हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के VC  तीन हफ्ते में पद से देंगे इस्तीफा, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दी जानकारी

Edited By Harman, Updated: 01 Oct, 2026 05:51 PM

haryana sports university vc to resign from the post in three weeks

हरियाणा की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी राई के वाइस चांसलर एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार 3 सप्ताह के भीतर इस्तीफा देंगे।

चंडीगढ़ (चंद्र शेखर धरणी) : हरियाणा की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी राई के वाइस चांसलर एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार 3 सप्ताह के भीतर इस्तीफा देंगे। वीसी की तरफ से हाईकोर्ट को यह जानकारी दी गई है। पूर्व आईपीएस अशोक कुमार की नियुक्ति को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। जिसके बाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अशोक कुमार ने कोर्ट को बताया कि व्यक्तिगत कारणों से वे पद पर बने रहने में असमर्थ हैं और 3 सप्ताह के भीतर इस्तीफा सौंप देंगे।

वीसी द्वारा यह जानकारी दिए जाने के बाद जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ ने याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस्तीफा स्वीकार करने और 31 अक्टूबर 2026 तक इससे जुड़ी सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अशोक कुमार नवंबर 2023 में उत्तराखंड के डीजीपी पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके करीब 4 महीने बाद 1 मार्च 2024 को उन्हें हरियाणा की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का वीसी नियुक्त किया गया। उनसे पहले रिटायर्ड आईपीएस एसएस देशवाल भी कार्यकाल पूरा होने से पहले वीसी पद से इस्तीफा दे चुके हैं।

इस संबंध में डॉ. देवेंद्र सिंह मोर और एक अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जब कुलपति अशोक कुमार ने जॉइन किया, तब डॉ. डीएस मोर स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में कंट्रोल ऑफ एग्जाम के पद पर कार्यरत थे। साल 2023 में उन्होंने यूनिवर्सिटी में जॉइन किया था। साल 2024 में उन्होंने एक विवाद के बाद कोर्ट का रुख किया था। इसमें अशोक कुमार की नियुक्ति को अवैध और नियमों के खिलाफ बताते हुए रद्द करने की मांग की गई। साथ ही उनके वेतन निर्धारण (15 जुलाई 2024 के पत्र) को भी चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि यूनिवर्सिटी को मान्यता मिली है, वो कंडीशनल है कि वो यूजीसी एक्ट के नियमों का पालन करेगी। वीसी के लिए 10 साल का प्रोफेसर का अनुभव होना जरूरी है। अशोक कुमार कभी प्रोफेसर नहीं रहे हैं। न ही उन्होंने पीएचडी की है।

अशोक कुमार की ओर से तर्क दिया था कि पहला वाइस चांसलर सरकार नियुक्त कर सकती है। इस पर डीएस मोर की ओर से तर्क दिया कि एक्ट में कहीं नहीं लिखा कि अयोग्य व्यक्ति को भी पहला वाइस चांसलर बना दिया जाए। गुरुवार को इस याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कुलपति 3 सप्ताह में इस्तीफा देंगे और सरकार उसे एक सप्ताह के भीतर स्वीकार करेगी। यूनिवर्सिटी एक्ट के नियम-2 के तहत, स्थायी व्यवस्था या नए वीसी की नियुक्ति होने तक यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ डीन अंतरिम कुलपति के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि नए कुलपति की नियुक्ति नियमों के तहत ही की जाए।

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