अब आसानी से नहीं मिलेगा कॉलोनी का लाइसेंस...हरियाणा सरकार ने कड़े किए नियम, कमियां मिलीं तो आवेदन रद्द

Edited By Harman, Updated: 30 Sep, 2026 10:55 AM

haryana makes major changes in colony licensing rules

हरियाणा सरकार ने रिहायशी कॉलोनियों को लाइसेंस देने से जुड़े नियमों को अधिक कड़ा करने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत आवेदनों की गहन जांच-परख के साथ-साथ कम घनत्व वाली

हरियाणा डेस्क : हरियाणा सरकार ने रिहायशी कॉलोनियों को लाइसेंस देने से जुड़े नियमों को अधिक कड़ा करने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत आवेदनों की गहन जांच-परख के साथ-साथ कम घनत्व वाली पर्यावरण-अनुकूल (इको-फ्रेंडली) परियोजनाओं के लिए सौर ऊर्जा, जल पुनर्चक्रण (वाटर रीसाइक्लिंग), सीवेज उपचार और अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं को अनिवार्य बनाने का प्रावधान किया गया है। 

90 दिन में जांच और 60 दिन में कमियां दूर करना जरूरी

नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग ने एक असाधारण गजट अधिसूचना जारी कर‘हरियाणा विकास एवं शहरी क्षेत्र विनियमन (संशोधन) नियम, 2026'का मसौदा प्रकाशित किया है, जिसके माध्यम से 1976 के मूल नियमों में संशोधन का प्रस्ताव है। यह मसौदा हरियाणा विकास एवं शहरी क्षेत्र विनियमन अधिनियम, 1975 की धारा 24 के तहत जारी किया गया है। सरकार प्रकाशन की तिथि से 30 दिनों की अवधि बीत जाने के बाद लिखित रूप में प्राप्त आपत्तियों या सुझावों पर विचार कर प्रस्तावित नियमों को लागू करेगी। प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, नियम 6 के तहत कॉलोनाइज़र 50 रुपये प्रति वर्ग मीटर का शुल्क देकर निदेशक से आवश्यक दस्तावेज और योजनाएं तैयार करने का अनुरोध कर सकता है। वहीं, नियम 7 में संशोधन कर यह स्पष्ट किया गया है कि आवेदन तभी मान्य होंगे, जब वे सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ निर्धारित प्रारूप में जमा किए जाएंगे। विभाग को आवेदन प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर अपनी आपत्तियां या टिप्पणियां देनी होंगी। यदि आवेदक 60 दिनों के भीतर कमियों को दूर कर पुन: आवेदन जमा करता है, तो उसकी जांच फीस बरकरार रहेगी; अन्यथा आवेदन निरस्त कर फीस जब्त कर ली जाएगी। नियम 9 के तहत, नियमों का पालन न करने, तकनीकी रूप से अयोग्य योजनाओं या अत्यधिक जल-निकासी लागत जैसे कारणों पर सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद आवेदन को खारिज किया जा सकेगा। 

पर्यावरण-अनुकूल प्रोजेक्ट अनिवार्य

पर्यावरण के द्दष्टिकोण से, कम घनत्व वाली इको-फ्रेंडली कॉलोनियों के लिए नियम 11(3) में सख्त प्रावधान किये गये हैं। इसके अंतर्गत डेवलपर्स को प्रत्येक इकाई के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र, वर्षा जल संचयन व पुनर्चक्रण प्रणाली, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और जैविक कचरे के निपटान के लिए खाद संयंत्र लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही, ऐसी कॉलोनियों में रिहायशी घनत्व अधिकतम '25 प्रतिशत प्रति एकड़' तक सीमित रखने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवेदन पत्र‘फॉर्म एलसी -ढ्ढ‘,‘एलसी-ढ्ढढ्ढ'और‘एलसी-ढ्ढढ्ढढ्ढ'को पूरी तरह से बदला जा रहा है। नये एलसी-ढ्ढ फॉर्म के तहत डेवलपर और भू-स्वामियों को अपनी वित्तीय क्षमता, शेयरहोल्डिंग पैटर्न, पिछले तीन वर्षों के आयकर रिटर्न, सीए द्वारा प्रमाणित नेट वर्थ, ज़मीन के मालिकाना हक, लीज और चल रहे मुकदमों की विस्तृत जानकारी देनी होगी। आवेदकों को गलत जानकारी या कानूनी विसंगतियों से होने वाले नुकसान से विभाग को सुरक्षित रखने के लिए एक क्षतिपूर्ति बांड भी जमा करना होगा। यह अधिसूचना नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल द्वारा जारी की गयी है। 


 

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