरियाणा सरकार को यह निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता द्वारा जताई गई आशंकाओं को गंभीरता से ले और उनकी तथा उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम तत्काल उठाए। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि राज्य का दायित्व है कि वह किसी भी नागरिक को प्राप्त खतरों की निष्पक्ष समीक्षा कर उचित सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराए।
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